Shani Sade Sati: शनि की साढ़ेसाती से मुक्ति के अचूक उपाय और महामंत्र
हिंदू धर्म शास्त्रों में शनि देव को कर्मों का फल देने वाला देवता और न्यायाधीश कहा कहा गया है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि को नव ग्रहों में सबसे महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है. ग्रहों में शनि सबसे धीमी चाल चलते हैं. शनि लोगों को उनके कर्म अनुसार ही फल देते हैं. लोगों को शनि देव की साढ़ेसाती का भय सबसे ज्यादा होता है, क्योंकि यही वो समय होता है जब शनि कर्मों का हिसाब देते हैं. इस दौरान शनि जीवन की कई सीख देते हैं. साढ़ेसाती के दौरान लोगों पर दुखों के पहाड़ टूटते हैं. जीवन में कई आर्थिक परेशानियां आती हैं.
यही सब कारण हैं कि लोगों को शनि की साढ़ेसाती का भय सताता है. शनि की साढ़ेसाती तीन चरणों में साढ़े सात चलती है, लेकिन शनिवार के दिन शनि देव की पूजा और व्रत करने से शनि प्रसन्न होते हैं और साढ़ेसाती के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है. शनिवार का दिन धर्म शास्त्रों में शनि देव को समर्पित किया गया है. इस दिन साढ़ेसाती के लिए पूजा और व्रत के साथ-साथ विशेष उपाय भी किए जाते हैं. शनि के कुछ विशेष मंत्र भी हैं, जिनका जाप करने से भी साढ़ेसाती का प्रकोप कम होता है. ढेय्या से भी राहत मिलती है.
साढ़ेसाती से राहत पाने के लिए मंत्र
ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।संयोरभिश्रवन्तु न:। ऊँ शं शनैश्चराय नमः।।
ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसंभूतं तं नमामिशानश्चराम।।
ॐ शन्नोदेवीरभिस्ताय आपो भवन्तु पीतये
शनयोरभिस्रवन्तु नः, ॐ समं शनैश्चराय नमः।
ॐ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजं
छायामार्तण्डसंभूतं तम नमामि शनैश्चरम।
ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुक मिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात्।।
मान्यता का इन मंत्रों का जाप करने से शनि की साढ़ेसाती का प्रकोप कम होता है.
शनि देव के अन्य मंत्र
शनि बीज मंत्र: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनका ये बीज मंत्र को सबसे शक्तिशाली माना जाता है. इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मन को स्थिरता आती है.
शनि मूल मंत्र: ॐ शं शनैश्चराय नमः।
स छोटे मंत्र का प्रतिदिन या शनिवार को 108 बार जाप करने से शनि की कृपा प्राप्त होती है.
शनि गायत्री मंत्र: ॐ सूर्यात्मजाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नः सौरिः प्रचोदयात्॥
शनि का यह मंत्र एकाग्रता बढ़ाता है और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार करता है.
साढ़ेसाती और ढैय्या के उपाय
हर शनिवार सुबह स्नान के बाद पीपल के पेड़ की जड़ में जल दें और 7 बार परिक्रमा करें. शनिवार के दिन शनिदेव की विधि-विधान से पूजा करें और श्रद्धापूर्वक ‘शनि स्तुति’ का पाठ करें. शनिवार को बजरंगबली की पूजा करें और नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करें. शनिवार के दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार काले तिल, साबुत उड़द, गुड़ और सरसों के तेल का दान करें. मान्यता है कि इन सभी उपयों को करने से भी साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति मिलती है.