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Varuthini Ekadashi 2026: वरुथिनी एकादशी कब है? जानें व्रत में सेंधा नमक के फायदे

वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल 2026 को है। जानें व्रत में सेंधा नमक क्यों खाना चाहिए, इसके सेहत से जुड़े फायदे और भगवान विष्णु की पूजा के शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी।

 

 इस साल वरुथिनी एकादशी का पावन व्रत 13 अप्रैल 2026, सोमवार को रखा जाएगा. वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी की तिथि 13 अप्रैल को सुबह 01:16 बजे शुरू होगी और अगले दिन 14 अप्रैल को रात 01:08 बजे समाप्त होगी. शास्त्रों में इस व्रत का बहुत अधिक महत्व बताया गया है, यह न केवल कष्टों को कम करता है बल्कि सौभाग्य की रक्षा भी करता है. व्रत के दौरान खान-पान को लेकर अक्सर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है नमक का सेवन. वरुथिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के वराह रूप की पूजा की जाती है, जो हमें हर मुश्किल से बाहर निकालते हैं. इस विशेष दिन पर सात्विक आहार का पालन करना मन की शांति के लिए बहुत जरूरी माना गया है.

एकादशी व्रत में सेंधा नमक का उपयोग और मान्यता

वरुथिनी एकादशी के व्रत में सेंधा नमक का सेवन पूरी तरह से सही माना जाता है. साधारण नमक के मुकाबले सेंधा नमक को सबसे शुद्ध माना गया है क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से मिलता है और इसे साफ करने के लिए किसी बनावटी तरीके का उपयोग नहीं किया जाता. इसे पवित्र भोजन की श्रेणी में रखा गया है, जो व्रत की शुद्धि को बनाए रखता है. एकादशी पर अनाज का सेवन मना होता है और साधारण नमक अक्सर समुद्री पानी से बनता है जिसे शुद्ध करने की प्रक्रिया में कई बार दूसरी चीजों का स्पर्श हो सकता है. इसी वजह से, उपवास के दौरान केवल पहाड़ों से मिलने वाले शुद्ध सेंधा नमक को ही प्राथमिकता दी जाती है. यह हमारी श्रद्धा और परंपराओं के साथ पूरी तरह मेल खाता है.

सेहत के लिए सेंधा नमक के फायदे

उपवास के दौरान शरीर को हल्के और ऊर्जा देने वाले भोजन की आवश्यकता होती है, जिसमें सेंधा नमक बहुत मददगार साबित होता है. यह साधारण नमक की तुलना में पाचन में बहुत आसान होता है और शरीर में रक्तचाप को संतुलित रखने में भी सहायक होता है. व्रत के समय अक्सर पानी की कमी या थकान महसूस होने लगती है, ऐसे में सेंधा नमक शरीर में जरूरी तत्वों के स्तर को बनाए रखता है. इससे आलस कम होता है और आप पूरे दिन खुद को तरोताजा महसूस करते हैं. अगर आप फलाहार के रूप में कुट्टू, सिंघाड़ा या सामा के चावल का सेवन कर रहे हैं, तो उसमें सेंधा नमक मिलाना सेहत के लिए भी अच्छा है. यह शरीर की अंदरूनी सफाई करता है और हमारे शरीर को बेहतर बनाता है.

सात्विक आहार और मन की शुद्धि का महत्व

व्रत का असली उद्देश्य केवल भोजन का त्याग करना नहीं, बल्कि अपने विचारों और आदतों को बेहतर बनाना है. वरुथिनी एकादशी पर गुरु और चंद्रमा का शुभ संयोग हमें अपनी राह आसान करने की प्रेरणा देता है, लेकिन इसके लिए मन का स्थिर होना जरूरी है. सात्विक भोजन, जिसमें सेंधा नमक और ताजे फल शामिल हों, हमारे स्वभाव में सहजता लेकर आता है. जब हम पवित्र भोजन ग्रहण करते हैं, तो हमारे विचार भी शुद्ध होते हैं और हम सही दिशा में आगे बढ़ पाते हैं. जरूरतमंदों की सेवा और मधुर वाणी का प्रयोग इस व्रत के प्रभाव को और भी ज्यादा बढ़ा देता है. याद रखें कि सच्ची भक्ति वही है जो हमें शारीरिक और मानसिक रूप से एक बेहतर इंसान बनाने में मदद करे.