Haryana Youth Organ Donation: जगाधरी के कुलदीप की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद परिजनों ने दान की किडनियां और कॉर्निया
चंडीगढ़: हरियाणा के 27 वर्षीय कुलदीप सिंह की कुछ दिनों पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी. कुलदीप की मौत के बाद उनके परिवार ने दुख की घड़ी में अंगदान का फैसला लिया. PGIMER में हुए अंगदान से दो किडनी मरीजों को प्रत्यारोपण के लिए अंग मिले, जबकि दोनों कॉर्निया से दो मरीजों को रोशनी मिलने की उम्मीद जगी.
हादसे ने ली जान: दरअसल, जगाधरी निवासी कुलदीप 15 सितंबर को गंभीर सिर की चोट के बाद PGIMER लाए गए थे. इससे पहले उन्हें यमुनानगर के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था.वह स्कूटी से जा रहे थे और स्पीड ब्रेकर के पास गिरने से हादसे का शिकार हुए थे. इलाज के दौरान कुलदीप की हालत में सुधार नहीं हुआ. 17 सितंबर को ब्रेन स्टेम डेथ सर्टिफिकेशन कमेटी ने निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत उन्हें ब्रेन स्टेम डेड घोषित किया. इसके बाद डॉक्टरों ने परिवार को अंगदान की प्रक्रिया की जानकारी दी.
परिवार ने लिया भावुक फैसला: इसके बाद बेटे और बड़े भाई को खोने के गम के बीच मां बीरा रानी और छोटे भाई परमिंदर ने अंगदान की सहमति दी. परिवार ने कुलदीप के सभी संभव अंग और कॉर्निया दान करने का निर्णय लिया, ताकि दूसरे जरूरतमंद मरीजों की मदद हो सके.
दो किडनी से मरीजों को मिला सहारा: अंगदान के बाद कुलदीप की दोनों किडनियां किडनी फेलियर से जूझ रहे दो मरीजों के प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध कराई गईं. वहीं दोनों कॉर्निया भी जरूरतमंद मरीजों के लिए ट्रांसप्लांट में इस्तेमाल किए गए.
निदेशक बोले- "परिवार ने त्रासदी को उम्मीद में बदला": PGIMER के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने परिवार के फैसले को लेकर कहा कि, "27 वर्षीय बेटे और भाई को खोने के बाद भी परिवार ने दूसरों के बारे में सोचा. इस फैसले ने व्यक्तिगत त्रासदी को दूसरे परिवारों के लिए उम्मीद में बदल दिया."
भावुक हुई मां: वहीं, कुलदीप की मां बीरा रानी भी भावुक हो बोली कि, "बेटे के घर वापस न आने की सच्चाई स्वीकार करना बेहद मुश्किल है. जब सोचती हूं कि उसके अंगों से किसी को जिंदगी और कॉर्निया से किसी को दिखाई देने में मदद मिलेगी, तो कुछ सुकून मिलता है."
भाई ने सड़क सुरक्षा की अपील की: इसके अलावा कुलदीप के छोटे भाई परमिंदर ने सड़क हादसों के प्रति जागरूकता फैलाने की बात कही. उन्होंने कहा कि, "जिस तरह मेरे भाई की जान गई, वैसा किसी और परिवार के साथ न हो, इसके लिए लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का प्रयास करूंगा."
अंगदान की सहमति में टीम ने की मदद: वहीं, PGIMER की ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर स्वाति थापा ने परिवार की काउंसलिंग और सहमति प्रक्रिया में मदद की. उन्होंने कहा कि, "बेटे को खोने के तुरंत बाद अंगदान की बात करना बेहद भावनात्मक स्थिति होती है, लेकिन परिवार ने दुख के बीच दूसरों को जीवन देने का साहस दिखाया."
चार मरीजों के लिए बनी नई उम्मीद: इसके साथ ही ROTTO North, PGIMER के नोडल अधिकारी डॉ. विजय ताड़िया ने बताया कि, "अंगदान से दो किडनी और दो कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए उपलब्ध हुए. परिवार का ये फैसला महत्वपूर्ण है. इससे जरूरतमंद मरीजों को नई उम्मीद मिली."
स्टील फैक्ट्री में काम करते थे कुलदीप: बता दें कि कुलदीप स्टील फैक्ट्री में काम करते थे. परिवार के लिए उनकी कमी कभी पूरी नहीं होगी, लेकिन अंगदान के फैसले ने उनकी याद को उन चार मरीजों की जिंदगी से जोड़ दिया. PGIMER ने लोगों से यातायात नियमों का पालन करने और सुरक्षित ड्राइविंग व राइडिंग की अपील की.