Geeta Bhukkal Statement & Induraj Narwal Row: हरियाणा मानसून सत्र में हंगामे के बाद बीजेपी को मिला मुद्दा, दलित और ब्राह्मण राजनीति तेज
चंडीगढ़: देश में राहुल गांधी के बयानों पर, दलित मुद्दे पर एफआईआर होने और मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम स्थल पर हल्द्वानी में शुद्धिकरण को लेकर सियासी बवाल मचा हुआ है. हरियाणा की सियासत में भी कांग्रेस नेताओं के बयानों और एक्शन से जाति की राजनीति हो रही है. पहले कांग्रेस विधायक इंदुराज नरवाल के अपनी हो पार्टी ने सिख दलित नेता के हाथों से विधानसभा में पर्चा छिनने को लेकर हंगामा हुआ, वहीं कांग्रेस की विधायक गीता भुक्कल ने संत शिरोमणि रविदास जी महराज की एक वाणी का जिक्र करते हुए ब्राह्मणों पर की गई टिप्पणी का मुद्दा जाति आधारित बन गया. हालांकि कांग्रेस इन मुद्दों पर अपना स्पष्टीकरण दे रही है, लेकिन बीजेपी को बैठे बिठाए यह मुद्दे मिल गया हैं.
नेताओं के बयान, जाति पर संग्राम: हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में जो जाति को लेकर बहस छिड़ी वह प्रदेश के राजनीतिक दलों के लिए तो मुद्दा बन ही गया, वहीं सामाजिक संस्थाएं भी इस विवाद में कूद गई हैं. हरियाणा विधानसभा के अंदर कांग्रेस विधायक इंदुराज नरवाल ने अपनी ही पार्टी के बागी विधायक जनरैल सिंह से 1984 दंगों के दोषी रहे सज्जन सिंह को दोस्त बताने वालों को लेकर पर्चा हाथ में लिया था, वह छीन लिया था. इसको लेकर सदन में जोरदार हंगामा भी हुआ था. वहीं अब यह मामला विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के पास भी चला गया है. लेकिन यह मुद्दा अभी भी सियासी बना हुआ है.
गीता भुक्कल का बयान और विवाद! हरियाणा विधानसभा में जनरैल सिंह से इंदूराज नरवाल के बीच का मामला अभी चल ही रहा था कि विधानसभा के अंदर एक और जाति को लेकर हंगामा हो गया. बात कुछ हुई, हो कुछ और गया, यह बयान भी कुछ ऐसा ही था. गीता भुक्कल ने शायद कहने को तो सही बात की थी. लेकिन उनका अंदाज हंगामे की वजह बन गया. चर्चा गुरु रविदास जी महाराज समरसता संकल्प अभियान पर सरकारी प्रस्ताव पर हो रही थी, लेकिन इस बीच कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने जिस अंदाज में बात कही, वह ब्राह्मण समाज को ठेस पहुंचाने के तौर पर पेश हों गई.
ब्राह्मण ना पूजिये जो होंवे गुणहीन, पूजिये चरण चांडाल के जो होवे गुण परवीन. जरूरी नहीं कि ब्राह्मण है, वो बहुत बड़ा ज्ञाता हो. हो सकता है, वो भी ऐसे ही हो, बीजेपी विधायक राम कुमार गौतम जैसे जो बात-बात में जाति-पति का जहर घोलने वाले हों, आप हमेशा जाति विशेष की बात करने का काम करते हैं.
इस टिप्पणी पर सत्तापक्ष के विधायकों ने नाराजगी जताकर माफी मांगने की मांग की. सदन में जोरदार हंगामा भी हुआ. हालांकि बाद में इसको सदन की कार्यवाही से भी हटा दिया गया. लेकिन इस पर राजनीति होना तो लाजमी था.
सोशल मीडिया पर इंदूराज और भुक्कल के बयान पर बीजेपी हुई सक्रिय: हरियाणा बीजेपी को दिए गए कांग्रेस के इस मौके को पार्टी अपने सोशल मीडिया पेज पर खूब भुना रही है. कई वीडियो इंदुराज नरवाल की हरकत को सिख और दलित विरोधी पार्टी नेता बता रहे हैं. तो वहीं गीता भुक्कल के बयान को पार्टी नेता ब्राह्मण विरोधी बता रहे हैं . ऐसा होना लाजमी है, जब राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को लेकर कांग्रेस बीजेपी को घेर रही है तो फिर बीजेपी भला इस मौके को कैसे छोड़ सकती है.
