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शंभू बॉर्डर पर बनी सहमति: किसानों ने टाला दिल्ली कूच, कृषि मंत्री से हुई बात

शंभू बॉर्डर पर कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा और किसानों के बीच बैठक सफल। किसानों ने दिल्ली न जाने का किया फैसला, गिरफ्तार नेताओं की होगी रिहाई।

 

हरियाणा : शम्भू बोर्डर पर हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा पहुंचे। मौके पर बातचीत कर किसानों की दो मांगे मान ली है। पहली मांग हिरासत में लिए गए किसानों को रिहा किया जाएगा। साथ ही दूसरी मांग मानते हुए केंद्रीय मंत्री से भी बातचीत करवाने की बात कही। 

सरवन सिंह पंधेर ने बैठक के बाद कहा कि हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम राणा ने हमे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज चौहान से बातचीत कराने का आश्वासन दिया है। हमने किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी समेत गिरफ्तार किए गए दूसरे नेताओं की रिहाई की मांग की है। हमारी दोनों मांगे मान ली हैं अब हम अपने नेताओं से बातचीत करके आगे का फैसला लेंगे। बता दें कि अब किसानों  ने फैसला किया है कि वह शंभू बोर्डर से आगे नहीं बढेंगे। अब उन्होंने दिल्ली न जाने का फैसला लिया।

जानकारी हो कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Trade Deal) के विरोध में किसान संगठनों ने आज राजधानी दिल्ली स्थित 'किसान घाट' पर विरोध प्रदर्शन और 'दिल्ली कूच' की घोषणा की। किसानों के इस आह्वान को देखते हुए हरियाणा-पंजाब सीमा स्थित अंबाला के शंभू टोल प्लाजा पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। पुलिस और सुरक्षा बलों ने शंभू टोल प्लाजा पर बहुस्तरीय (multi-layer) बैरिकेडिंग कर दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) पर वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह से रोक दिया गया है और यात्रियों की सुविधा के लिए कई वैकल्पिक मार्गों (Route Diversions) पर यातायात को मोड़ा गया है। चप्पे-चप्पे पर भारी संख्या में हरियाणा पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए । पुलिस प्रशासन ने किसी भी संगठन या प्रदर्शनकारी दल को फिलहाल आगे (दिल्ली की तरफ) जाने की अनुमति नहीं दी।अधिकारियों का कहना है कि "यदि किसान जबरन बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे, तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव और सख्त कदम उठाए जाएंगे।"

बता दें किसान संगठनों का आरोप है कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका ट्रेड डील में कृषि, डेयरी और पोल्ट्री जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को शामिल किया जा रहा है। किसानों को आशंका है कि अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क कम होने से देश में सस्ते विदेशी उत्पाद आएंगे, जिससे भारत के करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा। किसान नेताओं की मांग है कि केंद्र सरकार इस प्रस्तावित समझौते को तुरंत रद्द करे।