{"vars":{"id": "123258:4912"}}

Haryana Health Department Update: पानीपत के सरकारी अस्पतालों में 14 नए मेडिकल ऑफिसर ने किया ज्वाइन, अभी भी 56 पद खाली

पानीपत के सरकारी अस्पतालों में 14 नए मेडिकल ऑफिसर ने ज्वाइन किया। हालांकि फिजिशियन और रेडियोलॉजिस्ट की कमी अभी भी बनी हुई है।
 

पानीपत: जिले के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए नए मेडिकल ऑफिसरों की नियुक्ति की गई है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों का संकट अभी भी बना हुआ है. पानीपत सिविल अस्पताल में मेडिसिन यानी फिजिशियन का नियमित विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है. वहीं रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण आधुनिक जांच सुविधाओं का पूरा लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है. अस्पताल में रोजाना 1500 से 2000 मरीजों की ओपीडी रहती है और कई बार यह संख्या इससे भी अधिक पहुंच जाती है.

23 मेडिकल ऑफिसरों की सूची, 14 ने किया ज्वाइन: इस बारे में सीएमओ डॉ. विजय मलिक ने बताया कि, "प्रदेश मुख्यालय से जिले के लिए 23 नए मेडिकल ऑफिसरों की नियुक्ति की गई है. इनमें से अब तक 14 डॉक्टर ज्वाइन कर चुके हैं. ज्वाइन करने वाले डॉक्टरों में दो सिविल अस्पताल, छह समालखा, दो बापोली सीएचसी, एक कुटपुरा और चार अन्य सीएचसी में नियुक्त किए गए हैं. इससे सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या करीब 45 से बढ़कर लगभग 53 हो गई है."

फिजिशियन की कमी: सीएमओ डॉ. विजय मलिक ने कहा कि, "सिविल अस्पताल में मेडिसिन विशेषज्ञ की कमी के चलते फैमिली मेडिसिन और इमरजेंसी मेडिसिन के डॉक्टरों के माध्यम से मरीजों को सेवाएं दी जा रही हैं. फैमिली मेडिसिन और इमरजेंसी मेडिसिन के डॉक्टरों के माध्यम से व्यवस्था सुचारू रखने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञ मेडिसिन चिकित्सक की आवश्यकता बनी हुई है."

मशीनें उपलब्ध, रेडियोलॉजिस्ट की कमी बनी चुनौती: सिविल अस्पताल में जांच के लिए आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण विशेषज्ञ जांच की सुविधा प्रभावित हो रही है. सीएमओ के अनुसार प्रदेश मुख्यालय की ओर से जल्द जिले में एक नए रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति का आश्वासन दिया गया है. नियुक्ति होने से मरीजों को जांच के लिए बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है.

189 स्वीकृत पद, 56 अभी भी खाली: सीएमओ के मुताबिक जिले के विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के कुल 189 पद स्वीकृत हैं. नई नियुक्तियों से पहले करीब 117 डॉक्टर तैनात थे. नए डॉक्टरों के ज्वाइन करने के बाद संख्या करीब 138 पहुंच गई है. इसके बावजूद लगभग 56 पद अब भी रिक्त हैं. इनमें विशेषज्ञ डॉक्टरों के पदों को भरना स्वास्थ्य विभाग के लिए अहम चुनौती है.

सालाना 16 हजार डिलीवरी, अस्पताल पर भारी दबाव: इसके साथ ही सिविल अस्पताल में मरीजों का दबाव लगातार बना हुआ है. रोजाना 1500 से 2000 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं. अस्पताल में सालाना करीब 16 हजार डिलीवरी होती हैं, जो जिले में होने वाली कुल डिलीवरी का 50 प्रतिशत से अधिक है. ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी के कारण भी बड़ी संख्या में मरीज जिला अस्पताल पहुंचते हैं.

विशेषज्ञों की नियुक्ति जरूरी: नए मेडिकल ऑफिसरों की नियुक्ति से सामान्य चिकित्सा सेवाओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन फिजिशियन और रेडियोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञों की कमी अभी भी चुनौती है. मरीजों की संख्या को देखते हुए विशेषज्ञ पदों को भरना जरूरी है, ताकि उपचार और जांच की सुविधाएं समय पर उपलब्ध हो सकें.