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Bihar Politics: अमित शाह से मिले उपेंद्र कुशवाहा; राज्यसभा सीट और बेटे के लिए MLC पद पर फंसा पेंच, क्या BJP में होगा RLM का विलय?

बिहार में राज्यसभा चुनाव से पहले सियासत तेज! उपेंद्र कुशवाहा ने दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात कर राज्यसभा और बेटे के लिए MLC सीट की मांग की है। क्या कुशवाहा अपनी पार्टी 'राष्ट्रीय लोक मोर्चा' का बीजेपी में विलय करेंगे? जानें बीजेपी की शर्तें और संभावित सियासी समीकरण।

 

बिहार में आरएलएम चीफ उपेंद्र कुशवाहा अपने लिए राज्यसभा सीट और बेटे को एमएलसी बनाने के लिए बीजेपी के आलाकमान से लगातार बात कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि सोमवार देर रात भी उपेंद्र कुशवाहा ने दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितित नबीन से मुलाकात की है. ये मुलाकात अमित शाह के आवास पर हुई.

सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात के दौरान राज्यसभा चुनाव को लेकर चर्चा हुई थी. दरअसल उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा जाना चाहते हैं. साथ ही अपने बेटे दीपक प्रकाश के लिए एमएलसी की सीट भी चाहते हैं. क्योंकि बीजेपी ने विधानसभा चुनाव के दौरान इसका वादा किया था. वहीं, पहले बताया जा रहा है कि कुशवाहा अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) का विलय बीजेपी में करना चाह रहे हैं, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है. क्योेंकि कुशवाहा अपनी पार्टी के ही सिंबल पर ही राज्यसभा जाना चाहते हैं.

हालांकि उपेंद्र कुशवाहा को विलय का प्रस्ताव बिहार बीजेपी के एक बड़े नेता की तरफ से दिया गया था. लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए कुशवाहा अभी बीजेपी में अपनी पार्टी का विलय नहीं चाहते हैं. सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को उपेंद्र की पार्टी को विलय को लेकर भी बीजेपी नेताओं से बात हुई है. हालांकि उपेंद्र अभी तक इस पर कुछ नहीं बोले हैं. माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव के बाद उपेंद्र अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय कर सकते हैं.

उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के सिर्फ 4 विधायक

उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) पार्टी के सिर्फ 4 विधायक हैं. इतनी छोटी संख्या के सहारे उनका फिर राज्यसभा जाना संभव नहीं. कोइरी वोटरों पर उनका अच्छा प्रभाव है. चर्चा है कि भाजपा उन्हें राज्यसभा भेज सकती है, लेकिन इसके लिए उसकी कुछ शर्तें हैं. अव्वल यह कि कुशवाहा अपनी पार्टी का विलय कर भाजपा का बन जाएं. इससे उन्हें दोबारा राज्यसभा जाने का मौका तो मिल ही जाएगा, उनकी पार्टी के नाराज विधायकों को भाजपा अपने कोटे से मंत्रिमंडल में एकोमोडेट कर सकती है.

बीजेपी की शर्त मानी तो केंद्र में मंत्री बन सकते हैं

बताया जा रहा है कि भाजपा को इसका प्रत्यक्ष लाभ यह होगा कि बिहार में उसके विधायकों की संख्या 89 से बढ़ कर 93 हो जाएगी और राज्यसभा में उसके सांसदों की संख्या भी बढ़ जाएगी. उन्हें केंद्र में मंत्री भी बनाया जा सकता है. जानकारी तो यह भी मिल रही है कि भाजपा ने अपना प्रस्ताव कुशवाहा के सामने रख दिया है. अब उनके ऊपर है कि वे क्या करते हैं. इस पर अभी तक बीजेपी की तरफ से कोई बयान नहीं आया है. न ही उपेंद्र कुशवाहा ने इस पर कोई प्रतिक्रिया दी है.