Panipat News: पैर के फ्रैक्चर के इलाज में दिल में डाला स्टेंट, महिला की मौत पर निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप
पानीपत के एक निजी अस्पताल में पैर के फ्रैक्चर का इलाज कराने आई महिला की मौत हो गई। परिजनों ने बिना सहमति दिल में स्टेंट डालने और आयुष्मान कार्ड के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
पानीपत: पानीपत के एक निजी अस्पताल में फ्रैक्चर के इलाज कराने आई महिला की मौत के बाद इलाज में लापरवाही का आरोप लगा है. दरअसल, मृतका के परिजनों का आरोप है कि महिला की सड़क हादसे में पैर में फ्रैक्चर हो गया था. इसके बाद अस्पताल में उसे भर्ती कराया गया. हालांकि डॉक्टरों ने पैर का ऑपरेशन करने के बजाय बिना अनुमति उसके दिल में स्टेंट डाल दिया. परिजनों का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया आयुष्मान भारत योजना के तहत भुगतान लेने के उद्देश्य से की गई है. शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
परिजनों का आरोप: मृतका के बेटे कुलदीप सिंह ने बताया कि, "मेरी मां का गाजियाबाद में सड़क हादसा हुआ था, जिसमें उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया था. एक परिचित के जरिए पानीपत के निजी अस्पताल के डॉक्टर से संपर्क हुआ, जिन्होंने बेहतर इलाज का भरोसा देकर अस्पताल बुलाया. हम मां के पैर का इलाज कराने आए थे, लेकिन बिना हमारी अनुमति उनके दिल में स्टेंट डाल दिया गया. गाजियाबाद की रिपोर्ट में उन्हें कोई हार्ट की बीमारी नहीं थी."
आयुष्मान कार्ड के दुरुपयोग का आरोप: वहीं, मृतका की एक अन्य परिजन दुर्गा ने कहा कि, "अस्पताल ने पहले ऑपरेशन नहीं होने पर ₹3,000 रुपया लेने की बात कही थी, लेकिन बाद में पैर का ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया. जब उन्होंने आयुष्मान कार्ड से इलाज की बात की तो अस्पताल ने कथित तौर पर महिला को हृदय रोगी दिखाकर योजना के तहत केस तैयार कर लिया. इसके लिए फर्जी हस्ताक्षर लिए गए और हमारी सहमति के बिना हार्ट में स्टेंट डाल दिया गया."
"मौत के बाद समझौते का दबाव बनाया": मृतका के बेटे कुलदीप सिंह का आरोप है कि हार्ट प्रोसीजर के बाद अस्पताल ने उन्हें महिला की मौत की सूचना दी. इसके बाद अस्पताल के कुछ लोगों ने समझौते का दबाव बनाया. कुलदीप ने कहा कि "मां की मौत के बाद हम पर सेटलमेंट करने का दबाव बनाया गया, लेकिन हमने समझौता करने से इनकार कर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई."
महिला पूरी तरह सामान्य थी: मृतका की रिश्तेदार दुर्गा देवी ने कहा कि, "अस्पताल में भर्ती होने के बाद महिला फोन पर सामान्य रूप से बात कर रही थी और केवल पैर की चोट का जिक्र कर रही थी. उन्हें कभी दिल की बीमारी नहीं थी. अगर इलाज में लापरवाही नहीं होती तो शायद आज वह हमारे बीच होतीं."
अस्पताल ने रखा अपना पक्ष: वहीं, अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अजीत श्रीवास्तव ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि, "जांच के दौरान मरीज के हृदय में गंभीर समस्या सामने आई थी और ऐसी स्थिति में पैर का ऑपरेशन करना सुरक्षित नहीं था. मरीज और परिजनों को पूरी स्थिति समझाई गई थी. उनकी सहमति के बाद आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रक्रिया शुरू हुई और पोर्टल से मंजूरी मिलने के बाद ही कैथ लैब में स्टेंट डाला गया."
सीईओ का दावा-"दस्तावेज और CCTV मौजूद": वहीं, अस्पताल की सीईओ सपना भंबरी ने भी परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि, "आयुष्मान योजना के तहत बिना आवश्यक दस्तावेज और रजिस्ट्रेशन के कोई फाइल तैयार नहीं हो सकती. हमारे पास सीसीटीवी फुटेज और सभी दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें परिजन स्वयं रजिस्ट्रेशन और हस्ताक्षर करते दिखाई देते हैं.परिजनों ने आर्थिक सहायता और सेटलमेंट की मांग की थी, जिसे अस्पताल ने स्वीकार नहीं किया. मरीज या परिजनों से कोई अतिरिक्त राशि नहीं ली गई."
पुलिस कर रही जांच: पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. जांच के दौरान मेडिकल रिकॉर्ड, आयुष्मान भारत योजना से जुड़े दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच की जाएगी. पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.