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मनीषा मौत मामला: सीबीआई जांच तेज, परिवार ने उठाए सबूतों पर बड़े सवाल

भिवानी मनीषा मौत मामले में सीबीआई की जांच जारी। पिता संजय और भाकियू नेताओं ने सीसीटीवी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सुसाइड नोट को लेकर सीबीआई के सामने रखे अहम सवाल।

 

भिवानी। मनीषा मौत मामले की जांच में सीबीआई अधिकारियों ने कोई दबाव न होने की बात कही है। उन्होंने हर पहलू पर निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। 14 जुलाई को दिल्ली में सीबीआई अधिकारियों से मनीषा के पिता संजय और कमेटी सदस्यों ने मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक में सीबीआई ने उनसे जांच के संबंध में सुझाव मांगे।

सीबीआई के जांच अधिकारियों ने स्वयं मनीषा के पिता संजय और मुलाकात करने गई कमेटी सदस्यों से जांच के संबंध में सुझाव मांगे। इस पर संजय और भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) नेताओं ने दो सबसे अहम बिंदु प्रस्तुत किए। पहला बिंदु सीसीटीवी फुटेज और मनीषा के सामान की बरामदगी से जुड़ा था। भाकियू जिला अध्यक्ष मेवा सिंह आर्य ने बताया कि मनीषा अंतिम बार सीसीटीवी में एक थैली हाथ में लिए हुए दिखी थी। कहा गया था कि उस थैली में दवाइयां थी। परंतु उस थैली में दवाई की कोई शीशी बरामद नहीं हुई। केवल पर्स और मोबाइल फोन टूटे-फूटे हालत में मिले।

यह बड़ा सवाल है कि यदि उसने जहर खरीदा था तो उसकी शीशी कहां चली गई। दूसरा अहम बिंदु मनीषा के गायब रहने के समय अंतराल से संबंधित था। मनीषा 11 अगस्त की सुबह आठ बजे घर से निकली थी। 13 अगस्त की सुबह उसकी लाश सिंघानी नहर के पास क्षत-विक्षप्त हालत में मिली। चिकित्सकों की रिपोर्ट के अनुसार मनीषा की मौत करीब 15 घंटे पहले हुई थी। इसका अर्थ है कि मौत 12 अगस्त की शाम के बाद हुई। 11 अगस्त सुबह से 12 अगस्त शाम तक के करीब 24 घंटे का अंतराल है। इस कड़ी को जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।

सुसाइड नोट पर भी संशय
भाकियू जिला अध्यक्ष मेवा सिंह आर्य ने सुसाइड नोट पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि लोकल पुलिस द्वारा दिए गए सुसाइड नोट में भिन्नता है। पहले दिखाया गया सुसाइड नोट कोरे कागज पर था। बाद में जो सुसाइड नोट साझा किया गया वह लाइनदार पेज पर था। इससे यह अंदेशा होता है कि सुसाइड नोट फर्जी तरीके से तैयार किया गया है। यह महत्वपूर्ण सवाल भी सीबीआई के सामने रखा गया है।

पिता का न्याय के लिए संघर्ष
मनीषा के पिता संजय पिछले दस माह से अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए दर-दर भटक रहे थे। इस लंबी अवधि में उन्हें न्याय की उम्मीद कम होती दिख रही थी। आखिरकार 14 जुलाई को दिल्ली में सीबीआई अधिकारियों से उनकी मुलाकात हुई। इस बैठक के बाद उन्हें कुछ राहत भरी बात सुनने को मिली। सीबीआई अधिकारियों के साथ डेढ़ घंटे तक चली इस चर्चा में पिता संजय और भाकियू नेताओं ने अपनी बात रखी। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि अब उन्हें यह महसूस हो रहा है कि जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में विसंगति और देरी
भाकियू जिला प्रधान मेवा सिंह आर्य ने बताया कि सीबीआई टीम ने बैठक में निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि जांच में सबसे बड़ा पेच तीन पोस्टमार्टम रिपोर्टों से आया है। भिवानी, रोहतक और दिल्ली की इन तीनों रिपोर्टों में गंभीर विसंगति पाई गई है। ये विसंगतियां कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करती हैं। सीबीआई ने संबंधित चिकित्सकों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है लेकिन अभी तक वह प्राप्त नहीं हुई है। सीबीआई जांच अधिकारियों ने माना कि चिकित्सकों के इस ढुलमुल रवैये के कारण ही मामले की जांच में देरी हो रही है।