{"vars":{"id": "123258:4912"}}

Karni Sena UGC Rules Protest: 870 किमी का सफर तय कर कुरुक्षेत्र पहुंची स्वर्ण न्याय यात्रा, महिपाल मकराना ने उठाए सवाल

बीकानेर से शुरू होकर 870 किमी का सफर तय कर 'स्वर्ण न्याय यात्रा' कुरुक्षेत्र पहुंची। यूजीसी के नए प्रावधानों के खिलाफ करणी सेना ने उठाई आवाज।
 

कुरुक्षेत्र: करणी सेना और सर्व ब्राह्मण सभा (हरियाणा प्रांत) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'स्वर्ण न्याय यात्रा' बुधवार शाम कुरुक्षेत्र के पीपली स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पहुंची. स्वर्ण समाज के विरोध प्रदर्शन के रूप में शुरू हुई यह यात्रा शहर के मुख्य मार्गों से होती हुई कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक ब्रह्मसरोवर पर पहुंचकर आज को यात्रा संपन्न हुई.

बीकानेर से शुरू हुई 870 किलोमीटर की यात्रा: करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना और सर्व ब्राह्मण सभा के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा के नेतृत्व में निकाली जा रही इस यात्रा के 28 दिन पूरे हो चुके हैं. मकराना ने बताया कि 11 जुलाई को राजस्थान के बीकानेर से शुरू हुई ये यात्रा अब तक करीब 870 किलोमीटर का सफर तय कर चुकी है. हरियाणा में इस यात्रा का प्रवेश चार दिन पहले पानीपत से हुआ था, जिसके बाद ये कुरुक्षेत्र पहुंची.

​यूजीसी के नए प्रावधानों पर उठाए सवाल: पीपली और कुरुक्षेत्र में जनसमूह को संबोधित करते हुए महिपाल सिंह मकराना ने यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों और प्रस्तावों पर कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने आरोप लगाया कि ​"कॉलेजों में बनने वाली पांच सदस्यीय समितियों और उनमें तय श्रेणियों के प्रतिनिधित्व से समाज में भेदभाव की स्थिति पैदा हो सकती है."

'झूठे मामले दर्ज होने का जोखिम बढ़ेगा': उन्होंने कहा कि "इस प्रकार के कड़े नियमों के कारण शैक्षणिक संस्थानों में झूठे मामले दर्ज होने का जोखिम बढ़ जाएगा, जिससे सामान्य वर्ग के युवाओं और छात्राओं के लिए असहज स्थिति पैदा होगी." ​उन्होंने इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों, विधायकों और सांसदों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए खाप पंचायतों से भी इस विषय में आगे आने की बात कही.

'अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी': कुरुक्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का संदर्भ देते हुए मकराना ने कहा कि जिस प्रकार महाभारत के युद्ध में मार्गदर्शक मौजूद थे, इस स्थिति में समाज को अपने अधिकारों और पक्ष की रक्षा के लिए स्वयं ही आगे आना होगा. उन्होंने स्वर्ण समाज से एकजुट होकर अपनी बात संवैधानिक तरीके से सरकार के समक्ष रखने की अपील की.