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Amit Shah Updates: हरियाणा लोकल न्यूज़: 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा बयां करेगा अंबाला का स्मारक, जानिए इसकी खासियतें

हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर 5 नवंबर को अंबाला में होने वाले 1857 के 800 करोड़ लागत वाले शहीद स्मारक के उद्घाटन का ब्योरा दिया। स्मारक 6 नवंबर से खुलेगा।
 

हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से औपचारिक मुलाकात कर 5 नवंबर 2026 को अंबाला में होने वाले ऐतिहासिक शहीद स्मारक के उद्घाटन कार्यक्रम के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की।

अनिल विज ने गृह मंत्री को 'आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक' की विशेषताओं, इसके ऐतिहासिक महत्व और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंबाला की क्रांतिवीर भूमिका से अवगत कराया। इस दौरान उन्होंने अमित शाह को स्मारक से संबंधित एक विशेष वीडियो प्रेजेंटेशन भी दिखाया, जिसमें इसकी भव्यता, आधुनिक तकनीक से तैयार की गई गैलरियों और स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा को प्रदर्शित किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 5 नवंबर को अंबाला पहुंचकर इस ऐतिहासिक स्मारक को राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिसके बाद 6 नवंबर से इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

🎯 अनिल विज के 5 दशक लंबे राजनीतिक संघर्ष और संकल्प को मिलेगा राष्ट्रीय मंच

यह मुलाकात और स्मारक का उद्घाटन हरियाणा भाजपा के वरिष्ठतम नेता अनिल विज के लिए विशेष राजनीतिक और ऐतिहासिक मायने रखता है:

  • 7 बार के विधायक का विजन: अंबाला कैंट अनिल विज का गृह विधानसभा क्षेत्र है, जहां से वे लगातार 7वीं बार विधायक निर्वाचित हुए हैं। पिछले कई दशकों से वे 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंबाला के अभूतपूर्व योगदान को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की पैरवी करते रहे हैं।

  • 5 दशक का राजनीतिक सफर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के साथ 5 दशकों से अधिक समय से जुड़े विज ने नायब सिंह सैनी सरकार में ऊर्जा, परिवहन और श्रम जैसे अहम मंत्रालयों का जिम्मा संभालते हुए अंबाला की ऐतिहासिक धरोहर को दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ स्थापित करने का संकल्प पूरा किया है।

📹 अमित शाह को दिखाई स्मारक की आधुनिक गैलरियां और गुमनाम शहीदों की गौरवगाथा

मुलाकात के दौरान विज ने गृह मंत्री अमित शाह को बताया कि अंबाला में तैयार यह स्मारक अपनी भव्यता, प्रामाणिक ऐतिहासिक सामग्री और आधुनिक प्रस्तुति के लिहाज से पूरे एशिया महाद्वीप के सबसे बड़े स्मारकों में शुमार है:

  • जीवंत तकनीक: वीडियो के माध्यम से दिखाया गया कि किस तरह 1857 की क्रांति की प्रमुख घटनाओं, वीर सेनानियों के सशस्त्र संघर्ष और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ हुए विद्रोह को अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक के सहारे जीवंत किया गया है।

  • गुमनाम नायकों को स्थान: इस स्मारक में न केवल प्रमुख क्रांतिकारियों, बल्कि उन अनगिनत गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को भी यथोचित स्थान दिया गया है, जिन्हें इतिहास के पन्नों में अपेक्षित पहचान नहीं मिल सकी थी।

💸 800 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ 1857 की क्रांति का भव्य केंद्र

अंबाला-दिल्ली जीटी रोड के किनारे करीब 22 एकड़ क्षेत्र में फैले इस विशाल स्मारक की प्रमुख खासियतें इस प्रकार हैं:

  • 23 आधुनिक गैलरियां: स्मारक परिसर में 23 भव्य गैलरियां बनाई गई हैं। इनमें अंबाला, मेरठ, झांसी और कश्मीरी गेट सहित उन प्रमुख केंद्रों से जुड़ी घटनाओं को प्रदर्शित किया गया है, जहां से क्रांति की ज्वाला भड़की थी।

  • अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल: परिसर में 360-डिग्री इमर्सिव प्रोजेक्शन, ड्युअल स्क्रीन वाटर शो, साउंड एंड लाइट शो के साथ-साथ युद्धक्षेत्रों, तत्कालीन बाजारों और ब्रिटिश जेलों के दृश्यों का सजीव चित्रण किया गया है।

  • 206 फीट ऊंचा टावर: स्मारक में 206 फीट ऊंचा विशाल स्मारक टावर (Tower) और 210 फीट ऊंचा तिरंगा फहराने का विशेष प्रावधान किया गया है।

⚡ अंबाला से 10 मई 1857 की सुबह उठी थी पहली चिंगारी; ब्रिटिश टेलीग्राम साक्ष्य मौजूद

स्मारक की सबसे बड़ी विशेषता 1857 के विद्रोह में अंबाला की प्राथमिक भूमिका से जुड़े ऐतिहासिक ब्रिटिश दस्तावेजों और टेलीग्राम को प्रदर्शित करना है:

  • क्रांति की पहली चिंगारी: यहां प्रदर्शित ब्रिटिश रिकॉर्ड के अनुसार, 10 मई 1857 की सुबह करीब 9 बजे मेरठ से भी कुछ घंटे पहले अंबाला कैंट में 60वीं और 5वीं रेजिमेंट के देशी सैनिकों ने बगावत का बिगुल फूंक दिया था।

  • ऐतिहासिक टेलीग्राम: तत्कालीन अंबाला उपायुक्त द्वारा पंजाब के मुख्य आयुक्त सर जॉन लॉरेंस को भेजे गए इलेक्ट्रिक टेलीग्राफ संदेश में सैनिकों के हथियारों के साथ परेड ग्राउंड में पहुंचने की सूचना दर्ज है, जिसे पहली बार सार्वजनिक रूप से बड़े पैमाने पर प्रदर्शित किया जा रहा है।