मनोहर लाल खट्टर: हरियाणा का 'सुशासन मॉडल' बना राष्ट्रीय पहचान
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर भले ही राष्ट्रीय राजनीति में हों, पर हरियाणा की जनहितकारी नीतियां आज भी चर्चा में हैं। जानें खट्टर के सुशासन के मुख्य प्रयोग।
चंडीगढ़ : बेशक मनोहर लाल खट्टर अब एक प्रदेश की बजाए समूचे देश के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन 2047 के संकल्प को साकार रूप देने में जुटे हुए हैं मगर उनके जहन में आज भी हरियाणा बसता है। यूं तो इस बात के उदाहरण कई मर्तबा सार्वजनिक रूप से विभिन्न मंचों पर देखने को मिले हैं मगर इसमें भी कोई दोराय नहीं है कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हरियाणा के मुख्यमंत्री रहते हुए ऐसी योजनाओं को धरातल पर लागू किया जिसके बूते इस हरित प्रदेश ने देशभर में कई मिसालें भी कायम की हैं। खट्टर अपने संबोधनों के दौरान भले ही देश भर में लागू होने वाली नीतियों का जिक्र करते हैं लेकिन उनकी जुबान पर हरियाणा आ ही जाता है और ऐसे में वे भूल सुधार करते हुए अपने हास्य अंदाज में इसकी स्वीकारोक्ति दे ही देते हैं कि क्या करें हरियाणा दिल-दिमाग से जाता ही नहीं।
कारण भी साफ है कि मनोहर लाल खट्टर ने हरियाणा की राजनीति में ऐसे प्रयोगों को अंजाम दिया जो आज भी बड़े उदाहरण के तौर पर विख्यात हैं। यही नहीं कई नीतियां तो ऐसी भी थीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इन नीतियों को अमलीजामा पहनाने के लिए उन्हें पूरे देश भर में लागू कर दिया और यही कारण है कि खट्टर द्वारा लागू की गई प्रायोगिक नीतियों ने ही उनकी एक विशेष पहचान बनाई। चूंकि इन नीतियों ने विकास के नए रंग भरे तो वहीं हर आम आदमी के लिए भी हितकारी साबित हुई हैं। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के परिपेक्ष्य में एक बात ये भी कही जा सकती है कि उन्होंने बतौर मुख्यमंत्री रहते हरियाणा में व्यवस्था परिवर्तन करने के साथ साथ सियासत को भी सुशासन की डोर से बांध दिया जिसके फलस्वरूप न केवल उन्होंने प्रशासकिय व्यवस्था को जवाबदेह बना दिया अपितु अपनी कार्यशैली से उन लोगों को भी करारा जवाब दे दिया जो उन पर अनुभवहीनता के व्यंग्य बाण चलाते थे।
हरियाणा में इसलिए मनोहारी बनते नजर आए खट्टर
गौरतलब है कि साल 2014 का ये वही दौर था जब हरियाणा में भाजपा ने न केवल अपने बूते पहली बार विधानसभा चुनावों में 47 सीटें जीत कर सरकार बनाई बल्कि हरियाणा में पहली ही बार बतौर मुख्यमंत्री बने मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में इसी प्रदेश में राजनीति के एक नए अध्याय लिखने की कवायद शुरू हुई। चूंकि शुरूआती दौर में खट्टर इसी बात को लेकर केंद्र बिंदु में बने रहे कि उन्हें किसी प्रकार का अनुभव नहीं है मगर जैसे जैसे खट्टर ने अपनी प्रायोगिक नीतियों को अंजाम देना शुरू किया तो कमोबेश हरियाणा भी नई अंगड़ाई लेने लगा, क्योंकि खट्टर ने अपना फोकस बजाए विपक्षी या उनके अपने क्या कहते हैं? पर रखने की बजाए केवलमात्र जनहितकारी नीतियों और विकासपरक योजनाओं को रफ्तार देने पर ही रखा।
यही वजह रही कि खट्टर हर वर्ग के लिए ‘मनोहारी’ के रूप में पहचान बनाते हुए नजर आए। केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर भले ही अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन 2047 को साकार करने की दिशा में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हों लेकिन उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली में हरियाणा आज भी स्पष्ट रूप से झलकता है। विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों में कई बार ऐसा देखने को मिला है कि देशव्यापी योजनाओं का उल्लेख करते हुए भी उनकी जुबान पर अनायास हरियाणा का नाम आ जाता है। इसके बाद वे अपने सहज और हास्यपूर्ण अंदाज में यह स्वीकार भी कर लेते हैं कि ‘क्या करें, हरियाणा इस कदर दिल-दिमाग में बसा हुआ है कि जुबां पर अपने आप ही आ जाता है’। यह केवल भावनात्मक जुड़ाव नहीं बल्कि उस प्रदेश के साथ उनके लंबे प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव का प्रतिबिंब भी है जहां उन्होंने कई ऐसे प्रयोग किए जिन्होंने शासन व्यवस्था की नई मिसाल कायम की और बतौर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने साढ़े 9 वर्षांे तक हरियाणा एक-हरियाणवीं एक का नारा देते हुए पूरे प्रदेश को अपना परिवार समझा।
इन नीतियों ने हरियाणा और खट्टर को दी नई पहचान
मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मनोहर लाल खट्टर ने हरियाणा में प्रशासनिक पारदर्शिता, तकनीक आधारित सुशासन और जनहितकारी योजनाओं को प्राथमिकता दी। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने पारंपरिक राजनीतिक सोच से आगे बढक़र व्यवस्था में ऐसे बदलाव किए जिनका सीधा लाभ आम नागरिक तक पहुंचा। यही कारण रहा कि हरियाणा ने कई क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई। सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों ने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम की। विभिन्न विभागों की सेवाओं को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की पहल ने लोगों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने से राहत दिलाई। बिना पर्ची-बिना खर्ची वाली पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, ऑनलाइन ट्रांसफर नीति और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था ने सरकारी तंत्र में जवाबदेही बढ़ाने का काम किया। इन प्रयासों की चर्चा केवल हरियाणा तक सीमित नहीं रही बल्कि अन्य राज्यों ने भी हरियाणा मॉडल की इन नीतियों का अध्ययन किया। खट्टर सरकार के दौरान परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) जैसी पहल ने सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन में नई दिशा दी।
इस व्यवस्था के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक अधिक व्यवस्थित ढंग से पहुंचाने का प्रयास किया गया। परिवार आधारित डाटा प्रणाली ने शासन को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद के वर्षों में लाभार्थी आधारित योजनाओं के बेहतर संचालन को लेकर देशभर में भी इसी तरह की डेटा-आधारित व्यवस्थाओं पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में वर्ष 2014 से 2024 के दौरान प्रदेश में प्रशासनिक सुधार, डिजिटल गवर्नेंस और जनकल्याण से जुड़ी कई ऐसी पहलें शुरू की गईं, जिन्होंने न केवल हरियाणा की कार्यप्रणाली में बदलाव लाया बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बनाई। इनमें से कई योजनाओं और मॉडलों का अध्ययन अन्य राज्यों ने किया, जबकि कुछ पहलों को केंद्र सरकार की नीतियों में भी स्थान मिला। इनमें सबसे महत्वपूर्ण योजना परिवार पहचान पत्र (पी.पी.पी.) रही। इसी प्रकार लाल डोरा मुक्त योजना भी मनोहर लाल सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल रही। इस योजना के माध्यम से गांवों की आबादी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को उनकी संपत्तियों का मालिकाना अधिकार प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू हुई। बाद में केंद्र सरकार ने इसी अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए देशभर में स्वामित्व योजना के नाम से लागू किया, जिसे ग्रामीण संपत्ति अधिकारों के क्षेत्र में बड़ा सुधार माना गया। कृषि क्षेत्र में मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल शुरू कर किसानों का डिजिटल पंजीकरण किया गया।
इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी) पर खरीद, फसल मुआवजा, बीमा और अन्य सरकारी सुविधाओं को अधिक व्यवस्थित बनाया गया। इस मॉडल ने कृषि प्रशासन में डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग का उदाहरण प्रस्तुत किया। डिजिटल प्रशासन को मजबूत करने के लिए सरल पोर्टल, सी.एम. विंडो, ई-टैंडरिंग, ई-ऑफिस, ऑनलाइन ट्रांसफर नीति तथा पारदर्शी भर्ती प्रणाली जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं। इन सुधारों का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन, समयबद्ध और भ्रष्टाचारमुक्त बनाना था। कई विभागों में इंटरव्यू समाप्त कर मैरिट आधारित चयन प्रक्रिया को बढ़ावा दिया गया, जबकि शिकायत निवारण के लिए सी.एम.विंडो को प्रभावी मंच बनाया गया। इसके अलावा अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की आय बढ़ाने के लिए रोजगार, स्वरोजगार, कौशल प्रशिक्षण और ऋण सुविधाओं को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया। पर्यवेक्षकों का मानना है कि परिवार पहचान पत्र, डिजिटल गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार और ग्रामीण संपत्ति अधिकारों से जुड़े सुधारों ने हरियाणा को सुशासन और तकनीक आधारित प्रशासन के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित किया। यही कारण है कि मनोहर लाल सरकार की कई योजनाएं आज भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं और प्रधानमंत्री मोदी सहित भाजपा के बड़े नेता अपने संबोधनों में अक्सर हरियाणा की नीतियों का जिक्र करते हैं।
सख्ताई ने भी संकल्प को करवाया पूरा
