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Haryana Politics: स्मृति ईरानी और 48 विधायकों के सामने पीएम मोदी ने की अनिल विज की तारीफ, जानिए क्या है इसके राजनीतिक मायने

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक मंच से अनिल विज को अपना बहुत पुराना और अच्छा साथी बताया है। विज के 5 दशक के लंबे राजनीतिक सफर पर खास रिपोर्ट।

 

हरियाणा की राजनीति में करीब पांच दशक से सक्रिय और अपने बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ नेता अनिल विज को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सार्वजनिक मंच से ‘बहुत पुराना’ और ‘बहुत अच्छा साथी’ करार दिया है। हरियाणा के नवनिर्वाचित मंत्रियों और विधायकों के परिचय सत्र के दौरान जब अनिल विज की बारी आई, तो पीएम मोदी ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे उन्हें बहुत पुराने समय से जानते हैं और वे उनके बहुत अच्छे साथी रहे हैं। प्रधानमंत्री ने विज के थोड़े गुस्सैल और नाराज होने वाले स्वभाव का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि उनका रूठना और फिर मान जाना उनकी कार्यशैली का एक हिस्सा रहा है।

🏦 बैंक की स्थायी नौकरी छोड़कर आए थे राजनीति में: संघ के आदेश पर चुनी थी वैचारिक राह

अनिल विज का राजनीतिक सफर किसी पारंपरिक परिवार या विरासत से नहीं, बल्कि पूरी तरह से वैचारिक प्रतिबद्धता और संगठन के आदेश से शुरू हुआ था। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) जैसी प्रतिष्ठित जगह पर 17 साल की स्थायी नौकरी और पेंशन की पात्रता पूरी होने के करीब होने के बावजूद, उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और संगठन के निर्देश पर नौकरी को अलविदा कह दिया था। बिना किसी राजनीतिक बैसाखी के चुनावी रण में उतरे विज ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी एक अलग राजनीतिक जमीन तैयार की और आज वे हरियाणा भाजपा के सबसे अनुभवी स्तंभों में गिने जाते हैं।

🏛️ सात बार के विधायक और सख्त प्रशासनिक छवि: वैचारिक निष्ठा से कभी नहीं किया समझौता

विज के लंबे राजनीतिक जीवन में कई ऐसे मौके आए जब उन्हें सत्ता और पदों के बड़े प्रस्ताव मिले, लेकिन उन्होंने हमेशा राजनीतिक सुविधाओं के बजाय अपनी विचारधारा को सर्वोपरि रखा। 1996 में निर्दलीय विधायक बनने पर तत्कालीन सीएम बंसीलाल और वर्ष 2000 में ओमप्रकाश चौटाला द्वारा दिए गए मंत्री पद के प्रस्तावों को उन्होंने ठुकरा दिया था। लगभग 14 साल तक पार्टी से बाहर रहने के बावजूद उन्होंने कभी संगठन के खिलाफ बगावत नहीं की। सात बार विधायक रह चुके और ऊर्जा व परिवहन जैसे अहम विभाग संभाल चुके विज के इस संघर्षपूर्ण सफर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘पुराना साथी’ कहना उनके राजनीतिक कद की एक बड़ी और सार्वजनिक स्वीकार्यता माना जा रहा है।