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Haryana Rajya Sabha Election 2026: शिमला में कांग्रेस विधायकों की 'किलेबंदी'; पेन प्रकरण और क्रॉस वोटिंग के डर से कुफरी में कड़ा पहरा

16 मार्च को होने वाले हरियाणा राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने विधायकों को शिमला (कुफरी) के ट्विन टावर होटल में शिफ्ट किया है। हिमाचल पुलिस और CID की सुरक्षा के बीच विधायकों को क्रॉस-वोटिंग से बचाने की कवायद जारी है। जानें क्या था 'पेन प्रकरण' जिसने कांग्रेस को पहले भी दिया था झटका।

 

चंडीगढ़: हरियाणा में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी ने अपने विधायकों को शिमला में ठहराया है। शिमला से लगभग 22 किलोमीटर दूर कुफरी के पास गलू स्थित ट्विन टावर होटल में जहां हरियाणा कांग्रेस के विधायकों को पूरी तरह हिमाचल पुलिस व सी आई डी के किले के रूप में तब्दील हो चुका है। होटल परिसर और आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सभी विधायकों को पुलिस निगरानी में रखा गया है तथा बिना अनुमति किसी भी व्यक्ति को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है। हिमाचल सरकार की ओर से इन्हें कड़ी सुरक्षा दी गई है।

हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कुफरी में इन दिनों हरियाणा की राजनीति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। आगामी राज्यसभा चुनावों को लेकर हरियाणा कांग्रेस के अधिकांश विधायक यहां ठहराए गए हैं और उनकी सुरक्षा तथा गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार इन विधायकों को संभावित क्रॉस-वोटिंग और राजनीतिक जोड़-तोड़ से बचाने के उद्देश्य से हिमाचल के इस सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। विधायकों की सुरक्षा के लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस, विशेष सुरक्षा बलों तथा सी आई डी के अधिकारियों को तैनात किया गया है। होटल परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, ताकि बाहरी राजनीतिक संपर्क सीमित रखा जा सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के दौरान विधायकों के वोट का गणित बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में राजनीतिक दल अक्सर अपने विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थानों पर रखते हैं, ताकि किसी प्रकार की टूट-फूट या क्रॉस-वोटिंग की संभावना कम की जा सके।

बताया जा रहा है कि विधायकों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। होटल में प्रवेश-निकास पर नियंत्रण रखा गया है और केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही मिलने की अनुमति है। सुरक्षा एजेंसियां यह सुनिश्चित कर रही हैं कि किसी भी तरह का बाहरी दबाव या राजनीतिक प्रभाव इन विधायकों तक न पहुंचे। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्यसभा चुनावों के दौरान कई राज्यों में क्रॉस-वोटिंग की घटनाएं सामने आई हैं। इसी अनुभव को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व इस बार अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए पूरी सावधानी बरत रहा है। कुल मिलाकर, कुफरी में हरियाणा कांग्रेस विधायकों की मौजूदगी और उन पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था यह संकेत देती है कि आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच रणनीतिक सतर्कता चरम पर है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह रणनीति चुनावी परिणामों को किस प्रकार प्रभावित करती है।

हरियाणा के राज्यसभा चुनावों का इतिहास कई बार अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़ा रहा है। विशेष रूप से “पेन प्रकरण”, क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक राजनीतिक चालों के कारण कांग्रेस के संभावित समीकरण कई बार बिगड़ते रहे हैं। इसी कारण अतीत में निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में सुभाष चंद्रा  और कार्तिकेय शर्मा  प्रत्याशी जीत दर्ज करने में सफल रहे। सबसे अधिक चर्चा वर्ष 2016 के हरियाणा राज्यसभा चुनाव के दौरान हुए “पेन प्रकरण” की रही। उस चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार वरिष्ठ अधिवक्ता आर के आनंद थे, जबकि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में सुभाष चंद्रा मैदान में थे। मतदान के दौरान एक कांग्रेस विधायक  ने कथित रूप से गलत पेन से मतदान कर दिया था, जिसके कारण उनका वोट अमान्य घोषित कर दिया गया। इस घटना को बाद में “पेन प्रकरण” के नाम से जाना गया। वोट निरस्त होने से कांग्रेस का गणित बिगड़ गया और अंततः सुभाष चंद्र को जीत मिल गई। उस समय कांग्रेस ने इसे अपनी बड़ी राजनीतिक चूक माना था।

इसी तरह वर्ष 2022 के राज्यसभा चुनाव में भी कांग्रेस को अप्रत्याशित झटका लगा। कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता अजय माकन को उम्मीदवार बनाया था, जबकि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में कार्तिकेय शर्मा  मैदान में थे। मतदान के दौरान कांग्रेस खेमे में क्रॉस वोटिंग और एक वोट के अमान्य होने की घटनाओं ने चुनावी समीकरण बदल दिए। परिणामस्वरूप कार्तिकेय शर्मा विजयी रहे और कांग्रेस की संभावित जीत हार में बदल गई। लगातार दो राज्यसभा चुनावों में इस प्रकार के घटनाक्रमों ने कांग्रेस संगठन को गंभीर राजनीतिक सबक दिया है। पेन प्रकरण और क्रॉस वोटिंग के कारण सीट हाथ से निकलने के बाद अब कांग्रेस नेतृत्व अधिक सतर्क नजर आ रहा है। यही कारण है कि इस बार राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने और मतदान प्रक्रिया को लेकर विशेष सावधानी बरत रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अतीत के अनुभवों को देखते हुए कांग्रेस इस बार किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतना चाहती। विधायकों को मतदान की प्रक्रिया समझाने, उन्हें एक साथ रखने और रणनीतिक रूप से प्रबंधन करने की कोशिशें की जा रही हैं, ताकि पेन प्रकरण या क्रॉस वोटिंग जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। स्पष्ट है कि हरियाणा के राज्यसभा चुनाव केवल संख्या बल का मामला नहीं रहे, बल्कि यह राजनीतिक अनुशासन, रणनीति और प्रबंधन की भी परीक्षा बन चुके हैं। यही वजह है कि कांग्रेस खेमा इस बार पूरी तरह चौकन्ना और सतर्क दिखाई दे रहा है।