Panipat School Row: 12वीं के छात्रों को बाहर बिठाने और फंड वसूली पर घिरीं प्रिंसिपल, जस्टिस ललित बत्रा ने DC-DEO से जवाब तलब किया
चंडीगढ़ : हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने जिला पानीपत के ब्लॉक बापौली स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सनौली खुर्द के कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों द्वारा स्कूल प्रशासन के विरुद्ध लगाए गए गंभीर आरोपों का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Reports) तलब की है। यह आदेश शिकायत संख्या 1484/7/15/2026 में हरियाणा मानव अधिकार आयोग के माननीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा द्वारा पारित किया गया।
उक्त विद्यालय के कई विद्यार्थियों द्वारा शिकायत प्रस्तुत की गई है, जिस पर उनके हस्ताक्षर/अंगूठे के निशान अंकित हैं। शिकायत के साथ विद्यालय परिसर की स्थिति को दर्शाने वाली तस्वीरें भी संलग्न की गई हैं। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया है कि विद्यालय की प्रधानाचार्य द्वारा उनके साथ कथित रूप से अभद्र, अपमानजनक व्यवहार किया गया तथा आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें अपमानजनक नामों से पुकारा गया। विद्यार्थियों ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें स्कूल के रोल से नाम काट दिए जाने की धमकी दी गई तथा कक्षा से बाहर रहने के लिए मजबूर किया गया। शिकायत के अनुसार, कक्षा 12वीं-बी के लिए आवंटित कक्षा पिछले दो से तीन महीनों से बंद है, जिसके कारण विद्यार्थियों को अपनी कक्षा के बाहर बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
विद्यालय की बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। विद्यार्थियों के अनुसार, कक्षा में बिजली उपलब्ध नहीं है तथा छत से खुले विद्युत तार लटक रहे हैं। पर्याप्त डेस्क और बेंच भी उपलब्ध नहीं हैं। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया है कि भीषण गर्मी के बावजूद पंखे चलाने की अनुमति नहीं दी जाती। इसके अतिरिक्त, विद्यालय में पर्याप्त एवं कार्यशील शौचालय सुविधाओं का भी अभाव बताया गया है। आरोप है कि इसके कारण विशेष रूप से छात्राओं को खुले में शौच करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे उनकी गरिमा, स्वास्थ्य और निजता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।
शिकायतकर्ताओं ने प्रधानाचार्य की विद्यालय समय के दौरान कथित अनियमित उपस्थिति तथा विद्यालय की दीवारों की मरम्मत के नाम पर विद्यार्थियों से धन एकत्र किए जाने के संबंध में भी आरोप लगाए हैं। विद्यार्थियों ने आयोग के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा है कि उन्होंने ये आरोप अपनी स्वेच्छा से, बिना किसी भय, दबाव या जबरदस्ती के लगाए हैं।आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने आदेश में कहा कि शिकायत के साथ संलग्न तस्वीरों से प्रथमदृष्टया विद्यालय के बुनियादी ढांचे में कमियों तथा असुरक्षित विद्युत व्यवस्था के संकेत मिलते हैं। इसलिए आयोग ने आरोपों के स्वतंत्र एवं निष्पक्ष सत्यापन को आवश्यक माना है।
आयोग ने कहा कि यदि लगाए गए आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह बच्चों के गरिमापूर्ण जीवन, शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा अमानवीय एवं अपमानजनक व्यवहार से संरक्षण के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन होगा। आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि विद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने का स्थान नहीं है, बल्कि उसे बच्चों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक, समावेशी और बाल-अनुकूल वातावरण भी उपलब्ध कराना आवश्यक है, जहां प्रत्येक विद्यार्थी के साथ गरिमापूर्ण, सम्मानजनक और समान व्यवहार सुनिश्चित हो।
