भिवानी: किसान सभा का मंत्री श्रुति चौधरी के आवास पर घेराव, ये हैं मांगें
भिवानी में अखिल भारतीय किसान सभा ने जलभराव और मुआवजे की मांग को लेकर मंत्री श्रुति चौधरी के आवास का घेराव किया। 1 जुलाई को चंडीगढ़ में होगी अहम बैठक।
भिवानी। अखिल भारतीय किसान सभा हरियाणा के आह्वान पर सेकड़ों किसानों ने जलभराव और पानी की समस्या के निराकरण सहित विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश की महिला बाल विकास एवं सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी के आवास का घेराव कर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारियों ने समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
प्रदर्शनकारियों ने बाढ़ रोकथाम के लिए रानियां के पास ओटू हेड पर घग्गर नदी में हिसार घग्गर ड्रेन का पानी लिफ्ट लगाकर डालने, जलभराव रोकथाम के लिए सभी ड्रेनों, नहरों की सफाई करवाने, जलभराव से बर्बाद फसलों नष्ट हुए घरों का मुआवजा दिलवाने की मांग की। इसके अलावा विभिन्न गांव, कस्बों व शहरों में पीने का पानी उपलब्ध करवाने के लिए 42 दिनों में नहरों में आने वाले पानी को एक सप्ताह तक चालू रखने, बिजली टावरों के बदले न्यायोचित मुआवजा देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर वीरवार को भिवानी के नेहरू पार्क में किसान महापंचायत की। इसके बाद प्रदर्शन करते हुए महिला बाल विकास एवं सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी के कैंप आफिस पहुंचें वहां उपरोक्त मांगों के लिए मंत्री के कैंप आफिस का घेराव किया। अंत में आफिस के पदाधिकारी दिलबाग सिंह निमड़ी ने मंत्री से बातचीत करके एक जुलाई को किसान सभा प्रतिनिधि मण्डल को चंडीगढ़ बुलाया है और किसानों से ज्ञापन प्राप्त किए।
चानौत के आंदोलन का समर्थन किया
महापंचायत की अध्यक्षता किसान सभा के राज्य प्रधान मास्टर बलबीर सिंह, रामफल देशवाल, राजेन्द्र फतेहाबाद, कपूर सिंह हिसार, धन्नों रोहतक, सुनील मलिक रोहतक व हमजिन्दर सिरसा ने संयुक्त रूप से की। मंच संचालन किसान सभा के राज्य महासचिव सुमित दलाल व जिला भिवानी सचिव मास्टर जगरोशन ने संयुक्त रूप से किया। इससे पहले महापंचायत में एक प्रस्ताव पास करके चानौत गांव के लिए पीने के पानी मांगने के आंदोलन का समर्थन किया गया और पुलिस ज्यादतियों की निंदा की। महापंचायत में दूसरा प्रस्ताव भारत और अमेरिका के बीच हो रहे व्यापार समझौते में अमेरिका की शर्तें नहीं मानने की मांग की गई।
किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इन्द्रजीत सिंह ने कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में हमारे किसान मजदूर हितों का ध्यान नहीं रखा गया तो हमारी कृषि और व्यापार बर्बाद हो जाएंगे। इसलिए यह समझौता बराबरी के आधार पर हो। इस दौरान ओमप्रकाश, कमल सिंह प्रधान, संदीप धीरनवास, मास्टर विष्णु, सरबत पूनिया, शमशेर पूनिया शामिल रहे।