गीता भुक्कल और इंदुराज नरवाल की प्रतिक्रिया: गीता भुक्कल अपने बयान पर कहा कि "श्री गुरु राविदास जी की जयंती मनाने को लेकर एक संकल्प पत्र आया. जिस पर शुरू में ही कह दिया गया कि हम इसका पूरी तरह से समर्थन करते हैं. हमने यह भी जानना चाह कि क्या चुनाव की वजह से यह आप पंजाब, हरियाणा और यूपी में ले जा रहे हैं, क्योंकि संत शिरोमणि रविदास जी ने तो अच्छी शिक्षा की बात की, मीरा जी भी उनकी शिष्या थीं. उन्होंने महिला शिक्षा की बात की, उन्होंने असमानता खत्म करने की बात की, उन्होंने तो कहा कि मन चंगा तो कटौती में गंगा, ऐसा चहुं राज मैं जहां सभी को मिले अन्न, 650 साल बाद भी लोगों की मानसिकता बदली नहीं है. कोई भी व्यक्ति अपने कर्म से ऊंच या नीचा होता है, जन्म से नहीं होता." उन्होंने फिर सदन में दिए अपने व्यक्तव्य को दोहराया. हालांकि उन्होंने कहा कि "मैंने इस शब्द को वापस भी ले लिया. हमारे लिए ब्राह्मण समाज आदरणीय है पूजनीय हैं."
मैं इसलिए उनके हाथ से पोस्टर इसलिए छीन रहा था, क्योंकि लगातार हम जब बाहर से अंदर आ रहे थे. तभी हमारे ऊपर इन्होंने अत्याचार किया. यदि सदन में इस प्रकार के पोस्टर जरनैल सिंह दिखाएंगे, तो उनके ऊपर कारवाई हो जाएगी. इस डर के कारण मैंने इस प्रकार का पोस्टर लेने का काम किया, लेकिन मुझे नहीं पता था कि खुद बीजेपी के मंत्री ही उनको पोस्ट दे रहे हैं. खेल मंत्री गौरव गौतम ने उनको पोस्टर दिया तख्ती दी, तो खेल मंत्री के खिलाफ प्रस्ताव लाया जाना चाहिए था.
नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने क्या कहा? वहीं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने विधायकों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन के ओरांव समिति को दिए जाने और गीता भुक्कल की टिप्पणी पर कहा कि "विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने से कुछ नहीं होता, देखेंगे क्या है उनके पास, उनको साबित तो करना होगा. सोशल मीडिया पर चलने का क्या मतलब. वह तो कोई दूसरा भी चला लेता है. ये दलित विरोधी हैं, इनकी सोच सामने आ गई, गीता भुक्कल ने रविदास जी की वाणी पढ़ी, अपने मान से कुछ नहीं कहा, इनकी आवाज दबाने की कोशिश की गई." हालांकि जब सील गीता भुक्कल की टिपण्णी को सदन की कार्रवाई से हटाने पर सवाल हुआ तो उन्होंने उस पर कुछ सीधा जवाब नहीं दिया.
बीजेपी को मिला कांग्रेस पर हमला करने का मौका: सीएम नायब सैनी ने दोनों मामलों पर विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि "कांग्रेस ने विधानसभा की गरिमा को सदन के बाहर और अंदर भी तार तार करने का काम किया. सदन में एक सिख दलित जो खुद कांग्रेस के हैं. वे एक छोटी सी मांग पर्चा दिखाकर कर रहे थे बिना शोर शराबे के, लेकिन नेता प्रतिपक्ष के इशारे पर उनके लाडले विधायक इंदुराज नरवाल ने ऐसे छीन और सदन में अपमानजक ढंग से फेंक दिया. जिससे कानून और इंसानियत दोनों तार तार हुए हैं."
गीता भुक्कल की ब्राह्मणों पर टिप्पणी पर सीएम ने क्या कहा?
यह दुर्भाग्यपूर्ण है, हम संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महराज उनके 650 वें प्रकाश पर्व के परसतव पर चर्चा कर रहे थे, लेकिन इस तरह की टिपण्णी करना समाज के हित में नहीं है. हालांकि कहा भी गया यह विषय नहीं था, लेकिन ऐसी टिपण्णी नहीं की जानी चाहिए.
कैबिनेट मंत्री अरविंद शर्मा की प्रतिक्रिया: वहीं गीता भुक्कल की टिप्पणी पर कैबिनेट मंत्री अरविंद शर्मा कहते हैं कि "यह सब कहते हैं जन्म से नहीं कर्मों से आदमी को जाना जाता है. लेकिन किसी विशेष जाति के बारे में टिप्पणी करना उसकी हम सबने निंदा की, सदन ने भी माना, स्पीकर से उसे हटाया. सभी ने इसकी निंदा की. ऐसी बातें नहीं होनी चाहिए. ऐसा भाव नहीं आना चाहिए हम चर्चा किस बात की कर रहे हैं. कांग्रेस नैरेटिव सेट करना चाहती है. वह जोर लगाकर बातें कहते हैं. उसमें कोई दम नहीं होता."
