{"vars":{"id": "123258:4912"}}

Haryana Electricity Department News: एसई जीतू राम तंवर सुसाइड मामले में गरमाई राजनीति, निष्पक्ष जांच और गिरफ्तारी की मांग

करनाल में एसई जीतू राम तंवर की मौत के मामले में परिजनों और दलित समाज ने आरोपियों की गिरफ्तारी तक अंतिम संस्कार से इनकार किया है।
 

करनाल:करनाल में बिजली विभाग के अधीक्षक अभियंता यानी SE जीतू राम तंवर की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. पोस्टमार्टम के बाद भी परिजनों और दलित समाज के लोगों ने शव लेने से इनकार कर दिया. परिजनों का कहना है कि जब तक कथित तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा.

"अधिकारियों की प्रताड़ना से परेशान थे जीतू राम": जीतू राम तंवर के भाई सुरेश कुमार और दलित समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि, "जीतू राम लंबे समय से कुछ अधिकारियों के व्यवहार और कथित प्रताड़ना से परेशान थे. जीतू राम को भरोसा था कि उनकी बहाली हो जाएगी, लेकिन वह लगातार मानसिक दबाव में थे. उन्होंने अपनी शिकायतें वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाईं, लेकिन उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली."

"दलित समाज में जन्म लेना क्या गुनाह है?": परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि, "जीतू राम कथित जातीय उत्पीड़न को लेकर भी परेशान थे. उन्हें उनकी जाति को लेकर अपमानजनक टिप्पणियों और भेदभाव का सामना करना पड़ा. अगर एक अधिकारी के साथ इस तरह का व्यवहार हो सकता है तो आम दलित व्यक्ति के लिए परिस्थितियां कितनी मुश्किल होंगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. हमने दलित समाज में जन्म ले लिया तो इस संसार में हमने बहुत बड़ा गुनाह कर दिया. आगे कोई भी दलित न तो अपने बेटे को पढ़ाएगा और न ही कोई अफसर बनाएगा. जैसे वाई पूरण कुमार ने भी यही काम किया था और मेरे भाई गीतूराम तंवर ने भी यही सुसाइड जैसा काम किया. ये लोग बार-बार हमें जातीय उत्पीड़न के लिए परेशान करते है."

"शिकायतें दीं, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?": परिजनों ने पूरे मामले में पुलिस और विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं. भाई सुरेश कुमार का कहना है कि, "जीतू राम ने IG सोनीपत और विभाग के MD सहित वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायतें दी थीं. अगर शिकायतें पहले ही दी गई थीं तो उन पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?"

FIR को लेकर भी परिजनों में नाराजगी: परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद FIR दर्ज कराने में भी काफी देरी हुई. पुलिस को सुसाइड नोट भी सौंपा गया, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई में समय लगा.उन्हें दी गई FIR की प्रति में आरोपियों को नामजद नहीं किया गया है. इसी को लेकर परिवार और समाज के लोगों में भारी नाराजगी है.

पोस्टमार्टम में देरी पर पुलिस से सवाल: मामले में पोस्टमार्टम में हुई देरी को लेकर भी परिजनों ने सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि एक वरिष्ठ अधिकारी की मौत के मामले में पोस्टमार्टम करीब 12 घंटे बाद हुआ. परिवार ने सवाल किया कि आखिर ऐसी देरी की वजह क्या रही और पुलिस प्रशासन किस दबाव में काम कर रहा है?

गिरफ्तारी और कार्रवाई तक अंतिम संस्कार से इनकार:परिवार और दलित समाज के लोगों ने साफ कर दिया है कि वे कथित तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहते हैं. उनकी मांग है कि आरोपियों को तत्काल नामजद किया जाए, निष्पक्ष जांच हो और दोषियों की गिरफ्तारी की जाए. परिजनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे जीतू राम तंवर का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे.