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रोहतक कोर्ट शूटआउट: गैंगस्टर राजे बोहर समेत 8 बरी, सबूतों की कमी पड़ी भारी

रोहतक कोर्ट परिसर में 2017 में हुए गैंगवार मामले में बड़ा फैसला। गैंगस्टर राजेश उर्फ राजे बोहर समेत 8 आरोपी बरी। जानें क्यों पुलिस कोर्ट में नहीं साबित कर पाई जुर्म।

 

रोहतक: हरियाणा के रोहतक कोर्ट परिसर में 9 साल पहले हुई फायरिंग मामले में गैंगस्टर राजेश उर्फ राजे बोहर समेत 8 आरोपी सबूतों के अभाव में बरी हो गए. 28 मार्च 2017 को कोर्ट परिसर में एक अन्य गैंगस्टर रमेश लुहार पर फायरिंग हुई थी. फायरिंग की इस वारदात में लुहार का एक साथी मारा गया था, जबकि एक वकील समेत आधा दर्जन लोग घायल हो गए थे. फायरिंग करने वाला बदमाश महिला के कपड़े पहन कर आया था.

रोहतक कोर्ट में फायरिंग मामले में 8 बरी: इस मामले में कोर्ट में आरोपियों से बरामद हथियार और मौके से मिली बुलेट आपस में मैच नहीं हो पाई. वहीं, रमेश लुहार भी आरोपियों को नहीं पहचान पाया. लुहार, फिलहाल नगर निगम रोहतक में मनोनीत पार्षद हैं.

28 मार्च 2017 को हुई थी फायरिंग: गौरतलब है कि 28 मार्च 2017 को रोहतक कोर्ट परिसर में फायरिंग हुई थी. बदमाश महिला के कपड़े पहनकर आया था. इस वारदात में गैंगस्टर रमेश लुहार पर जानलेवा हमला हुआ था. हालांकि लुहार बच गया था, लेकिन उसके एक साथी संजीत की गोली लगने से मौत हो गई थी. सोनीपत जिला के भैंसवान गांव का निवासी था. फायरिंग के दौरान एक वकील समेत 6 अन्य लोग भी घायल हुए थे.

2013 से शुरू हुआ था मामला: दरअसल 21 मई 2013 को रोहतक में ओल्ड शुगर मिल के पास स्थित एक प्रॉपर्टी डीलर के ऑफिस में हरियाणा और दिल्ली पुलिस ने दबिश दी थी. ऑफिस में रमेश लुहार अपने साथियों के साथ मौजूद था. तब मुठभेड़ के दौरान दिल्ली पुलिस के जवान के पैर में गोली लगी थी. शिवाजी कॉलोनी पुलिस स्टेशन में रमेश लुहार समेत 12 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था.

रोहतक कोर्ट में हुई थी फायरिंग: इसी केस के सिलसिले में पेशी के लिए लुहार अपने साथियों के साथ कोर्ट में आया हुआ था. रमेश पर उस समय हरियाणा दिल्ली में संगीन अपराध के 9 केस दर्ज थे. कोर्ट में पेशी के दौरान ही करीब आधा दर्जन बदमाशों ने हमला किया था. लुहार ने वकीलों के चैंबर की तरफ भागकर जान बचाई थी. पुलिस ने इस संबंध में लुहार के बयान के आधार पर रोहतक जिला के बोहर गांव निवासी नरेश काला और उसके भाई राजेश उर्फ राजे के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया था.

रंजिश के चलते की थी फायरिंग: महिला के वेश में हमला करने वाले बदमाश की पहचान बोहर गांव निवासी सुमित प्लोटरा के रूप में हुई थी. नरेश काला की रमेश लुहार के साथ रंजिश चल रही थी और इसी रंजिश के चलते ये हमला हुआ था. बाद में पुलिस ने सुमित उर्फ प्लोटरा को गिरफ्तार किया था. तब पुलिस पूछताछ में उसने बताया था कि रमेश लुहार की हत्या करने के लिए उसे राजे ने भेजा था. उसके साथ दिल्ली के दरियापुर गांव निवासी संदीप उर्फ पादू भी था. राजे इसलिए रमेश लुहार की हत्या करना चाहता है, क्योंकि रमेश लुहार ने राजे के भाई नरेश काला पर हमला कराया था.

आरोपियों का कराया गया था पोलिग्राफ टेस्ट: फायरिंग के मामले में पुलिस ने राजेश उर्फ राजे व उसके साथियों को गिरफ्तार किया था और कोर्ट में चालान पेश किया. इसके बाद जब केस गवाही पर आया तो आरोपियों को जमानत मिल गई. इस मामले में राजे के भाई नरेश काला का नाम भी फायरिंग केस में आया था. पुलिस ने नरेश काला का पोलिग्राफी टेस्ट भी करवाया था, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा और उसे क्लीन चिट मिल गई. नरेश काला फिलहाल रोहतक की जाट शिक्षण संस्था का कोलिजियम सदस्य है और उसकी पत्नी कृष्णा देवी नगर निगम रोहतक की पार्षद है.

9 साल तक चला केस: आरोपी पक्ष के वकील अशोक कादियान ने बताया कि ये केस 9 साल तक कोर्ट में चला. जिसमें 45 लोगों को गवाह बनाया गया था. इसमें से करीब 40 लोगों की गवाहियां भी हुई. लेकिन पुलिस कोर्ट में ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर पाई जो दोषी साबित करे. पुलिस ने आरोपियों से जो हथियार बरामद किए और मौके से जो बुलेट बरामद की, वे आपस में मैच नहीं हो रही थी. इसके साथ ही शिकायतकर्ता रमेश बोहर भी आरोपियों को पहचान नहीं सका. ऐसे में एडीजे रजनी यादव की कोर्ट ने राजेश उर्फ राजे, नसीब, धीरज, संदीप, सुमित, राहुल, सत्यवान व अरुण को बरी कर दिया.