हरियाणा में बागवानी क्रांति: 2,738 करोड़ की नई परियोजना का शुभारंभ
हरियाणा सरकार ने किसानों के लिए 2,738 करोड़ की बागवानी परियोजना लॉन्च की। कोल्ड चेन, AI तकनीक और आधुनिक सुविधाओं से किसानों की आय और कृषि निर्यात बढ़ेगा।
हरियाणा सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने 2,738 करोड़ रुपये की लागत वाली सतत बागवानी संवर्धन परियोजना (Sustainable Horticulture Enhancement Project) की शुरुआत की है। इसके साथ ही पंचकूला में हरियाणा एग्री बिजनेस एंड कोल्ड चेन सेंटर की आधारशिला भी रखी गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इन परियोजनाओं का शुभारंभ करते हुए कहा कि इन पहलों से किसानों को बेहतर बाजार, आधुनिक भंडारण सुविधाएं और मूल्य संवर्धन के नए अवसर मिलेंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और फसलों का नुकसान कम होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी और एग्री-बिजनेस क्षेत्र में भी अग्रणी राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में फल और सब्जियों का एक बड़ा हिस्सा बाजार तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाता है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार खेत से लेकर बाजार तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करेगी। परियोजना के तहत आधुनिक कोल्ड चेन नेटवर्क, पैकिंग सुविधाएं, भंडारण केंद्र और बेहतर मार्केटिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत राज्य में 400 बागवानी क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और 500 उत्पादक समूहों (FPOs) को संगठित किया जाएगा। इसके अलावा 402 पैक हाउस, 4 लीड पैक हाउस, 3 फुलफिलमेंट सेंटर और 44 रिटेल आउटलेट स्थापित किए जाएंगे। सरकार ने जल संरक्षण को भी इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। इसके तहत 1,000 वर्षा जल संचयन संरचनाएं बनाई जाएंगी और लगभग 65,000 एकड़ क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के दायरे में लाया जाएगा। इससे पानी की बचत के साथ उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलती जलवायु, गिरते भूजल स्तर और बढ़ती कृषि लागत को देखते हुए तकनीक आधारित खेती को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से परियोजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम, मिट्टी और जल विश्लेषण, डिजिटल कृषि सलाह, इंटरनेट ऑफ प्लांट्स, भू-स्थानिक तकनीक और ई-मार्केटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इन तकनीकों की मदद से किसानों को फसल प्रबंधन, सिंचाई, पोषण और बाजार संबंधी बेहतर जानकारी मिल सकेगी, जिससे उत्पादन और लाभ दोनों में वृद्धि होगी।
बागवानी क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकों से जोड़ने के लिए महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल और जापान के कोची विश्वविद्यालय के बीच सहयोग स्थापित किया जाएगा। इस साझेदारी के माध्यम से अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान होगा। सरकार का मानना है कि इससे हरियाणा के किसानों को उन्नत बागवानी तकनीकों और वैश्विक स्तर के शोध का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि कृषि अब केवल खेती तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह तेजी से व्यवसाय आधारित क्षेत्र बन रही है। उन्होंने युवाओं से एग्री-बिजनेस, कृषि प्रसंस्करण, खाद्य उद्योग और निर्यात आधारित उद्यमों में आगे आने का आह्वान किया। नया एग्री बिजनेस एंड कोल्ड चेन सेंटर किसानों, एफपीओ, कृषि स्टार्टअप और कृषि विशेषज्ञों के लिए प्रशिक्षण, नवाचार और उद्यमिता का प्रमुख केंद्र बनेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
हरियाणा सरकार के अनुसार इस परियोजना से 3 लाख से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। सरकार ने आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता में 75 प्रतिशत से अधिक सुधार और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में 10 से 15 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को अपनाकर कृषि निर्यात को बढ़ावा देने की भी योजना है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है और यह परियोजना उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। आधुनिक कोल्ड चेन, बेहतर बाजार व्यवस्था और मूल्य संवर्धन की सुविधाओं से किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलेगा और कृषि अधिक लाभकारी बन सकेगी।