हाईकोर्ट का HSVP को बड़ा झटका, अवैध कब्जे वाले प्लॉट को बहाल करने के आदेश
पंचकूला: हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) की लापरवाही से प्लॉट आवंटन के एक मामले में गड़बड़ी हो गई. नतीजतन आवंटी को प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और न्याय के लिए उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करनी पड़ी.
हाईकोर्ट ने एचएसवीपी को बड़ा झटका दिया: वहीं, अब इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एचएसवीपी को बड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने हिसार में एक आवंटी के पक्ष में प्लॉट बहाल करने का आदेश दिया और कहा कि जब प्राधिकरण ने स्वयं स्वीकार किया है कि नीलामी से पहले प्लॉट पर अवैध कब्जा था और अधिकारियों ने उचित जांच-पड़ताल नहीं की. ऐसे में उसकी सजा आवंटी को नहीं दी जा सकती. जस्टिस सुवीर सहगल और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने लक्ष्मी देवी की याचिका स्वीकार करते हुए अपना उक्त फैसला सुनाया.
ई-नीलामी में सबसे ऊंची बोली लगाई: मामले के अनुसार लक्ष्मी देवी ने हिसार के सेक्टर-1 के पार्ट-दो स्थित 135 वर्ग मीटर के प्लाट नंबर 2373 की ई-नीलामी में सबसे ऊंची बोली लगाई थी. इस पर उन्हें लेटर ऑफ इंटेंट और 27 जून 2023 को आवंटन पत्र जारी कर दिया गया. आवंटी ने करीब 76.45 लाख रुपये की पूरी राशि जमा की और एचएसवीपी ने उन्हें प्लॉट का कब्जा देने की पेशकश भी की. लेकिन जब कब्जा लेने की प्रक्रिया शुरू हुई तो पता चला कि प्लॉट पर पहले से स्थाई निर्माण और अवैध कब्जा मौजूद है. आगामी जांच में सामने आया कि केवल यही नहीं, बल्कि आसपास के कई अन्य प्लाट पर भी अतिक्रमण किया गया था. बावजूद इसके एचएसवीपी ने इन प्लॉटों की नीलामी कर दी थी.
अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानकारी दी: मामले की सुनवाई के दौरान एचएसवीपी ने अदालत के समक्ष स्वीकार किया कि संबंधित अधिकारियों ने नीलामी से पहले प्लॉट की वास्तविक स्थिति की जांच नहीं की थी. यह भी माना कि कब्जा होने की जानकारी समय रहते वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी गई. नतीजतन बाद में प्लाट रद्द कर राशि वापस करने का फैसला ले लिया गया. वहीं, विभाग ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की जानकारी दी.
सरकारी एजेंसी मनमाना व्यवहार नहीं कर सकती: हाईकोर्ट ने कहा कि रिकार्ड से स्पष्ट है कि मामले में पूरी गलती एचएसवीपी की है. कहा गया कि यदि नीलामी से पहले उचित सत्यापन किया गया होता तो विवाद पैदा नहीं होता. कोर्ट ने कहा कि एक सरकारी एजेंसी नागरिकों के साथ मनमाना व्यवहार नहीं कर सकती और प्रशासनिक विफलताओं का बोझ आमजन पर नहीं डाल सकती. इस मामले में खंडपीठ ने अपने पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में केवल जमा राशि को लौटाना पर्याप्त राहत नहीं माना जा सकता, वह भी जब आवंटी ने पूरी कीमत जमा कर दी हो और गलती पूरी तरह प्राधिकरण की हो. कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता किसी प्रकार से दोषी नहीं है और उसे उसके वैध अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता.
कोर्ट के प्लॉट बहाली के निर्देश:अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए एचएसवीपी को मुकदमे के दौरान सुरक्षित रखे गए प्लॉट का आवंटन याचिकाकर्ता के पक्ष में बहाल करने के निर्देश दिए. इसके साथ ही प्राधिकरण को प्लॉट किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित या आवंटित न करने के पूर्व आदेश का पालन करने को भी कहा गया.