रेवाड़ी: रूस-यूक्रेन युद्ध में शहीद अंशु का पार्थिव शरीर 180 दिन बाद लौटा
रेवाड़ी के अंशु का शव 6 महीने बाद रूस से पैतृक गांव पहुँचा। MBA करने गया अंशु एजेंटों के धोखे से रूसी सेना में भर्ती हुआ था। भारत सरकार के प्रयासों से हुई घर वापसी।
रेवाड़ी: हरियाणा के रेवाड़ी जिले के डहीना गांव में आज मातम पसरा है। आंखों में बेहतर भविष्य के सपने लेकर रूस गए 22 वर्षीय अंशु का पार्थिव शरीर करीब 180 दिनों के लंबे इंतजार के बाद जब गांव पहुँचा, तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। यह कहानी एक होनहार छात्र के संघर्ष, धोखे और युद्ध की विभीषिका की दर्दनाक दास्तां है।
अंशु के परिजनों ने बताया कि वह पिछले साल MBA (Master of Business Administration) की डिग्री हासिल करने के लिए रूस गया था। मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले अंशु का लक्ष्य वहां से पढ़ाई कर एक अच्छी नौकरी पाना और अपने परिवार को आर्थिक संबल देना था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
एजेंटों का छल और युद्ध की आग
आरोप है कि रूस पहुँचने के बाद अंशु को कुछ बिचौलियों और एजेंटों ने गुमराह किया। पढ़ाई के नाम पर उसे रूसी सेना में 'सपोर्ट स्टाफ' या 'हेल्पर' के रूप में भर्ती होने के लिए मजबूर किया गया। उसे बताया गया कि उसे मोर्चे पर नहीं जाना होगा, लेकिन रूसी सेना ने उसे सीधे यूक्रेन के खिलाफ युद्ध की अग्रिम पंक्ति (Front line) पर तैनात कर दिया। मार्च 2024 के आसपास युद्ध क्षेत्र में हुए एक भीषण हमले में अंशु की जान चली गई।
6 महीने का लंबा कूटनीतिक इंतजार
अंशु की मौत की खबर मिलने के बाद से ही उसके पिता और ग्रामीण शव को वापस लाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।युद्धग्रस्त क्षेत्र होने के कारण शव की पहचान और उसे वापस लाने की प्रक्रिया अत्यंत कठिन थी।पहचान सुनिश्चित करने के लिए अंशु के परिजनों का डीएनए नमूना रूस भेजा गया था। भारत सरकार और विदेश मंत्रालय (MEA) के निरंतर प्रयासों के बाद रूसी अधिकारियों ने शव को हैंडओवर किया।
अंशु की अपने परिवार से अंतिम बार बातचीत 18 अगस्त को हुई थी। इस बातचीत में अंशु ने पिता राकेश कुमार से कहा था कि वे रूस में बुरी तरह फंस चुके हैं। अब हमारी बातचीत 3 बाद ही हो पाएगी। इसके बाद बेटे के फोन का इंतजार कर रहे पिता की मौत की सूचना मिली। दूतावास से 4 अप्रैल को फोन कर पिता को बताया कि अंशु की बॉडी मिल चुकी है और उसे भारत भेजा जा रहा है।
तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा था अंशु
गांव काठुवास निवासी राकेश कुमार की पत्नी की पहले ही मौत हो चुकी है। 3 भाई-बहनों में अंशु सबसे छोटा था। परिवार के पास अब पढ़ाई करने के लिए विदेश गए अंशु की यादें ही शेष बची हैं।