Aja Ekadashi Vrat Rules: कब है अजा एकादशी और क्या है व्रत का पारण समय? जानें भगवान विष्णु की पूजा के खास नियम
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है. साल में आने वाली सभी एकादशियों में अजा एकादशी भी बेहद महत्वपूर्ण मानी गई है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और भक्त को भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ व्रत के नियमों का पालन करना भी जरूरी माना जाता है. कई बार लोग पूजा के दौरान अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनसे व्रत का पूरा लाभ नहीं मिल पाता. ऐसे में आइए जानते हैं अजा एकादशी की तिथि, पूजा विधि और किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
अजा एकादशी 2026 व्रत की तिथि
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि का प्रारंभ 6 सितंबर 2026 को शाम 7 बजकर 29 मिनट पर होगा. वहीं, इसका समापन 7 सितंबर 2026 को शाम 5 बजकर 3 मिनट पर होगा. चूंकि 7 सितंबर को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए उदया तिथि के आधार पर अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को ही रखा जाएगा.
अजा एकादशी की पूजा कैसे करें?
अजा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं. पूजा शुरू करने से पहले व्रत का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद भगवान विष्णु को पीले फूल, फल, तुलसी दल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें. भगवान विष्णु को तुलसी बेहद प्रिय मानी जाती है, इसलिए पूजा में तुलसी दल का इस्तेमाल विशेष रूप से किया जाता है. इसके बाद विष्णु मंत्र का जाप करें और भगवान विष्णु की आरती करें.
अजा एकादशी की पूजा में न करें ये गलतियां!
तुलसी के बिना पूजा न करें
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व माना गया है. इसलिए पूजा के दौरान तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना जाता है. इसलिए पूजा में तुलसी दल को जरूर शामिल करें.
चावल का सेवन न करें
एकादशी व्रत में चावल का सेवन करने की मनाही मानी जाती है. इसलिए व्रत रखने वाले व्यक्ति को चावल से बनी चीजों से परहेज करना चाहिए.
पूजा में तामसिक चीजों से बचें
अजा एकादशी के दिन सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है. मांसाहार, शराब, प्याज-लहसुन और बाकी तामसिक चीजों से दूरी बनाकर रखना चाहिए.
किसी का अपमान या क्रोध न करें
एकादशी केवल खान-पान से जुड़ा व्रत नहीं है. इस दिन व्यक्ति को अपने व्यवहार पर भी नियंत्रण रखना चाहिए. किसी से विवाद करना, झूठ बोलना, अपशब्द कहना या किसी का अपमान करना पूजा का फल नष्ट कर सकता है.
अजा एकादशी पर क्या करें?
अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का स्मरण करना शुभ माना जाता है. सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल पर दीपक जलाएं और भगवान विष्णु को पीले फूल, फल और तुलसी अर्पित करें. दिनभर भगवान विष्णु के नाम का जाप करें. जरूरतमंद लोगों को भोजन, फल, कपड़े या अन्य जरूरी सामान का दान करना भी शुभ माना जाता है.
कब होगा व्रत का पारण?
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है. इसलिए व्रत रखने वाले भक्तों को अगले दिन यानी द्वादशी के दिन पंचांग में दिए गए पारण समय के अनुसार व्रत खोलना चाहिए. पारण के समय भगवान विष्णु को याद करके सात्विक भोजन ग्रहण करना शुभ माना जाता है.