अधिकमास कालाष्टमी 2026: 3 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त व पूजा विधि
हिंदू धर्म में कालाष्टमी के व्रत का एक विशेष और बहुत बड़ा महत्व माना गया है. हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली कालाष्टमी भगवान शिव के सबसे रौद्र स्वरूप, यानी भगवान काल भैरव को समर्पित होती है. काल भैरव को समय, न्याय और सुरक्षा का अधिष्ठाता देवता माना जाता है. लेकिन, इस साल जून के महीने में आने वाली कालाष्टमी कोई आम कालाष्टमी नहीं है. इस बार एक ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है जो पूरे तीन साल बाद आता है. आइए जानते हैं कि इस बार की कालाष्टमी क्यों इतनी खास है, इसका शुभ मुहूर्त क्या है और इस दिन पूजा करने से आपको क्या लाभ मिल सकते हैं.
अधिकमास की कालाष्टमी क्यों मानी जाती है विशेष?
कालाष्टमी भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काल भैरव को समय, न्याय और सुरक्षा का देवता माना जाता है. वे अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायता करते हैं. इस साल कालाष्टमी का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि यह ज्येष्ठ अधिकमास में पड़ रही है. अधिकमास का संयोग लगभग हर तीन साल में एक बार आता है. ऐसे में इस दौरान किए गए जप, तप, दान, व्रत और पूजा-पाठ का फल कई गुना अधिक प्राप्त होने की मान्यता है. यही कारण है कि श्रद्धालु इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और काल भैरव की आराधना करते हैं.
अधिकमास कालाष्टमी 2026 की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 8 जून 2026, सोमवार को सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर शुरू होगी और 9 जून 2026, मंगलवार को सुबह 3 बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगी. हालांकि व्रत और पूजा के लिए उदया तिथि तथा प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है. इसी कारण अधिकमास कालाष्टमी का व्रत और पूजा 8 जून 2026, सोमवार को की जाएगी.
कालाष्टमी के दिन कैसे करें पूजा?
कालाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद भगवान शिव और काल भैरव का ध्यान करें. मंदिर या पूजा स्थल पर दीपक जलाएं और काल भैरव को फूल, धूप, फल तथा मिठाई अर्पित करें. इस दिन ओम कालभैरवाय नमः मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है. कई श्रद्धालु इस खास दिनभर व्रत रखकर रात में विशेष पूजा भी करते हैं.
कालाष्टमी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी का व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन से भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. साथ ही मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मकता में वृद्धि होती है. माना जाता है कि सच्चे मन से काल भैरव की आराधना करने वाले भक्तों को विशेष कृपा प्राप्त होती है और उनके रुके हुए कामो में भी सफलता मिलने लगती है.