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Janmashtami 2026 Significance: कब है कृष्ण जन्माष्टमी 2026? जानें भगवान के जन्म से जुड़े अद्भुत चमत्कार और दुर्लभ योग

इस साल 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी जन्माष्टमी। जानिए भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय हुए अद्भुत चमत्कार, दुर्लभ योग और पावन कथा।
 

 भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव का पावन पर्व जन्माष्टमी इस बार 4 सितंबर 2026, शुक्रवार के दिन धूमधाम से मनाया जाएगा. श्री कृष्ण का जन्म कोई साधारण घटना नहीं थी, बल्कि यह तो एक अलौकिक लीला थी. जब भगवान इस धरती पर आए, तो प्रकृति और ब्रह्मांड में कई अद्भुत और पावन बदलाव देखने को मिले थे. उस पावन रात को ऐसे शुभ योग बने थे, जो इतिहास में कभी नहीं बने. उस समय कई ऐसी चमत्कारिक घटनाएं घटीं, जिन्हें देखकर हर कोई हैरान रह गया था. भगवान के आते ही कारागार की बेड़ियां टूट गई थीं और पूरे संसार में एक नई चेतना का आगमन हुआ था. यह पावन दिन हर साल हमारे जीवन में भक्ति और श्रद्धा लेकर आता है.

जन्माष्टमी पर बने दुर्लभ और पावन योग

द्वापर युग में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ लग्न के दुर्लभ संयोग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. उस समय चंद्रमा अपने उच्च स्थान में स्थित था. यह ऐसा समय था जब सभी ग्रह और नक्षत्र बहुत ही पावन स्थिति में आ गए थे. इस विशेष समय में भगवान का जन्म होना पूरी सृष्टि के लिए एक बड़ा संकेत था. यह दुर्लभ योग बहुत ही कल्याणकारी माना गया है, क्योंकि इस समय ब्रह्मांड की सारी शक्तियां एक साथ मिलकर काम कर रही थीं. भाद्रपद मास की उस पावन रात को बना यह संयोग आज भी बहुत पवित्र माना जाता है. इसी कारण से हर साल इस पावन तिथि को लोग बहुत ही श्रद्धा और नियम के साथ मनाते हैं.

जब खुद खुले कारागार के भारी दरवाजे

भगवान के जन्म लेते ही सबसे बड़ा चमत्कार मथुरा के कारागार में देखने को मिला था. कंस के भय से देवकी और वसुदेव जी कारागार में बंद थे. उन पर कड़ा पहरा लगाया गया था और बड़े-बड़े ताले लटके हुए थे. लेकिन जैसे ही भगवान का जन्म हुआ, योगमाया के प्रभाव से पहरेदार गहरी निद्रा में सो गए. उसी समय कारागार के सभी ताले और भारी दरवाजे अपने आप खुल गए. वसुदेव जी के हाथों और पैरों में पड़ी बेड़ियां भी अपने आप खुल कर गिर पड़ीं. यह सब भगवान की लीला का ही असर था कि किसी को कुछ पता भी नहीं चला और रास्ता अपने आप साफ होता चला गया. यह चमत्कार बताता है कि सत्य के आगे कोई भी बंधन टिक नहीं सकता है.

उफनती यमुना का शांत होकर मार्ग देना

जब वसुदेव जी बालक कृष्ण को कंस से बचाने के लिए गोकुल ले जाने के लिए निकले, तो बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी. उस समय यमुना नदी पूरे उफान पर थी और उसे पार करना असंभव लग रहा था. लेकिन जैसे ही बाल-कृष्ण के चरणों का स्पर्श हुआ, उफनती हुई यमुना एकदम शांत हो गई और उसने वसुदेव जी के निकलने के लिए रास्ता छोड़ दिया. बारिश से नन्हे बालक की रक्षा करने के लिए स्वयं शेषनाग ने अपना छत्र लगा दिया. इस तरह भगवान को सुरक्षित गोकुल पहुंचाया गया. यह अद्भुत दृश्य दिखाता है कि जब भगवान की कृपा होती है, तो बड़ी से बड़ी रुकावटें भी अपने आप खत्म हो जाती हैं और कठिन काम भी आसान बन जाता है.