Transfer Order News Details: भ्रष्टाचार के मामलों में हरियाणा सरकार की ज़ीरो टॉलरेंस नीति, जानिए नए सरकारी आदेश की सभी खास बातें
हरियाणा सरकार ने राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति को और अधिक प्रभावी बनाते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की ओर से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों (Trapped) पकड़े जाने वाले सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को अब जमानत मिलने के बाद भी उसी पद या उसी स्टेशन (कार्यालय) पर काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे आरोपी कर्मचारियों को उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की जांच और अदालती मुकदमे की सुनवाई से संबंधित क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) से काफी दूर अनिवार्य रूप से स्थानांतरित किया जाएगा।
🛡️ शिकायतकर्ता और गवाहों की सुरक्षा के लिए लागू की गई नई व्यवस्था; निष्पक्ष जांच होगी सुनिश्चित
नियम लागू करने के मुख्य उद्देश्य:
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गवाहों पर दबाव रोकने की पहल: राज्य सरकार ने यह कड़ा कदम इसलिए उठाया है ताकि आरोपी अधिकारी या कर्मचारी अपनी ऊंची पहुंच, पद के प्रभाव अथवा स्थानीय संपर्कों का दुरुपयोग करके शिकायतकर्ता और अभियोजन पक्ष के गवाहों को डरा-धमका न सकें या उन्हें प्रभावित न कर सकें।
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निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया: सरकार का मानना है कि यदि ट्रैप केस में पकड़ा गया कर्मचारी जमानत पर रिहा होने के बाद भी उसी स्थान या पद पर तैनात रहता है जहां उसके खिलाफ मुकदमा चल रहा है, तो गवाहों को तोड़ने और सबूतों से छेड़छाड़ करने की प्रबल आशंका बनी रहती है। दूर स्थानांतरण होने से निष्पक्ष न्यायिक जांच प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सकेगी।
📜 मुख्य सचिव कार्यालय के विजिलेंस विभाग ने जारी किए सख्त आदेश; सभी विभागों में अनुपालन अनिवार्य
आदेश की प्रति और क्रियान्वयन से जुड़ी मुख्य बातें:
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सर्कुलर की तिथि व संख्या: इस संबंध में हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव कार्यालय के विजिलेंस विभाग ने 27 अक्टूबर 2026 को विस्तृत निर्देश पत्र जारी किए हैं।
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अधिकारियों को निर्देश: शासकीय पत्र क्रमांक 09/49/2025-6VI के माध्यम से प्रदेश के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, पुलिस महानिदेशक (DGP), छह मंडलों के मंडलायुक्तों, सभी जिला उपायुक्तों (DC), बोर्डों एवं निगमों के प्रबंध निदेशकों (MD) तथा मुख्य प्रशासकों को इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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उच्च न्यायालय और विश्वविद्यालयों को प्रति: इसके अलावा, पारदर्शिता और अनुपालन के दायरा को बढ़ाते हुए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों तथा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी इस आदेश की आधिकारिक प्रति अनुपालन हेतु भेजी गई है।