खास बात ये भी है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा सुशासन के साथ-साथ आधारभूत ढांचे के विकास पर भी उनके कार्यकाल में विशेष ध्यान दिया गया। सडक़ों, बिजली, पेयजल, शहरी विकास और ग्रामीण सुविधाओं के विस्तार के लिए अनेक परियोजनाओं को गति मिली। नगर निकायों और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को तकनीक से जोडऩे का प्रयास किया गया, जिससे योजनाओं की निगरानी और गुणवत्ता दोनों में सुधार देखने को मिला। महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण पहलें की गईं। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को एक संकल्प के रूप में हरियाणा में जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास हुए। लिंगानुपात में सुधार की दिशा में प्रशासनिक सख्ती और सामाजिक जागरूकता अभियान समानांतर रूप से चलाए गए। हरियाणा जो कभी गिरते लिंगानुपात को लेकर चर्चा में रहता था उसने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार दर्ज कर राष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया। खेती और किसानों के हितों को लेकर भी कई योजनाओं को लागू किया गया। फसल खरीद व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने तथा कृषि क्षेत्र में तकनीक के उपयोग पर विशेष बल दिया गया। किसानों तक योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने की व्यवस्था ने बिचौलियों की भूमिका को सीमित करने में मदद की।
इसी प्रकार प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास भी व्यापक स्तर पर दिखाई दिए। रोजगार और कौशल विकास के क्षेत्र में भी खट्टर सरकार ने कई नई पहलें की। युवाओं को स्वरोजगार और कौशल प्रशिक्षण से जोडऩे के लिए विभिन्न कार्यक्रम शुरू किए गए। मैरिट आधारित भर्ती प्रणाली को लागू करने का दावा सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। इससे सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता को लेकर नई बहस शुरू हुई और व्यवस्था में विश्वास बढ़ाने का प्रयास हुआ। यही वे प्रयोग थे, जिनकी चर्चा राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची। कई नीतियों और प्रशासनिक मॉडलों को केंद्र सरकार की व्यापक योजनाओं के अनुरूप भी देखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सुशासन, डिजिटल इंडिया, पारदर्शिता और लाभार्थी केंद्रित योजनाओं पर दिए जा रहे जोर के बीच हरियाणा में लागू कई व्यवस्थाओं को एक सफल प्रयोग के रूप में प्रस्तुत किया गया। इससे मनोहर लाल खट्टर की प्रशासनिक पहचान केवल एक मुख्यमंत्री तक सीमित नहीं रही बल्कि एक ऐसे प्रशासक के रूप में उभरी जिसने राज्य स्तर पर किए गए प्रयोगों को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाया। आज केंद्रीय मंत्री के रूप में उनकी भूमिका कहीं अधिक व्यापक है। ऊर्जा, शहरी विकास और आवासन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालते हुए वे देशभर में विकास परियोजनाओं को गति देने में जुटे हैं।
हर गली व गांव से हैं वाकिफ, इसलिए जहन से नहीं जाता हरियाणा
अहम बात ये है कि मनोहर लाल खट्टर द्वारा हरियाणा की धरती पर शुरू हुए अनेक प्रयोग अब राष्ट्रीय सोच का हिस्सा बन चुके हैं। यही वजह है कि केंद्रीय राजनीति में सक्रिय होने के बावजूद मनोहर लाल खट्टर का नाम हरियाणा के विकास मॉडल के साथ स्वाभाविक रूप से जुड़ा रहता है। उनके लिए हरियाणा केवल एक राज्य नहीं बल्कि वह प्रयोगशाला है जहां विकसित प्रशासन, पारदर्शी व्यवस्था और जनकल्याणकारी नीतियों की नींव रखी गई। अब वही अनुभव और कार्यशैली देशव्यापी स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन 2047 को नई गति देने की दिशा में उपयोगी साबित हो रही है।
मंच चाहे गुजरात के वडोदरा में सजा हो अथवा दिल्ली में हुए किसी कानक्लेव का, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर अपने धारा प्रवाह संबोधन में हरियाणा का जिक्र कर ही बैठते हैं क्योंकि खट्टर खुद इस बात को बताते हैं कि मुख्यमंत्री तो भले ही उन्हें विधायकों ने बनाया मगर हरियाणा में वे 35 साल पहले से ही जुड़े रहे हैं। जब संगठन का दायित्व संभाल रहे थे तो उस वक्त हरियाणा की कोई ऐसी गली या गांव नहीं जहां वे न गए हों। उनका ये अनुभव उस वक्त और कारगर सिद्ध हुआ जब पार्टी हाईकमान ने विधायकों की राय पर मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी। तब सभी यही कहते थे कि अनुभवहीन है तो सरकार गिरने ही वाली है लेकिन वे हरियाणा और हरियाणावासियों के साथ एक पारिवारिक सदस्य के तौर पर जुड़े हुए थे तो उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी रखते थे। यही कारण रहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद इन्हीं समस्याओं पर फोकस रखा और उनके लिए काम करते चले गए। हरियाणा में हर जन हर वर्ग से सीधा जुड़ाव इस कदर हुआ कि सब कुछ दिल और दिमाग में है तो ऐसे में क्या करें कि हरियाणा जहन से जाता ही नहीं।