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UP Election 2027: वाराणसी में राजभर और निषाद पार्टी का शक्ति प्रदर्शन, 26 अप्रैल को बड़ी रैली

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए वाराणसी में सुभासपा और निषाद पार्टी दिखाएंगी ताकत। एससी-एसटी आरक्षण के मुद्दे पर पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र से भरी जाएगी हुंकार।

 

उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारी शुरू कर दी है. इसी क्रम में 26 अप्रैल को वाराणसी में सुभासपा और निषाद पार्टी अपने ताकत का प्रदर्शन करने जा रहे हैं. निषाद पार्टी कटिंग मेमोरियल में जबकि ओमप्रकाश राजभर पिंडरा स्थित नेशनल इंटर कॉलेज में इसी दिन अपनी अपनी जनसभा करेंगे. निषाद पार्टी के प्रमुख डॉक्टर संजय निषाद इस जनसभा के लिए वाराणसी में कैंप किए हुए हैं. साथ ही पूर्वांचल के सभी जिलों से अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट कर इस जनसभा को सफल बनाने के लिए दिन रात एक किए हैं.

डॉक्टर संजय निषाद ने कहा कि पहले अंग्रेजों ने फिर कांग्रेस ने और उसके बाद बसपा और सपा ने निषाद समाज से उनका हक अधिकार छीना और हमारे समाज को गरीबी और गुरबत में धकेलते रहें. अब हम लोगों को पीएम मोदी से ही उम्मीद है कि वो हमारी सुनेंगे. एससी रिजर्वेशन सहित हमारे कई मुद्दे हैं जिसको हम इस जनसभा के माध्यम से उठाएंगे. प्रधानमंत्री हमारी सुनें, इसीलिए हम उनके संसदीय क्षेत्र में ये जनसभा करने जा रहे हैं. निषाद पार्टी इस जनसभा के जरिए अपनी ताकत दिखाएगा और इसके लिए गोरखपुर से लेकर बलिया तक के नेताओं और कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई गई है.

इसी दिन ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा भी अपनी जनसभा करने जा रहा है. पहले ये जनसभा 19 तारीख को होनी थी लेकिन फिर अचानक से इसको 26 तारीख को तय कर दिया गया. सुभासपा के जिलाध्यक्ष उमेश राजभर ने कहा कि वाराणसी से ही हमने एसटी रिजर्वेशन का मुद्दा उठाया था, इसलिए इस जनसभा के लिए वाराणसी को ही चुना. इस जनसभा के माध्यम से हम अपने समाज के मुद्दे को उठाएंगे. जनसभा में एसटी रिजर्वेशन का मुद्दा सबसे ऊपर होगा. इसके लिए आजमगढ़ से बनारस तक के हजारों कार्यकर्ता उत्साहित हैं और ये ऐतिहासिक जनसभा होगी.

निषाद और राजभर अगर ये न करें तो क्या करें?

माना जा रहा है कि 19 अप्रैल को हमारे नेता अरविंद राजभर इस दिन वाराणसी आएंगे और तैयारियों का जायजा लेंगे. राजनीतिक विश्लेषक विजय नारायण कहते हैं कि ‘संजय निषाद और ओमप्रकाश राजभर अगर ये न करें तो क्या करें? ‘वो ये बात समझते हैं कि अगर वो ताकत नही दिखाएंगे तो बड़े दल उनको खा जाएंगे. यूपी और बिहार इन दोनों स्टेट में यही स्थिति है. और ऊपर से इनका चुनावी सीन भी आ रहा है तो इनके लिए अब जरूरी है कि ये अपनी ताकत दिखाएं.

ताकत के ही जरिए सीटों की होगी बार्गेनिंग

विजय नारायण कहते हैं कि इस ताकत के ही जरिए फिर सीटों की बार्गेनिंग होगी. बनारस में ताकत दिखाएंगे तो दिल्ली में चर्चा होगी. जहां से 2027 में गठबंधन को अंतिम रुप दिया जाएगा. जातीय राजनीति की उपज पार्टियों की एक ही थ्योरी होती है. वो ये कि अपनी जाति के संख्या बल पर जनसभा के माध्यम से अपनी राजनैतिक ताकत दिखाना. इसलिए दोनों नेताओं की जनसभा में उनकी अपनी जाति और उसके समूह से जुड़े मुद्दे ही प्रमुख रूप से उठेंगे. अपने समाज को भी मैसेज देना है और समाज के बल पर ज्यादा से ज्यादा सीटों पर गठबंधन भी करना है. ये विशुद्ध रूप से पॉलिटिकल बार्गेनिंग का तरीका है.