जींद में पीएम मोदी: उस घर की कहानी जहां बिताए थे प्रचारक के रूप में दिन
पीएम मोदी जींद में पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ करेंगे। जानें उस घर की कहानी, जहां वे प्रचारक के तौर पर जमीन पर चटाई बिछाकर सोते थे और सादगी से रहते थे।
जींद : जब सत्ता का कारवां देश के सबसे शक्तिशाली पद पर बैठे व्यक्ति के स्वागत के लिए शहर की सड़कों पर पलकें बिछाए खड़ा है, ठीक उसी समय शहर के गांधी नगर का एक शांत कोना अतीत की अनमोल यादों को समेटे एक अलग ही आभा बिखेर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 जुलाई के प्रस्तावित दौरे ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्तंभ रहे स्वर्गीय लाला रामेश्वर दास गुप्ता के उस पुराने घर को एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है, जो कभी प्रचारक नरेंद्र मोदी की कर्मस्थली और विश्रामगाह हुआ करता था।
शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जींद रेलवे जंक्शन से चलने वाली देश की पहली हाईट्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखा इसका शुभारंभ करने यहां पहुंचे रहे हैं, जिसके बाद वो यहां एकलव्य स्टेडियम के समीप हुडा ग्राउंड में रैली को भी संबोधित करेंगे। उनके जींद आगमन की तैयारियों के मद्देनजर पूरे शहर को सजा दिया गया है और इसके साथ ही शहर के चप्पे चप्पे पर पुलिस का पहरा बैठा दिया गया है। इसी कड़ी में जहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला गुजरेगा वहां बल्लियां गाड़ी जा रही हैं और मार्ग को पूर्ण सील करने की कार्ययोजना के साथ यहां पुलिस को पूरे रास्ते मुस्तैदी से खड़ा कर दिया गया है ताकि यहां परिंदा भी पर ना मार सके।
आज जब राजनीति भव्यता और तड़क-भड़क के दौर से गुजर रही है, तब जहां से कि नरेंद्र मोदी का काफ़िला गुजरेगा उसी के बिल्कुल समीप गोहना-सफीदों रोड के मध्य कालोनी गांधीनगर के घर की चौखट एक ऐसे दौर की गवाही देती है जब देश का भावी नेतृत्व सादगी की पराकाष्ठा पर जी रहा था। यहां कभी लाला रामेश्वर दास गुप्ता रहते थे और उनके देहांत के पश्चात अब यहां उनका परिवार रह रहा है। लाला रामेश्वर दास गुप्ता के पुत्र दयानंद गुप्ता भावुकता के साथ याद करते हैं कि संगठन मंत्री के रूप में जब नरेंद्र मोदी जींद आते थे, तो उनका जीवन किसी संत जैसा था।
आधुनिक सुख-सुविधाओं से कोसों दूर, वे रात को जमीन पर केवल एक साधारण चटाई बिछाकर सो जाते थे। भोजन के नाम पर उनकी पसंद महज एक कटोरी सादी खिचड़ी तक सीमित थी। उस दौर के उनके पूरे संसार का साजो-सामान कपड़े के एक मामूली झोले में समाया होता था, जो हर रोज इस घर के एक कमरे की खूंटी पर टंगा रहता था। सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही वे बिना किसी तामझाम के सांगठनिक कर्तव्यों के लिए निकल पड़ते थे और परिवार के साथ उनका आत्मीय जुड़ाव ऐसा था मानो वे कोई राजनेता नहीं, बल्कि इसी कुनबे के बड़े भाई हों।
यह आशियाना केवल एक ठहराव भर नहीं था, बल्कि यह देश और राज्य की राजनीति की दिशा बदलने वाली रणनीतियों का गर्भ गृह भी रहा है। साल 2000 के फरवरी महीने में जब हरियाणा विधानसभा चुनाव की घोषणा हुई और नरेंद्र मोदी को राज्य का भाजपा प्रभारी बनाया गया, तब इसी घर की चारदीवारी चुनावी चक्रव्यूह की रचना की गवाह बनी।
कई दिनों तक इसी शांत माहौल में रहकर उन्होंने सांगठनिक समीकरणों को साधा और ऐसी रणनीतिक बिसात बिछाई जिसने आने वाले सालों में हरियाणा की राजनीति की रूपरेखा ही बदल दी। इस घर से प्रधानमंत्री मोदी का आत्मिक लगाव कितना अटूट है, इसकी बानगी करीब 12 साल पहले तब देखने को मिली थी जब वे 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री के रूप में जींद की धरती पर आए थे।
यहां विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रोटोकॉल और औपचारिकता के सारे पर्दे हटाते हुए उन्होंने मंच से बेहद भावुक होकर लाला रामेश्वर दास गुप्ता के इसी घर और उस ऐतिहासिक 'खूंटी' का जिक्र किया था, जिसने एक आम कार्यकर्ता से देश के प्रधान सेवक बनने तक के उनके सफर को बहुत करीब से देखा था। दिलचस्प बात यह है कि सादगी और राष्ट्र सेवा की यह सीख इस घर की मिट्टी में ही रची-बसी है। लाला रामेश्वर दास गुप्ता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनके बेटों और पोतियों ने देश की सर्वोच्च प्रशासनिक और सुरक्षा एजेंसियों में शीर्ष पदों को सुशोभित किया है।
उनके बड़े बेटे यशपाल सिंघल ने जहां हरियाणा पुलिस के महानिदेशक के रूप में कानून-व्यवस्था की कमान संभाली, वहीं छोटे बेटे योगेश मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ देश की सबसे बड़ी ढाल, राष्ट्रीय जांच एजेंसी के प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उनके बेटे दयानंद सिंघल यहां अपना निजी व्यापार संभाले हुए हैं तो पौत्र चिराग गुप्ता अपनी चार्टेड अकाउंटेंट की पढ़ाई पुरी करने के बाद अभी राजनीति में कदम रखने की सोच रहे हैं।
इसी गौरवशाली परंपरा को जीवित रखते हुए उनकी पोती आस्था मोदी वर्तमान में केंद्रीय जांच ब्यूरो में पुलिस उप-महानिरीक्षक के पद पर तैनात रहकर देश की सुरक्षा में अपना योगदान दे रही हैं। शुक्रवार को जब प्रधानमंत्री का काफिला जींद की सड़कों से गुजरेगा, तब गांधी नगर का यह साधारण सा घर अपनी उसी ऐतिहासिक खूंटी और यादों के सहारे मौन रहकर यह संदेश दे रहा होगा कि महानता की शुरुआत हमेशा सादगी की सबसे निचली सीढ़ी से ही होती है।