मनीषा न्याय मामला: पिता का 9 घंटे चला आमरण अनशन, एसपी के आश्वासन पर समाप्त
10 माह बाद भी मनीषा को नहीं मिला न्याय। पिता संजय ने किया आमरण अनशन, पुलिस ने रास्ते में रोका। एसपी सुमित कुमार के आश्वासन के बाद अनशन समाप्त। जानें पूरा मामला।
भिवानी। ढाणी लक्ष्मण निवासी मनीषा के पिता बेटी की मौत के बाद 10 माह बाद भी न्याय के लिए सिस्टम से लड़ रहे हैं। सोमवार को लघु सचिवालय के बाहर आमरण अनशन के लिए घर से निकले तो पुलिस ने कुडलबास के पास रोक लिया। हालांकि 9 घंटे बाद शाम सात बजे पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार के आश्वासन पर अनशन समाप्त कर दिया।
संजय ने उपायुक्त से 29 जून को लघु सचिवालय के बाहर आमरण अनशन करने की अनुमति मांगी थी। अनुमति नहीं मिलने के बावजूद तय कार्यक्रम के अनुसार कमेटी सदस्यों के साथ भिवानी के लिए रवाना हुए। कुडलबास के पास पुलिस ने उनकी गाड़ी रुकवा ली और उन्हें आगे नहीं जाने दिया। समर्थन में जनसंगठनों और किसान संगठनों के पदाधिकारी पहुंचे तो पुलिस ने वाटर पार्क के पास सभी को रोक दिया।मनीषा के दादा गुहार लगाते रहे मगर उनकी बात नहीं सुनी। संजय को कुडलबास में रोके जाने की सूचना मिलने पर किसान नेता सुरेश कोथ मौके पर पहुंचे और संजय को माला पहनाकर अनशन पर बैठाया।
एसडीएम हाथ जोड़कर बोले - प्रशासन बात सुनने को तैयार
अनशन पर बैठे संजय और ग्रामीणों से बातचीत के लिए करीब साढ़े 11 बजे लोहारू एसडीएम मनोज दलाल पहुंचे। उन्होंने हाथ जोड़ते हुए कहा कि प्रशासन उनकी बात सुनने को तैयार है। आपकी बात उच्चाधिकारियों तक भेज दी है। पांच लोग प्रशासन से बातचीत कर सकते हैं पर संजय ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया।
पुलिस ने लघु सचिवालय के बाहर जुटे लोगों को खदेड़ा
सुबह करीब साढ़े दस बजे मनीषा के दादा लघु सचिवालय के बाहर पहुंच गए। उनका समर्थन करने कांग्रेस जिला शहरी अध्यक्ष प्रदीप गुलिया भी पहुंचे। पुलिस ने उन्हें हटाने का प्रयास किया। इसी दौरान धक्का-मुक्की हुई। गुलिया ने पुलिस की कार्रवाई को तानाशाही बताया। संजय को कुडलबास के पास रोके जाने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में महिलाएं भी पहुंच गईं। उन्होंने काफी देर तक सड़क पर हंगामा किया। बाद में महिला पुलिस ने उन्हें हटाया। डीएसपी संजीव गौड़ ने भी ग्रामीणों से बातचीत कर शांति बनाए रखने की अपील की।
पुलिस ने निभाया इंसानियत का फर्ज, ठंडा पानी और कोल्ड ड्रिंक पिलाई
लोहारू। कुडलबास में संजय के नेतृत्व में अनशन के दौरान लोहारू पुलिस ने मानवीय संवेदनाओं का परिचय दिया। तेज गर्मी को देखते हुए पुलिस ने धरनास्थल पर मौजूद लोगों के लिए ठंडे पानी, कोल्ड ड्रिंक और चाय की व्यवस्था कराई।
यह रहा घटनाक्रम
सुबह 9:30 बजे: मनीषा के पिता संजय कमेटी सदस्यों के साथ घर से भिवानी के लिए रवाना हुए।
9:45 बजे: कुडलबास के पास पुलिस ने संजय को रोक दिया। 10:00 बजे: संजय लघु सचिवालय जाने की बात पर अड़े रहे लेकिन पुलिस ने नहीं जाने दिया।
10:30 बजे: लोहारू डीएसपी संजीव गौड़ मौके पर पहुंचे और संजय से बातचीत की।
11:30 बजे: किसान नेता सुरेश और अन्य पदाधिकारी पहुंचे। संजय को माला पहनाकर अनशन पर बैठाया।
दोपहर 12:30 बजे: लोहारू एसडीएम मनोज दलाल धरनास्थल पर पहुंचे।
1:30 बजे: एसडीएम ने ग्रामीणों को प्रशासन की ओर से बातचीत का निमंत्रण दिया।
2:30 बजे: ग्रामीणों ने वार्ता का प्रस्ताव ठुकराया और अनशन जारी रखने का एलान किया।
4:30 बजे: धरनास्थल के आसपास पुलिस सुरक्षा बढ़ाई।
6:30 बजे: पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार धरनास्थल पर पहुंचे और संजय व अन्य ग्रामीणों से बातचीत की।
7:00 बजे: एसपी के आश्वासन के बाद संजय और ग्रामीणों ने अनशन समाप्त किया।
मनीषा मौत की अनसुलझी पहेली
11 अगस्त 2025: मनीषा सुबह घर से स्कूल के लिए निकली थी लेकिन वापस नहीं लौटी।
13 अगस्त: सिंघानी के खेतों में मनीषा का क्षत-विक्षत शव मिला।
14 अगस्त: भिवानी के नागरिक अस्पताल में परिजनों ने धरना देकर हत्या की आशंका जताई।
16 अगस्त: लोहारू थाने के सभी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया और तत्कालीन एसपी का तबादला कर दिया गया। इसके बाद भी परिजनों ने शव नहीं लिया।
18 अगस्त: सुसाइड नोट सामने आने के बाद मामले को आत्महत्या बताया गया जिससे परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया। रोहतक पीजीआई के बाद एम्स, दिल्ली में तीसरी बार शव का पोस्टमार्टम कराया गया।
20 अगस्त: मुख्यमंत्री ने मामला सीबीआई को सौंपने का आश्वासन दिया।
21 अगस्त: परिजनों ने मनीषा का अंतिम संस्कार किया।
26 अगस्त: मामला सीबीआई को सौंप दिया गया।
3 सितंबर: सीबीआई की छह सदस्यीय टीम पहली बार गांव सिंघानी पहुंची। इसके बाद करीब पांच बार दिल्ली से भिवानी आकर मामले से जुड़े तथ्यों की जांच की।
17 जून 2026: ढाणी लक्ष्मण में हुई पंचायत में मनीषा के पिता ने 29 जून से आमरण अनशन करने का फैसला लिया।