गीता भुक्कल के बयान से खफा ब्राह्मण समाज: चरखी दादरी में ब्राह्मण गोधड़िया समाज के प्रधान राजकुमार वशिष्ठ ने वरिष्ठ प्रबुद्धजनों के साथ बैठक के बाद गीता भुक्कल के बयान पर तीखा पलटवार किया. प्रधान राजकुमार वशिष्ठ ने दो-टूक कहा कि "लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर विधानसभा जनता की समस्याओं, बिजली, पानी, सड़क और विकास कार्यों पर चर्चा के लिए है, न कि धर्म, शास्त्रार्थ और किसी समाज को नीचा दिखाने के लिए. गीता भुक्कल द्वारा सदन में चांडाल से ब्राह्मण की तुलना करना बेहद आपत्तिजनक और अक्षम्य है. यदि किसी को शास्त्रार्थ का शौक है, तो वह बाहर धर्मगुरुओं से करे." उन्होंने नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा और कांग्रेस पार्टी से मांग की कि वे इस अमर्यादित टिप्पणी पर सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगें.
क्या है सिख, दलित और ब्राह्मण को लेकर उठाए गए मुद्दे के हरियाणा और पंजाब के लिए सियासी मायने? बीजेपी कांग्रेस विधायकों के मुद्दों को ऐसे ही नहीं उठा रही है. इसके सियासी मायने हैं, हरियाणा के साथ साथ इसका असर अगले साल होने वाले पड़ोसी राज्य पंजाब पर भी पड़ सकता है. पहले हरियाणा के समीकरणों को समझते हैं, हरियाणा में सिख आबादी भले ही पांच से छह फीसद के करीब है, लेकिन दलित आबादी बाद करीब बीस फीसद है, वहीं ब्राह्मण आबादी दस फीसद के आस पास है. यानि इस आबादी का कुल 35 से 38 फीसद बनती है. जोकि किसी भी सियासी दल के लिए अहम हो जाती है. वहीं हरियाणा में 90 में से 17 सीटें दलितों के लिए आरक्षित है. जिसमें बीजेपी के आठ दलित विधायक हैं. ब्राह्मण सात विधायक बीजेपी के हैं. वहीं कांग्रेस के ब्राह्मण विधायक एक है, जबकि दलित नौ विधायक हैं. वहीं एक सिख प्रतिनिधि जनरैल सिंह हैं जो दलित भी है वे कांग्रेस के विधायक है. जबकि बीजेपी का कोई सिख विधायक नहीं है.
वहीं अगर पंजाब की बात करें तो पंजाब में देश के अन्य राज्यों के मुकाबले दलितों की आबादी सबसे ज्यादा 32 फीसद के करीब है. जबकि यहां पर आरक्षित सीटों की संख्या 117 विधानसभा सीटों में से 34 है. जोकि बहुत बड़ा आंकड़ा है. वहीं सिख आबादी की बात करें तो पंजाब में करीब 57 से 58 फीसदी के आस पास है. वहीं ब्राह्मण आबादी 10 से 12 फीसद के करीब है.
क्या कहते हैं राजनीति के जानकार? राजनीतिक मामलों के जानकार धीरेंद्र अवस्थी कहते हैं कि "किसी के भी जातिगत टिप्पणी करने को लेकर सियासत लाजमी है. जनरैल सिंह मामले में भले हो बीजेपी उसको मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही हो, लेकिन वह मामला किसी जातिगत टिप्पणी के दायरे में नहीं है, इसलिए इसका कोई ज्यादा राजनीतिक लाभ बीजेपी उठाना भी चाहे तो मिलना मुश्किल दिखता है. क्योंकि यह कांग्रेस के आंतरिक ज्यादा दिखाई देता है. वहीं गीता भुक्कल भले ही गुरु रविदास जी की वाणी सदन में उदाहरण के तौर पर कह रही थीं, लेकिन एक विधायक का नाम लेकर की गई टिप्पणी से वे खुद को बचा सकती थीं, भले ही उनका वह भाव नहीं रहा होगा, जो बीजेपी कह रही है. लेकिन ऐसे मामलों में सियासत होगी उससे इनकार नहीं किया जा सकता है. हालांकि इसका राजनीतिक असर की बड़ा होगा कहना जल्दबाजी होगी."
भारी ना पड़ जाए कांग्रेस की गलती? वहीं राजनीतिक विशेषज्ञ राजेश मोदगिल ने कहा "बीजेपी को एक मौका मिला है, जो कांग्रेस ने खुद दिया है. अभी जो राजनीतिक परिदृश्य देश में चल रहा है. उसमें यह बीजेपी को, कांग्रेस को काउंटर करने का हथियार दिख रहा है. लेकिन बीजेपी इन मामलों को आगे किस तरह से लेकर चलती है, क्या वह इस पर भविष्य में कोई बड़ा प्लान बना रही है, उस पर कहना मुश्किल है. लेकिन मौक़ा मिला है तो बीजेपी उसे चुकाना नहीं चाहती है. कांग्रेस को विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की नेता कुमारी सैलजा को लेकर उनकी पार्टी के कार्यकर्ता की गई टिप्पणी भी भारी पड़ गई थी. जिसको लेकर अकसर राजनीतिक गलियारों में चर्चा भी होती है, ऐसे में इस तरह के मामलों से कोई बड़ा असर नहीं होता कहना भी आसान नहीं है."