Natural Death Organ Donation Myths: नॉर्मल डेथ और ब्रेन डेथ में ऑर्गन डोनेशन का क्या है अंतर? जानें स्पर्श हॉस्पिटल डॉक्टर का जवाब
ऑर्गन डोनेशन किसी व्यक्ति की डेथ के बाद जरूरतमंद मरीज को नई जिंदगी देने का बड़ा माध्यम है. लेकिन घर पर किसी व्यक्ति की मौत होने के बाद ऑर्गन डोनेशन को लेकर लोगों के मन में कई तरह के कन्फ्यूजन रहते हैं. सबसे जरूरी बात यह है कि घर पर नॉर्मल या नेचुरल डेथ होने के बाद सभी ऑर्गन्स का ट्रांसप्लांट संभव नहीं होता. डॉ. गौतम कुमार (सलाहकार- एचपीबी एवं लिवर ट्रांसप्लांट सेवाएं, स्पर्श हॉस्पिटल, यशवंतपुर, बेंगलुरु) से टीवी9 ने खास बातचीत की.
भारत में आज भी ऑर्गन डोनेशन को लेकर लोगों में अलग ही कंफ्यूजन बने हुए हैं. कुछ इसे पसंद नहीं करते हैं लेकिन ये कदम किसी की जिंदगी में नई राह डाल सकता है. घर पर डेथ हो जाए तो कौन से अंग दान किए जा सकते हैं और कौन से नहीं.. एक्सपर्ट से जानें…
एक्सपर्ट ने बताया….
ब्रेन डेथ में ऑर्गन डोनेशन- हॉस्पिटल में ब्रेन डेथ डिक्लेयर होने पर हार्ट, लंग्स, लिवर, किडनी, पैंक्रियाज और छोटी आंत जैसे महत्वपूर्ण ऑर्गन्स का डोनेशन संभव हो सकता है. इसके लिए मेडिकल टीम की निगरानी में ऑर्गन्स को सुरक्षित तरीके से निकाला जाता है और तय समय के अंदर ट्रांसप्लांट किया जाता है.
नॉर्मल डेथ में क्या संभव है?- घर पर नॉर्मल या नेचुरल डेथ होने के बाद महत्वपूर्ण ऑर्गन्स का डोनेशन आमतौर पर संभव नहीं होता. इसका कारण यह है कि डेथ के बाद शरीर में ब्लड और ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाती है, जिससे कई ऑर्गन्स ट्रांसप्लांट के लिए सुरक्षित नहीं रह पाते.
कॉर्निया डोनेशन हो सकता है- ऐसे मामलों में मुख्य रूप से आंखों की कॉर्निया डोनेट की जा सकती है. इसका इस्तेमाल जरूरतमंद मरीज की आंखों की रोशनी बहाल करने के लिए किया जा सकता है. कॉर्निया डोनेशन के लिए डेथ के कुछ घंटों के अंदर आई बैंक या संबंधित ऑथराइज्ड सेंटर को सूचना देना जरूरी होता है.
कुछ टिश्यू भी किए जा सकते हैं डोनेट- कुछ सिचुएशन में स्किन, बोन, टेंडन और हार्ट वाल्व जैसे टिश्यू भी डोनेट किए जा सकते हैं. हालांकि, इसकी एलिजिबिलिटी मेडिकल जांच और संबंधित टिश्यू बैंक की प्रोसेस पर डिपेंड करती है. अगर किसी व्यक्ति ने लाइफ में ऑर्गन डोनेशन की इच्छा जताई थी, तो डेथ के बाद फैमिली को तुरंत नजदीकी हॉस्पिटल, आई बैंक या ऑथराइज्ड ऑर्गन डोनेशन सेंटर से कॉन्टैक्ट करना चाहिए. डोनेशन के लिए समय काफी महत्वपूर्ण होता है, इसलिए देरी नहीं करनी चाहिए.
डोनेशन से बॉडी को नुकसान नहीं- डोनेशन की प्रोसेस मेडिकल एक्सपर्ट्स की निगरानी में की जाती है. बॉडी के साथ सम्मानजनक तरीके से प्रक्रिया पूरी की जाती है और इसके बाद अंतिम संस्कार सामान्य रूप से किया जा सकता है. डोनेशन से पहले डॉक्टर्स यह भी चेक करते हैं कि ऑर्गन या टिश्यू सुरक्षित और इस्तेमाल के लायक हैं या नहीं.
घर पर किसी की डेथ होने पर खुद से यह तय करने के बजाय तुरंत संबंधित मेडिकल अथॉरिटी से संपर्क करें. समय पर सूचना देने से किसी जरूरतमंद को जिंदगी या आंखों की रोशनी का अनमोल तोहफा मिल सकता है.