Shravan Putrada Ekadashi Vrat Katha: पुत्रदा एकादशी से मिलती है संतान की सुख-समृद्धि, जानें व्रत की विधि और पौराणिक कथा
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी या पवित्रा एकादशी कहा जाता है. यह व्रत मुख्य रूप से संतान प्राप्ति, संतान के सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा के लिए रखा जाता है. श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत रविवार, 23 अगस्त को रखा जाएगा. इस पावन तिथि पर नियमपूर्वक व्रत रखने और पूजन करने से जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भक्त इस दिन सच्चे मन से भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना करते हैं, उनके घर में खुशहाली बनी रहती है. पंचांग के अनुसार, सही दिन पर व्रत का पालन करने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है और परिवार में सुरक्षा का माहौल तैयार होता है.
श्रावण पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व और कथा
पद्म पुराण की कथा के अनुसार प्राचीन काल में राजा महीजित और राजा सुकेतुमान ने ऋषियों के निर्देश पर इस एकादशी का व्रत रखकर योग्य एवं यशस्वी संतान प्राप्त की थी. यह व्रत करने से वंश की वृद्धि होती है, पूर्वजन्म के पापकर्म कटते हैं और भगवान श्रीहरि विष्णु तथा माता लक्ष्मी की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है. शास्त्रों में बताया गया है कि संतान के सुख और उनकी प्रगति के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है. जो श्रद्धालु निष्ठा के साथ इस पावन कथा का स्मरण करते हैं, उनके जीवन की सभी बाधाएं दूर होने लगती हैं. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलने से घर में सुख और समृद्धि का वास बना रहता है. सही नियम से पूजन करने पर व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं.
एकादशी तिथि और विष्णु पूजा का शुभ मुहूर्त
23 अगस्त को एकादशी तिथि का पावन योग बन रहा है. पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि का प्रारम्भ 23 अगस्त 2026 को प्रात: 02:00 बजे से हो जाएगा. वहीं एकादशी तिथि की समाप्ति 24 अगस्त 2026 को प्रात: 04:18 बजे तक होगी. इस पावन दिन पर विष्णु पूजा का शुभ मुहूर्त 23 अगस्त को सुबह 07:32 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा. इस शुभ समय में भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा-अर्चना करना बहुत ही उत्तम और कल्याणकारी माना जाता है. सही मुहूर्त में पूजन संपन्न करने से मन में भक्ति का भाव जगता है और पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है. इस समय का ध्यान रखकर ही सभी धार्मिक नियम पूरे करने चाहिए, जिससे जीवन में शांति बनी रहे.
व्रत के पारण का सही समय और नियम
एकादशी का व्रत अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को पारण करने के बाद ही पूर्ण माना जाता है. 23 अगस्त को रखे गए इस व्रत के पारण का समय 24 अगस्त को दोपहर 01:41 बजे से शाम 04:16 बजे तक रहेगा. भक्तों को पारण के इस तय समय के बीच ही अपना व्रत खोलना चाहिए. सही समय पर पारण करने से व्रत का नियम पूरा होता है और घर में खुशहाली आती है. शास्त्रों के अनुसार पारण के समय का पालन करना पूजा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है. शुभ मुहूर्त में व्रत खोलने से श्रीहरि विष्णु प्रसन्न होते हैं. नियम और निष्ठा के साथ किया गया यह पूजन परिवार के सभी सदस्यों के जीवन में उन्नति लाता है और अड़चनों को दूर करता है.