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Yamuna Rejuvenation: हरियाणा में यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए कड़ा एक्शन; 11 प्रमुख नालों की निगरानी के लिए कमेटियां गठित, STP क्षमता बढ़ाने पर जोर

हरियाणा सरकार यमुना नदी में गिर रहे 11 प्रमुख नालों की निगरानी के लिए मंडल आयुक्तों की अध्यक्षता में कमेटियां बनाएगी। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने 1632 MLD अपशिष्ट जल के उपचार और नए STP स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। जानें क्या है यमुना को साफ करने का मास्टर प्लान।

 

चंडीगढ़। हरियाणा में यमुना नदी को स्वच्छ बनाने के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वीरवार को समीक्षा बैठक में निर्देश दिया कि यमुना में मिलने वाले सभी 11 प्रमुख नालों की निगरानी के लिए मंडल आयुक्तों की अध्यक्षता में अलग-अलग समितियों का गठन किया जाए।

इनमें संबंधित सभी विभागों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। ये समितियां हर 15 दिन में बैठक कर अपनी रिपोर्ट हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष को प्रस्तुत करेंगी। बैठक में बताया गया कि इन नालों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 1632 एमएलडी अपशिष्ट जल प्रवाहित होता है।

इसमें से करीब 1000 एमएलडी जल का उपचार किया जा रहा है। प्रदूषण के स्तर में निरंतर कमी सुनिश्चित करने के लिए सभी नालों में जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जा रही है। यमुना कैचमेंट क्षेत्र में सीवेज उपचार क्षमता के विस्तार के लिए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर कार्य शुरू किया है।

वर्तमान में हरियाणा में 91 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) कार्यरत हैं, जिनकी कुल क्षमता 1543 एमएलडी है। इसके अतिरिक्त 88 एमएलडी क्षमता के 3 एसटीपी निर्माणाधीन हैं, जिन्हें मार्च 2027 तक पूरा किए जाने की संभावना है। वहीं 227 एमएलडी क्षमता के 9 एसटीपी का उन्नयन किया जा रहा है और 510 एमएलडी क्षमता के 9 नए एसटीपी स्थापित करने का प्रस्ताव है।

कार्ययोजना की समीक्षा की

बैठक में विभिन्न नालों के लिए तैयार की गई कार्ययोजना की भी समीक्षा की गई। इनमें धनौरा एस्केप, ड्रेन नंबर-2, ड्रेन नंबर-6, मुंगेशपुर ड्रेन, केसीबी ड्रेन, ड्रेन नंबर-8, लेग-1, लेग-2, लेग-3, बुढ़िया नाला और गौंची ड्रेन शामिल हैं। इन नालों से बिना उपचारित जल को यमुना में जाने से रोकने के लिए बड़े स्तर पर सीवर टैपिंग का कार्य किया जा रहा है।

साथ ही यमुनानगर में 77 एमएलडी क्षमता का एसटीपी, रोहतक में प्रस्तावित 60 एमएलडी का एसटीपी और गुरुग्राम में प्रस्तावित 100 एमएलडी का एसटीपी स्थापित होने से आने वाले वर्षों में प्रदूषण भार को और कम करने में सहायता मिलेगी।