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Shani Dosha Remedies: साढ़ेसाती या ढैय्या के समय सोना पहनना शुभ है या अशुभ? जानें क्या कहता है ज्योतिष शास्त्र

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि की साढ़ेसाती के दौरान सोना पहनना अशुभ माना जाता है। जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएं और जरूरी नियम।

 

ज्योतिष शास्त्र में सोने को बेहद महत्वपूर्ण और पवित्र धातु माना गया है। मान्यता है कि सोने का सीधा संबंध सूर्य ग्रह से होता है और इसे धारण करने से जातक की कुंडली में सूर्य से जुड़ी ऊर्जा और प्रभाव में वृद्धि होती है। हालांकि, ज्योतिष में सोना पहनने को लेकर कुछ विशेष नियम भी बताए गए हैं। मान्यता के अनुसार, सोना पहनने से पहले कुंडली में ग्रहों की स्थिति और उनकी दशा पर अवश्य विचार करना चाहिए, क्योंकि कुछ विशेष परिस्थितियों में सोना पहनना हानिकारक भी साबित हो सकता है।

⚠️ क्या शनि की साढ़ेसाती के दौरान सोना पहनना चाहिए?

लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि क्या शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान सोना पहनना चाहिए या नहीं? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि की साढ़ेसाती के समय सोना पहनना अशुभ माना जाता है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि सोने का कारक ग्रह सूर्य है, जबकि शनिदेव को सूर्यदेव का पुत्र माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य और शनि के बीच आपसी शत्रुता और मतभेद का भाव रहता है। इसी वजह से साढ़ेसाती के दौरान सोना धारण करने से शनिदेव के नाराज होने की मान्यता है, जिसके नकारात्मक परिणामस्वरूप जीवन में मुश्किलें और गुस्सा बढ़ सकता है।

🛡️ साढ़ेसाती के प्रभाव को कम करने के लिए क्या पहनना चाहिए?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान लोहे का छल्ला पहनना बेहद शुभ माना जाता है। इसे दाहिने हाथ की मध्यमा या छोटी उंगली में धारण किया जा सकता है। इसके अलावा, घोड़े की नाल या नाव की कील से बनी अंगूठी भी पहनी जाती है। वहीं, कुछ ज्योतिषी शनि के रत्न 'नीलम' को धारण करने की सलाह देते हैं, जिसे शनिवार के दिन शुक्ल पक्ष में मध्यमा उंगली में पहना जाता है। हालांकि, नीलम बेहद प्रभावशाली रत्न है, इसलिए इसे हमेशा किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह के बाद ही पहनना चाहिए।