Nana Patekar Memories: गोवा में निधन के बाद याद आया नाना का गांव और उनका ऐतिहासिक जन्मस्थान
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद चर्चा में आया उनका जन्मस्थान। जानिए अरब सागर में स्थित 450 साल पुराने अजेय मुरुड जंजीरा किले का इतिहास।
दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर को अपने गांव और मिट्टी से बेहद लगाव था। वह अक्सर गर्व से कहते थे कि वह हमेशा एक गांव के आदमी ही रहेंगे। महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में जन्मे नाना पाटेकर का यह जन्मस्थान एक ऐसे समुद्री किले के लिए दुनिया भर में मशहूर है, जिसकी कहानी सचमुच रिमार्केबल और हैरान करने वाली है। अरब सागर के बीच एक अंडाकार द्वीप पर बना यह किला लगभग 450 साल पुराना है। इतिहास इस बात का गवाह है कि इस किले को जीतने के लिए कई बड़ी ताकतों ने कोशिश की, लेकिन कोई भी इसमें कभी कामयाब नहीं हो पाया।
🏰 किले का अनोखा इतिहास और गुप्त प्रवेश द्वार
मुंबई से करीब 150 किलोमीटर दूर स्थित मुरुड अपने खूबसूरत समुद्र तटों और मुरुड जंजीरा किले के लिए जाना जाता है। ‘जंजीरा’ शब्द अरबी भाषा के ‘जज़ीरा’ से लिया गया है, जिसका अर्थ द्वीप होता है। इस पत्थर के किले को 1567 ईस्वी में मलिक अंबर ने बनवाया था, जो बाद में सिद्दियों का एक मजबूत गढ़ बन गया। मराठों, मुगलों, पुर्तगालियों और अंग्रेजों ने इसे जीतने के तमाम प्रयास किए, लेकिन यह हमेशा अजेय रहा। इस किले की सबसे दिलचस्प विशेषता इसका मुख्य प्रवेश द्वार है, जो राजपुरी की ओर है लेकिन दूर से नजर नहीं आता। नाव जब बिल्कुल पास पहुँचती है, तभी यह दिखाई देता है। इसके अलावा खुले समुद्र की ओर एक छोटा ‘दरिया दरवाजा’ भी है।
🛶 मीठे पानी के तालाब और विशाल तोपें
चारों तरफ खारे पानी के अरब सागर से घिरे होने के बावजूद इस किले के भीतर दो गहरे मीठे पानी के तालाब मौजूद हैं, जो इंजीनियरिंग का एक नायाब नमूना है। अपने दौर में यह एक जीवंत किला था, जिसमें आवासीय परिसर, मस्जिद और बैरक हुआ करती थी। किले की सुरक्षा के लिए लगाई गई विशाल तोपें आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं, जिनमें 'कलाल बांगड़ी' (वजन 22 टन से ज्यादा), 'चावरी' और 'लांडा कसम' प्रमुख हैं। राजपुरी गांव से मात्र 20 मिनट की रोमांचक नाव की सवारी करके इस ऐतिहासिक धरोहर तक आसानी से पहुँचा जा सकता है।