Panchkula News ED Action: 160 करोड़ की एफडी में फर्जीवाड़ा! जाली हस्ताक्षर और स्टैंप से ट्रांसफर किए पैसे, 9 के खिलाफ चार्जशीट
पंचकूला नगर निगम के 100 करोड़ से अधिक के एफडी घोटाले में ईडी ने चार्जशीट दाखिल की है। पूर्व बैंक अधिकारी ने गबन के पैसों से लग्जरी गाड़ियां खरीदी थीं।
पंचकूला : प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कहा कि कोटक महिंद्रा बैंक के एक पूर्व डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट ने हरियाणा में पंचकूला नगर निगम के खातों से कथित तौर पर निकाले गए पैसों से पोर्श, बीएमडब्ल्यू और हार्ले-डेविडसन जैसे लग्जरी वाहन खरीदे।
संघीय एजेंसी ने बैंक के पूर्व कार्यकारी पुष्पेंद्र सिंह और आठ अन्य लोगों के खिलाफ धनशोधन निवारण अधनियम (PMLA) अदालत में 30 जुलाई को दाखिल आरोपपत्र में यह दावा किया। पूर्व कार्यकारी पुष्पेंद्र सिंह, कोटक महिंद्रा बैंक के दो अन्य कर्मचारियों और पंचकूला हरियाणा नगर निगम के एक कर्मचारी पर आरोप है कि उन्होंने नगर निकाय की एफडी को दूसरी जगह लगाकर हरियाणा सरकार के साथ 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी की।
ईडी ने कहा कि इन चारों ने कथित तौर पर राज्य सरकार के विभाग की रकम का गबन करने के लिए धोखाधड़ी की। ईडी ने पांच अगस्त को जारी एक बयान में कहा कि जांच के दौरान उसे पता चला कि पुष्पेंद्र सिंह ने महंगी गाड़ियां खरीदी थीं, जिनमें पोर्शे कायेन, बीएमडब्ल्यू जेड4, बीएमडब्ल्यू 740एलआई, बीएमडब्ल्यू एक्स7, बीएमडब्ल्यू 749आई, जीप रैंगलर (2021 और 2024 मॉडल), लैंड क्रूजर और हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकिल शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि कथित धोखाधड़ी का पता चलने के बाद गाड़ियों को बाद में तीसरे पक्ष को बेच दिया गया था।
बता दें कि नगर निगम ने अलग-अलग समय में करीब 160 करोड़ रुपए एफ.डी. के रूप में बैंक में जमा करवाए थे। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने मिलीभगत से जाली खाते खोलकर यह रकम उनमें ट्रांसफर कर दी। आर.टी.जी.एस. के जरिए किए गए ट्रांजैक्शन में भी फर्जी हस्ताक्षर और स्टैंप इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
बैंक कर्मचारियों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए लंबे समय तक गबन को छुपाए रखा
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब निगम ने 58 करोड़ रुपए की एक एफ.डी. की मैच्योरिटी राशि अपने खाते में ट्रांसफर करने को कहा। बैंक द्वारा दिए गए स्टेटमैंट में राशि ट्रांसफर दिखाई गई, लेकिन वास्तविक खाते में पैसा नहीं पहुंचा। जांच में पता चला कि स्टेटमैंट भी फर्जी थी और रकम गायब है। इसके बाद जब नगर निगम ने अन्य एफ.डी. को भी मैच्योर कर खाते में ट्रांसफर करने को कहा तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि बैंक द्वारा दी गई सभी एफ. डी. जाली थीं और खाते में कोई राशि मौजूद नहीं थी। आरोप है कि बैंक कर्मचारियों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए लंबे समय तक इस गबन को छुपाए रखा।