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बेटी का जन्म क्यों माना जाता है लक्ष्मी का आगमन? जानें इसके पीछे का ज्योतिषीय रहस्य

क्या बेटी का जन्म सच में घर का भाग्य बदल देता है? जानें शास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार बेटी को लक्ष्मी का रूप क्यों कहा जाता है और कैसे उनके आने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है।

 

भारतीय संस्कृति में बेटी के जन्म के जन्म के समय ये हमेशा कहा जाता है कि घर मेंं लक्ष्मी का आगमन हुआ है. घर में बेटी के पैदा होने को सिर्फ एक संतान का आगमन नहीं, बल्कि साक्षात लक्ष्मी का घर में आना माना जाता है. मान्यता है कि जिस आंगन में बेटियों की किलकारी गूंजती है, वहां कभी भी दरिद्रता का वास नहीं हो पाता.

हालांकि, कई बार लोगों के मन ये बात आती हैं क्या ये सिर्फ भावनाओं में आकर माना या कहा जाता है या इसके पीछे कोई गहरी वजह भी है, तो आइए जानते हैं कि इसके पीछे की मान्यताएं क्या हैं और बेटी के जन्म से कैसे घर का भाग्य बदल जाता है?

बेटी को क्यों कहा जाता है लक्ष्मी का रूप?

ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि हर एक जन्म का अपना उद्देश्य और प्रभाव होता है. घर में बेटी के जन्म लेने पर उसकी कुंडली में मौजूद ग्रह-नक्षत्र परिवार के भाग्य से जुड़ जाते हैं. घर में स्त्री शक्ति होने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है. घर का महौल खुशनुमा होता है. कई ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि अगर लड़की की कुंडली में चंद्रमा, शुक्र और गुरु मजबूत होते हैं, तो वह घर के लिए सुख, समृद्धि लाती है. घर में आर्थिक उन्नति होती है. यही वजह है कि बेटी को साक्षात लक्ष्मी का रूप कहा जाता है.

शास्त्रों में क्या कहा गया है?

बेटी के जन्म के बाद एक पिता के अंदर उसे अच्छा जीवन देने की एक भावना जागती है. वेदों शास्त्रों में कहा गया है कि ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:’ इसका अर्थ है कि जिस घर में नारी का सम्मान किया जाता है, वहां देवता और माता लक्ष्मी वास करती हैं. बेटी को सम्मान और प्यार देने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है. ज्योतिष में शुक्र को सुख-सुविधा और धन का कारक माना गया है.

अक्सर देखा गया है कि बेटी के जन्म के बाद रुके हुए काम पूरे हो जाते हैं. नया घर या वाहन लिया जाता है. इसे ही बेटी के भाग्य से मिला फल कहा जाता है. बेटी अपने साथ पुण्य फल लेकर आती है. उसके पुण्य फल पूरे परिवार के वरदान बन जाते हैं.