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Ganeshotsav Vastu Guidelines: बप्पा की मूर्ति रखते समय न करें ये गलती, जानिए पीठ और मुख से जुड़े वास्तु के जरूरी नियम

गणेशोत्सव 2026 की शुरुआत 14 सितंबर से। जानिए घर में गणपति स्थापना की सही दिशा, मूर्ति के नियम और वास्तु टिप्स।
 

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होने वाला गणेशोत्सव हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण त्योहारों में एक हैं. भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और विघ्नहर्ता का दर्जा प्राप्त है, इसलिए उनके जन्मोत्सव के इस पावन अवसर पर भक्त उन्हें बेहद प्रेम और श्रद्धा के साथ अपने घरों में विराजमान करते हैं. इस साल 2026 में गणेशोत्सव 14 सितंबर से शुरू हो रहा है, जिसका समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ होगा. यदि आप भी इस बार अपने घर में बप्पा की प्रतिमा स्थापित करने जा रहे हैं, तो केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि वास्तु शास्त्र के नियमों का सही पालन करना भी बेहद जरूरी है. इसलिए आइए जानते हैं गणपति की स्थापना किस दिशा में करनी चाहिए, प्रतिमा की पीठ का क्या रहस्य है और स्थापना से लेकर विसर्जन तक किन-किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है.

गणेश जी की मूर्ति के लिए कौन सी दिशा सबसे शुभ?

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करने के लिए उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को सबसे शुभ और पवित्र माना जाता है. यह दिशा पूजा-पाठ और आध्यात्मिक कामों के लिए विशेष मानी जाती है. अगर घर में ईशान कोण में पर्याप्त जगह नहीं है तो गणपति की मूर्ति को उत्तर या पश्चिम दिशा में भी स्थापित किया जा सकता है.

गणपति बप्पा का मुख किस दिशा में होना चाहिए?

गणेश जी की मूर्ति स्थापित करते समय उनके मुख की दिशा का भी ध्यान रखा जाता है. मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश का मुख घर के अंदर की ओर होना चाहिए, ताकि पूजा करने वाले व्यक्ति को उनका सम्मुख भाग दिखाई दे. वहीं गणपति बप्पा की पीठ घर के बाहर की तरफ यानी दीवार की ओर होनी चाहिए. धार्मिक मान्यता में गणेश जी की पीठ को लेकर विशेष धारणा है. माना जाता है कि उनकी पीठ की ओर दरिद्रता का वास होता है, जबकि उनके सम्मुख भाग में सुख-समृद्धि का वास माना जाता है. इसी वजह से गणेश जी की मूर्ति को इस तरह रखने की परंपरा है कि उनकी पीठ मुख्य कमरे या घर के खुले हिस्से की तरफ न हो.

गणेश जी की मूर्ति कहां नहीं रखनी चाहिए?

गणपति की मूर्ति को घर में स्थापित करते समय स्थान का भी ध्यान रखना चाहिए. पूजा के लिए चुनी गई जगह साफ और पवित्र होनी चाहिए. गणेश जी की मूर्ति को सीधे जमीन पर रखने के बजाय किसी साफ चौकी या पाटे पर स्थापित करना सही माना जाता है.

कैसी हो गणपति की मूर्ति?

गणेश चतुर्थी पर घर में स्थापित की जाने वाली मूर्ति को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं हैं. आमतौर पर लोग मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा को ही घर पर लाते हैं, क्योंकि गणेशोत्सव के बाद उसका विसर्जन आसानी से किया जा सकता है.

स्थापना के समय इन बातों का रखें ध्यान

गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनने के बाद पूजा स्थल को साफ किया जाता है. इसके बाद चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित की जाती है. गणेश जी को दूर्वा, मोदक और फूल अर्पित किए जाते हैं. पूजा के दौरान भगवान गणेश का ध्यान करके उनका आह्वान किया जाता है और विधि-विधान से पूजा की जाती है. गणपति स्थापना के बाद रोजाना सुबह-शाम आरती करना और भोग लगाना शुभ माना जाता है. साथ ही घर में जितने दिन गणपति विराजमान रहें, उतने दिन पूजा स्थल की साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए.