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Karwa Chauth 2026: करवा चौथ पर क्यों बदला जाता है करवा? जानिए इस परंपरा का महत्व और सही नियम

करवा चौथ पर सुहागिन महिलाओं के बीच करवा बदलने की परंपरा का विशेष महत्व है। जानिए यह रस्म क्यों निभाई जाती है और इसके क्या नियम हैं।

 

हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे बड़े और पवित्र व्रतों में से एक माना जाता है। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। करवा चौथ की पूजा से जुड़ी कई ऐसी परंपराएं हैं, जिनका गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इनमें से ही एक प्रमुख परंपरा है आपस में करवा बदलना या करवा फेरना, जो आपसी प्रेम और अखंड सौभाग्य की कामना का प्रतीक है।

🤝 करवा चौथ पर करवा बदलने की परंपरा: जानिए इसका धार्मिक महत्व और इस दौरान ध्यान रखने योग्य जरूरी नियम

करवा चौथ की पूजा के दौरान सुहागिन महिलाओं का आपस में करवा बदलना आपसी सौहार्द, सम्मान और मंगलकामना को दर्शाता है। इस रस्म के जरिए महिलाएं एक-दूसरे के सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। करवा बदलते समय कुछ खास नियमों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे- पूजा या कथा के दौरान ही यह रस्म निभाएं, करवा पूरी तरह साफ और पूजा योग्य हो, और इसे पूरे श्रद्धाभाव के साथ पूरा करें। कई परिवारों में करवे के साथ फल, मिठाई या दक्षिणा देने का भी रिवाज है। हालांकि, यह परंपरा हर जगह अनिवार्य नहीं होती है, जिन परिवारों में यह रीति है वे इसे श्रद्धा से निभाते हैं और जहां नहीं है, वहां इसके बिना भी व्रत संपन्न किया जाता है।