आयोग ने निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यालयों में निर्धारित न्यूनतम आधारभूत सुविधाओं का उपलब्ध होना आवश्यक है। शिक्षा को संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन एवं मानव गरिमा के अधिकार का अभिन्न हिस्सा भी माना गया है। न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का उल्लेख करते हुए मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा, 1948 के अनुच्छेद 26 तथा संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अभिसमय (UNCRC) के अनुच्छेद 19, 28 एवं 29 का भी संदर्भ देते हुए आदेश में लिखा है कि बच्चों को हिंसा, दुर्व्यवहार, उपेक्षा एवं अपमानजनक व्यवहार से सुरक्षा तथा गरिमापूर्ण परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है।
वरिष्ठ अधिकारियों से मांगी गई रिपोर्ट:
आरोपों की गंभीरता तथा शिकायत के साथ संलग्न फोटोग्राफ को देखते हुए, जस्टिस ललित बत्रा ने निम्नलिखित बिंदुओं पर संबंधित अधिकारियों से व्यापक कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Reports) मांगी है:-
A. निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, हरियाणा, पंचकूला
मामले की जांच हरियाणा शिक्षा निदेशालय के किसी वरिष्ठ अधिकारी से करवाते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर रिपोर्ट प्रस्तुत करवाएं :-
क्या आरोप निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 तथा हरियाणा स्कूल शिक्षा नियमों में निर्धारित मानदंडों के उल्लंघन को दर्शाते हैं?
क्या प्रधानाचार्य अथवा किसी अन्य जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं?
यह सुनिश्चित करने के लिए क्या नीतिगत उपाय प्रस्तावित हैं कि सभी सरकारी विद्यालयों में न्यूनतम आधारभूत संरचना एवं बाल संरक्षण संबंधी मानकों का पालन हो?
B. उपायुक्त, पानीपत
क्या आरोपों के संबंध में स्वतंत्र तथ्य-जांच की गई है?
विद्यालय में बुनियादी आधारभूत संरचना एवं स्वच्छता सुविधाओं को बहाल करने/सुधारने के लिए जिला प्रशासन द्वारा क्या कदम उठाए गए हैं?
प्रशासनिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई शुरू की गई है?
C. जिला शिक्षा अधिकारी, पानीपत
क्या प्रधानाचार्य द्वारा विद्यार्थियों के साथ अभद्र व्यवहार, अपमान एवं धमकी देने संबंधी आरोप सही हैं?
क्या कक्षा XII-B के विद्यार्थियों को उनकी कक्षा में प्रवेश से वंचित कर बाहर बैठने के लिए मजबूर किया गया?
क्या निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत आवश्यक पर्याप्त कक्षाएं, डेस्क, बेंच, बिजली, पंखे, पेयजल तथा लड़कों एवं लड़कियों के लिए पृथक कार्यशील शौचालय उपलब्ध हैं?
क्या विद्यालय परिसर में खुले विद्युत तार अथवा अन्य कोई खतरनाक स्थिति मौजूद है?
क्या शौचालय सुविधाओं के अभाव में विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को खुले में शौच करने के लिए मजबूर किया गया?
क्या प्रधानाचार्य की अनियमित उपस्थिति तथा विद्यार्थियों से धन एकत्र किए जाने संबंधी आरोप सही हैं?
विद्यालय परिसर की निरीक्षण रिपोर्ट की प्रति, दिनांक सहित फोटोग्राफ के साथ प्रस्तुत की जाए।
D. खंड शिक्षा अधिकारी, बापौली, जिला पानीपत
क्या विद्यालय का नियमित निरीक्षण किया गया था और यदि कोई कमियां पाई गई थीं तो क्या उन्हें उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया था?
क्या शिकायत में इंगित कमियों की जानकारी कभी जिला शिक्षा अधिकारी को दी गई थी?
विद्यालय में आधारभूत संरचना, स्वच्छता, विद्युत एवं कक्षा सुविधाओं की वर्तमान स्थिति क्या है?
शिकायत प्राप्त होने के बाद तत्काल क्या सुधारात्मक कदम उठाए.
असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि सभी संबंधित अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पूर्व आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर, 2026 को होगी।