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Nursing Officer Sheetal Rani Case: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, विदेश यात्रा के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 का हिस्सा बताया

हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर लगाए गए प्रतिबंध को रद्द कर दिया है। इसे अनुच्छेद 21 का उल्लंघन बताया।
 

चंडीगढ़: पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार की ओर से सरकारी कर्मचारियों के सितम्बर 2026 तक विदेश यात्रा पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को मनमाना, असंगत और जरूरत से ज्यादा कठोर करार देते हुए रद्द कर दिया है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विदेश यात्रा का अधिकार महज प्रशासनिक सुविधा नहीं बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने नर्सिंग अधिकारी शीतल रानी को आस्ट्रेलिया जाकर व्यावसायिक परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने के लिए सक्षम प्राधिकारी को उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया।

शीतल रानी ने 23 फरवरी 2021 को रोहतक स्थित पी.जी.आई. एम.एस. में नर्सिंग अधिकारी के रूप में सेवा शुरू की थी। व्यावसायिक अनुभव और उच्च योग्यता हासिल करने के उद्देश्य से उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में होने वाली एक परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन किया था।

पाठ्यक्रम में भाग लेने और 29 सितम्बर को होने वाली परीक्षा में शामिल होने की अनुमति भी उन्हें मिल चुकी थी। इसके बाद उन्होंने 18 अगस्त को अर्जित अवकाश के लिए आवेदन किया लेकिन 10 जून के सरकारी निर्देशों के आधार पर उनके आवेदन पर विचार नहीं किया गया।

हरियाणा सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया के संकट ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, विशेषकर ईंधन और अन्य आवश्यक संसाधनों को प्रभावित किया है। इसी वैश्विक परिस्थिति को देखते हुए ईंधन बचाने, संसाधनों का संरक्षण करने और सरकारी खर्च कम करने के लिए मितव्ययता के तौर पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल सरकारी सेवा में होने के आधार पर पूरे वर्ग को विदेश यात्रा से रोकना स्पष्ट रूप से मनमाना है।