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पंचकूला: 30 जुलाई से शुरू सावन, जानें सोमवार व्रत और शिवरात्रि की डेट

पंचकूला में 30 जुलाई से सावन माह की शुरुआत हो रही है। इस बार सावन में 4 सोमवार पड़ेंगे और 11 अगस्त को शिवरात्रि है। जानिए पूजा के नियम और खास महत्व।

 

पंचकूला: भगवान शिव का प्रिय सावन माह 30 जुलाई से शुरू हो रहा है. ये पूरा माह भगवान शिव को समर्पित होता है. इस पूरे माह शिव भक्त रोजाना सुबह जल्दी स्नान करके शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और पंचामृत अर्पित करते है. वहीं, भगवान भोलेनाथ का खास दिन सोमवार यानी कि सावन का सोमवार काफी महत्वपूर्ण होता है. इस दिन शिवभक्त व्रत रखते हैं. भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा अर्चना करते हैं.

इस बार सावन महीने में पड़ेंगे चार सोमवार: हरियाणा के पंचकूला जिले के सकतेड़ी स्थित शिव मंदिर के पुजारी वेद प्रकाश से बातचीत हुई . उन्होंने बताया कि, "इस बार सावन माह बेहद खास है. इस बाद सावन में चार सोमवार पड़ेंगे.

शिवजी के रुद्राभिषेक और शिवपुराण का पाठ बेहद लाभकारी: पुजारी वेद प्रकाश ने बताया कि, "सनातन धर्म के अनुसार सावन महीने में जो कोई व्यक्ति भगवान शिव की पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, रूद्राभिषेक और शिवपुराण का पाठ करता है, उनके जीवन में सुख-शांति, समृद्धि, धन-धान्य और यश प्राप्ति का योग बनता है. सोमवार को तांबे के लौटे में ही अक्षत, पुष्प व दूध आदि मिलाकर भगवान शिव को अर्पित करें. तांबे के पात्र में कभी दूध न चढ़ाएं, इसमें केवल जल अर्पित करना उचित रहता है."

11 अगस्त शिवरात्रि का खास महत्व: पुजारी वेद प्रकाश ने बताया कि, "सावन महीने में शिवरात्रि 11 अगस्त को है, जोकि अत्यंत महत्वपूर्ण है. शवरात्रि पर भगवान शिव को जलाभिषेक जरूर करना चाहिए. शिव रात्रि पर शुभ मुहुर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 12 बजे तक है. इस दौरान शिवलिंग पर जलाभिषेक करना अत्यंत फलदायी रहता है. इस दिन भगवान शिव को प्रिय बेलपत्र समेत पुष्प, दूध, तिल और पंचामृत जरूर अर्पित करना चाहिए. इस दिन सभी प्रकार की सांसारिक चेतना को अलग रखते हुए अंतर्मन में भगवान का ध्यान रखने से अपार कृपा का लाभ मिलता है."

कुण्डली से वास्तुदोष दूर करें और मंत्र जाप जरूरी: पुजारी वेद प्रकाश ने बताया कि, "वास्तु के अनुसार पूजा के समय दूध में जल, जौं और तिल डालकर भगवान को अर्पित करने चाहिएं. इससे कुण्डली का वास्तुदोष दूर होता है. साथ ही भगवान शिव को जल चढ़ाते समय ऊँ नम: शिवाय या ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्. उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ का जाप करते रहना चाहिए. इस मंत्र के जाप के साथ जल अर्पित करना अत्यंत पुण्यदायी रहता है और जीवन की सभी बाधाओं से छुटकारा मिलता है. साथ ही भोलेनाथ की विशेष कृपा का पात्र बनने के लिए पूजा-अर्चना विधि-विधान के साथ करना जरूरी है."

व्रत का महत्व: पुजारी वेद प्रकाश ने आगे बताया, " सावन में जो व्यक्ति व्रत रख सकता है, उन्हें सोमवार के दिन और शिवरात्रि पर उपवास जरूर रखना चाहिए. लेकिन जो कोई व्यक्ति उपवास रखने में किसी प्रकार की परेशानी महसूस करते हैं या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हैं तो यदि संभव हो सके तो वे फलाहार खाकर व्रत रख सकते हैं.सावन महीने में भगवान शिव को फल और विशेष रूप से बेलपत्र चढ़ाना और पंचामृत चढ़ाते हुए पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है. कहते हैं कि इस दिन व्रत रखने से कुंवारी लड़की को मनचाहा वर मिलता है. इंसान की सभी समस्याएं खत्म होती है."