किन्नर कैलाश यात्रा विवाद: ग्रामीणों की मांग, पूरी तरह बंद हो यात्रा
हिमाचल के किन्नौर में किन्नर कैलाश यात्रा को बंद करने की मांग तेज। ग्रामीणों और देव समाज ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, पर्यावरण और धार्मिक नियमों के उल्लंघन का आरोप।
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में प्रसिद्ध ‘किन्नर कैलाश यात्रा’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. टुकपा-खुनाग क्षेत्र की कई पंचायतों के ग्रामीणों और स्थानीय देव समाज से जुड़े सैकड़ों लोगों ने जिला मुख्यालय रिकांगपिओ में एक विशाल आक्रोश रैली निकाली. प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त (DC) किन्नौर को एक ज्ञापन सौंपकर इस धार्मिक यात्रा को पूरी तरह और हमेशा के लिए बंद करने की मांग की है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि चोरी-छिपे यात्रा करने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.
स्थानीय निवासियों और देव समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि उनका यह विरोध किसी की व्यक्तिगत या धार्मिक आस्था के खिलाफ नहीं है. उनके विरोध के मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं. स्थानीय निवासी राम लाल नेगी ने बताया कि पोवारी और रिब्बा सहित क्षेत्र के कई गांवों के कुल देवताओं ने ‘देववाणी’ (गुर के माध्यम से देवताओं के संदेश) के जरिए किन्नर कैलाश यात्रा को पूर्ण रूप से बंद करने के सख्त आदेश दिए हैं. देव समाज के अनुसार, इन आदेशों का उल्लंघन करना स्थानीय परंपराओं और धार्मिक मर्यादा के खिलाफ है.
पर्यावरण और जल स्रोतों को भारी नुकसान
ग्रामीणों का आरोप है कि यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में बाहरी श्रद्धालुओं के पहुंचने से इस अत्यंत पवित्र और संवेदनशील स्थल पर भारी गंदगी फैल रही है. यात्रियों द्वारा छोड़े जा रहे कचरे से पहाड़ों के प्राकृतिक जल स्रोत दूषित हो रहे हैं. इसके अलावा, ऊंचाई पर पाई जाने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटियों और वनस्पतियों को भी नुकसान पहुंच रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ रहा है.
स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं की अनदेखी
प्रदर्शन में शामिल जिया लाल नेगी, ज्ञान देवी और स्नेह नेगी ने कहा कि यात्रा के दौरान बाहरी लोगों द्वारा स्थानीय देव परंपराओं और पवित्र नियमों की अनदेखी की जा रही है. इससे किन्नौर की मूल सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक पवित्रता पर ठेस पहुंच रही है.
प्रशासनिक रोक के बावजूद चोरी-छिपे यात्रा करने पर आक्रोश
ग्रामीणों का सबसे बड़ा गुस्सा इस बात को लेकर है कि नियमों को ताक पर रखकर लोग अब भी यात्रा कर रहे हैं. क्षेत्र में लगातार हो रहे भूस्खलन और ग्लेशियर टूटने के खतरों को देखते हुए किन्नौर प्रशासन ने पहले ही इस यात्रा को अगले आदेश तक स्थगित कर रखा है. ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी रोक के बावजूद कुछ असामाजिक तत्व और श्रद्धालु चोरी-छिपे व अवैध रास्तों से यात्रा कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रशासन इसे रोकने में पूरी तरह विफल रहा है, जिससे देव समाज में भारी नाराजगी है.
क्या है किन्नर कैलाश और इसका धार्मिक महत्व?
किन्नर कैलाश हिमाचल प्रदेश के सबसे दुर्गम और पवित्र चोटियों में से एक है, जिससे हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों की आस्था जुड़ी है. समुद्र तल से लगभग 4,800 मीटर (करीब 15,700 फीट) की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित इस पर्वत शिखर पर एक विशाल प्राकृतिक शिलाखंड है, जिसे भगवान शिव का स्वरूप (शिवलिंग) माना जाता है. यह शिवलिंग करीब 79 फीट ऊंचा है. यह यात्रा सामान्यतः हर साल जुलाई से अगस्त के बीच आयोजित होती है. इसका मुख्य मार्ग कल्पा के पास टांगलिंग गांव से शुरू होता है. यह देश के सबसे कठिन ट्रेक में से एक माना जाता है, जिसमें श्रद्धालुओं को लगभग 18 से 20 किलोमीटर की सीधी और जोखिमभरी खड़ी चढ़ाई पूरी करनी होती है.