Nalhar Medical College Case: 4 साल के बच्चे के गलत ऑपरेशन पर घमासान, मंत्री ने दिए जांच के आदेश
नूंह: जिले के राजकीय शहीद हसन खान मेवाती मेडिकल कॉलेज नल्हड़ में संक्रमित पैर की बजाय स्वस्थ पैर का ऑपरेशन किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. मामले में सियासत तेज हो रही है. दरअसल, सोमवार को जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में यह मामला उठाया गया. हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया, जबकि नूंह से कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता बताते हुए सरकार और मेडिकल कॉलेज प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया.
"शिकायत मिलेगी तो जांच कराएंगे": जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक के दौरान कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि, "यह मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं है. यदि इस संबंध में कोई शिकायत या तथ्य हमारे सामने आते हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी और जो भी आवश्यक कार्रवाई होगी, वह की जाएगी. सरकार किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लेती है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे."
स्वास्थ्य सुविधाओं पर मंत्री का दावा: बैठक में मंत्री विपुल गोयल ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कहा कि, "नूंह में स्वास्थ्य सुविधाओं की कोई कमी नहीं है. पीएचसी, सीएचसी और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में बड़ी संख्या में मरीजों का प्रतिदिन उपचार किया जा रहा है. यदि कहीं मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण अतिरिक्त संसाधनों या सुविधाओं की जरूरत है तो मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया जाएगा और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी."
"यह पूरे सिस्टम की विफलता": वहीं, बैठक में मौजूद कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने मेडिकल कॉलेज में हुई घटना को गंभीर लापरवाही बताया. उन्होंने कहा कि, "एक बच्चे का गलत ऑपरेशन होना केवल किसी एक चिकित्सक की गलती नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम और मेडिकल कॉलेज प्रशासन की विफलता को दर्शाता है. जिस मेडिकल कॉलेज को क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना गया था, वहां स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है."
"पहले भी सामने आती रही हैं लापरवाहियां": आफताब अहमद ने आगे कहा कि, "मेडिकल कॉलेज में पहले भी कई तरह की लापरवाहियां और अव्यवस्थाएं सामने आती रही हैं. मरीजों को रेफर किए जाने, दवाइयों की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतें लगातार मिल रही हैं. कांग्रेस ने इन समस्याओं को लेकर धरना-प्रदर्शन किए और विधानसभा में भी मुद्दा उठाया, लेकिन सरकार ने अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई."
"दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई": विधायक ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि, "बच्चे के गलत ऑपरेशन के लिए जिम्मेदार चिकित्सकों और संबंधित मेडिकल स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए, क्योंकि यह मामला बच्चे के भविष्य और पूरी जिंदगी से जुड़ा है. ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग में जवाबदेही तय करने वाले कठोर कदम उठाए जाने चाहिए. हजारों करोड़ रुपये की लागत से बने मेडिकल कॉलेज का रखरखाव और प्रबंधन संतोषजनक नहीं है. सरकार को मामले की गंभीरता समझते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार करना चाहिए. केवल जांच के आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई भी होनी चाहिए."
ऑपरेशन के बाद परिवार वाले रह गए सन्न: इस पूरे मामले में बच्चे के पिता आरिफ ने डॉक्टरों की लापरवाही की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि, "मेरे चार साल के बेटे के बाएं पैर में एक बड़ा फोड़ा हो गया था. वह काफी तकलीफ में था. 20 जुलाई को उसे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज ले गए. डॉक्टरों ने जांच के बाद ऑपरेशन की सलाह दी. लेकिन जब ऑपरेशन थियेटर में बच्चे की सर्जरी पूरी हुई और उसे बाहर लाया गया, तो हमारा परिवार यह देखकर सन्न रह गया कि डॉक्टरों ने बाएं पैर के बजाय उसके स्वस्थ दाहिने पैर की सर्जरी कर दी थी."
बता दें कि फिलहाल कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने मामले की जांच कराने का भरोसा दिया है, जबकि विपक्ष इसे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर चूक बताते हुए जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है.