{"vars":{"id": "123258:4912"}}

Haryana Paddy Procurement News: कुरुक्षेत्र में किसानों और प्रशासन के बीच तनातनी, टिकैत ग्रुप ने भी दिया चढूनी को समर्थन

हरियाणा के शाहाबाद में धान की सरकारी खरीद शुरू करने की मांग को लेकर किसानों का प्रदर्शन। गुरनाम सिंह चढूनी ने बुलाई महापंचायत।
 

कुरुक्षेत्र: हरियाणा में धान की सरकारी खरीद जल्द शुरू कराने की मांग को लेकर कुरुक्षेत्र के शाहाबाद में किसान और प्रशासन आमने-सामने हैं. मंगलवार को प्रशासन और किसान नेताओं के बीच दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका. प्रशासन ने 25-26 सितंबर से सरकारी खरीद शुरू करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन भारतीय किसान यूनियन चढूनी के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने इसे मानने से इनकार कर दिया. उनका कहना है कि किसानों की मांग खरीद तुरंत शुरू करने की है. वहीं किसानों की महापंचायत को देखते हुए कई किसान नेताओं को डिटेन किया गया है.

आज किसान पंचायत में होगा फैसला: मंगलवार रात किसान शाहाबाद-बराड़ा स्टेट हाईवे-4 पर ही धरने पर बैठे रहे. शाम को सड़क पर ही लंगर लगाया गया. रात में गर्मी को देखते हुए सड़क पर कूलर लगाए गए. कुछ किसान दरी बिछाकर वहीं सोए, जबकि कई किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली और वाहनों में रात गुजारी. आज गुरनाम चढूनी ने किसान पंचायत बुलाई है. इसमें मंगलवार को प्रशासन के साथ हुई बातचीत, पुलिस के साथ हुए टकराव और धान खरीद को लेकर सरकार के रुख पर चर्चा की जाएगी. इसके बाद आंदोलन की अगली रणनीति तय होगी. चढूनी ने अन्य किसान संगठनों को भी बैठक में शामिल होने का न्योता दिया है.

टिकैत ग्रुप ने दिया समर्थन: भारतीय किसान यूनियन टिकैत ग्रुप ने चढूनी ग्रुप को समर्थन दिया है. भारतीय किसान यूनियन टिकैत ग्रुप के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान कहा कि किसानों के ऊपर कल लाठीचार्ज हुआ और आंसू गैस के गोले छोड़े गए, जबकि किसान सिर्फ अपनी धान खरीद की मांग कर रहा था. हमारे मुद्दे एक हैं अब हम सब एक हैं. रतन मान ने ज्यादा से ज्यादा संख्या में अपने ग्रुप के किसानों को शाहाबाद महापंचायत में पहुंचने की अपील की. उन्होंने कहा कि किसान संगठनों के एक ही मुद्दे हैं. हमें किसानों के हक की लड़ाई लड़नी है. इसलिए ज्यादा से ज्यादा संख्या में शाहबाद पहुंचे.

क्या धान की खरीद की मांग करना गुनाह है? किसान सिर्फ धान की खरीद की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की मंशा किसानों को परेशान करने की है. कुरुक्षेत्र में किसानों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़ना, वाटर कैनन का इस्तेमाल करना इस बात का प्रमाण है. सरकार को किसानों की मांग जल्द से जल्द पूरी करनी चाहिए. हम सब साथ हैं. इसलिए मेरी सभी साथियों से अपील है कि बड़ी संख्या में कुरुक्षेत्र पहुंचकर इस महापंचायत को सफल बनाएं .

किसानों की मांग क्या है? किसानों की मुख्य मांग है कि धान की सरकारी खरीद तत्काल शुरू की जाए. चढ़ूनी का कहना है कि मंडियों में धान पहुंचना शुरू हो चुका है, ऐसे में किसानों को सरकारी खरीद के लिए कई दिन इंतजार कराने से उन्हें नुकसान हो सकता है. किसान नेता ने प्रशासन के 25 सितंबर से खरीद शुरू करने के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर हरियाणा सरकार के पास खरीद शुरू करने की शक्ति है तो इसे अभी शुरू किया जाना चाहिए. वहीं, अगर इसके लिए केंद्र की मंजूरी जरूरी है तो किसानों को 25 सितंबर की तारीख क्यों दी जा रही है.

धान खरीद के लिए जरूरी पोर्टल वेरिफिकेशन में देरी: किसानों की ओर से यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि धान खरीद के लिए जरूरी पोर्टल वेरिफिकेशन में देरी क्यों हुई. चढूनी ने आरोप लगाया कि पोर्टल की वेरिफिकेशन 31 जुलाई को बंद हो गई थी और अब किसानों के आंदोलन के बाद इसे दोबारा शुरू किया गया है. उनका दावा है कि खेतों में जाकर सत्यापन के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा है, जिससे गलत या फर्जी वेरिफिकेशन की आशंका पैदा हो सकती है. ये आरोप किसान नेता के हैं, प्रशासन की ओर से इन आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है.

प्रशासन का क्या कहना है? कुरुक्षेत्र के DC विश्राम कुमार मीणा के अनुसार "हरियाणा सरकार ने धान की जल्द खरीद शुरू करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है. इसमें खरीद व्यवस्था और नमी के मानकों में छूट से संबंधित प्रस्ताव भी शामिल हैं. राज्य सरकार की ओर से केंद्र द्वारा मांगे गए सुझावों का जवाब भी भेजा जा चुका है. प्रशासन को केंद्र से जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है. मंजूरी मिलने के बाद खरीद शुरू की जाएगी. साथ ही, अगर केंद्र से मंजूरी में और देरी होती है तो राज्य सरकार की ओर से करीब 25 सितंबर से खरीद शुरू करने की व्यवस्था की जाएगी."