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Mahalaxmi Vrat Vidhi: आर्थिक तंगी दूर करने के लिए करें महालक्ष्मी व्रत, जानिए व्रत रखने के सही नियम और सावधानियां

19 सितंबर से शुरू महालक्ष्मी व्रत के नियम। जानिए 16 दिनों का यह उपवास किसे रखना चाहिए और किन्हें इससे बचना चाहिए।
 

महालक्ष्मी व्रत 19 सितंबर से शुरू हुआ जो कि 3 अक्टूबर तक रखा जाएगा. लेकिन क्या ये 16 दिन का व्रत हर कोई कर सकता है? आइए जानें किन लोगों को उपवास से बचना चाहिए. मां लक्ष्मी को धन, वैभव, सुख और समृद्धि की देवी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-शांति और बरकत बनी रहती है. यही वजह है कि भक्त मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग व्रत और पूजा करते हैं.

इन्हीं में से एक है महालक्ष्मी व्रत, जो परंपरागत रूप से 16 दिनों तक चलता है. ये व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होकर आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि तक चलता है. लेकिन क्या आपको पता है कि इस व्रत को कौन रख सकता है और किन लोगों को इसे करने से बचना चाहिए?

महालक्ष्मी व्रत कौन कर सकता है?

महालक्ष्मी व्रत स्त्री और पुरुष, दोनों में से कोई भी रख सकता है. जो व्यक्ति माता लक्ष्मी की कृपा, परिवार की सुख-समृद्धि और घर में बरकत की कामना करता है, वह श्रद्धा के साथ यह व्रत कर सकता है.

महालक्ष्मी व्रत किसे रखना चाहिए?

  • गृहणी और परिवार के सदस्य:- घर की महिलाएं या परिवार का कोई भी सदस्य, जो घर में सुख-शांति, वैभव और समृद्धि की कामना करता है, यह व्रत रख सकता है.
  • आर्थिक तंगी से परेशान लोग:- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों पर कर्ज का बोझ हो, व्यापार में घाटा हो रहा हो या घर में धन नहीं टिकता हो, उनके लिए महालक्ष्मी व्रत फलदायी माना जाता है.
  • श्रद्धालु भक्त:- मां लक्ष्मी के वो भक्त, जो 16 दिनों तक श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा-अर्चना कर सकते हैं, ये व्रत रख सकते हैं.

महालक्ष्मी व्रत कब नहीं करना चाहिए?

सूतक या अशौच काल में:- अगर घर में किसी की मृत्यु का सूतक या जन्म का अशौच चल रहा हो, तो इस अवधि में महालक्ष्मी व्रत या कलश स्थापना शुरू करने से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा और धार्मिक जानकार की सलाह लेनी चाहिए.

स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर:- महालक्ष्मी व्रत में कई लोग 16 दिनों तक अन्न का त्याग करके फलाहार या एक समय सात्विक भोजन करते हैं. गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों, गर्भवती महिलाओं या ऐसे व्यक्तियों को, जिन्हें उपवास से स्वास्थ्य संबंधी नुकसान हो सकता है, कठिन व्रत नहीं रखना चाहिए.

16 दिन का व्रत नहीं कर सकते तो क्या करें?

अगर कोई व्यक्ति लगातार 16 दिनों तक कठिन उपवास या नियमों का पालन नहीं कर सकता, तो वह अपनी श्रद्धा के अनुसार मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना, मंत्र जाप या अंतिम दिन या 3 दिन का व्रत कर सकता है.

महालक्ष्मी व्रत नियम

कलाई पर डोरा:- व्रत के पहले दिन 16 गांठों वाला पवित्र धागा (डोरा) बनाया जाता है, जिसे पुरुष अपनी दाहिनी कलाई पर और महिलाएं अपनी बाईं कलाई पर बांधती हैं.

सात्विकता:- 16 दिनों तक चलने वाले इस व्रत में शुद्धता, सात्विक भोजन या फलाहार का पालन करना होता है.

खानपान:- इन 16 दिनों में सामान्य अन्न का सेवन नहीं किया जाता है. इसमें फलाहार या एक समय मीठा भोजन करने का विधान है.

पूजा:- इन दिनों में सुबह और शाम दोनों समय विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है.