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Google News: गूगल ने नाकाम किया AI वाला बड़ा साइबर हमला, जीरो-डे बग से हैकर्स चुराने वाले थे डेटा

गूगल ने एआई की मदद से हो रहे एक खतरनाक साइबर हमले को विफल किया। हैकर्स एआई के जरिए जीरो-डे बग ढूंढकर 2FA को बायपास करने की फिराक में थे। जानें क्या है पूरा मामला।

 

Google ने हाल ही में प्रकाशित एक रिसर्च में इस बात का खुलासा किया है कि एक क्रिमिनल हैकिंग ग्रुप ने एक बड़े साइबर हमले की कोशिश की थी. हैंकिंग ग्रुप ने एक ऐसे अनजान बग का पता लगाया था जिसकी जानकारी डेवलपर तक को नहीं थी और इस काम के लिए हैकर्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लिया था. ये हैकर ग्रुप किसी बड़े साइबर हमले की तैयारी कर रहा था लेकिन गूगल ने हैकर्स की इस साजिश को नाकाम कर दिया. यह घटना डिजिटल सुरक्षा के लिए AI से पैदा होने वाले संभावित खतरे को उजागर करती है.

टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन को बायपास करने की थी तैयारी

Google के Threat Intelligence Group ने कहा कि उन्होंने हैकर्स को ट्रैक किया है, जो AI मॉडल का इस्तेमाल कर जीरो डे वल्नरेबिलिटी को ढूंढकर उसका फायदा उठा रहे थे और इस तरह टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को बायपास करने की कोशिश कर रहे थे.

द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गयासुरक्षा विशेषज्ञों को सालों से यह डर रहा है कि हैकर्स AI मॉडल्स की मदद से कंप्यूटर कोड में छिपी कमियों का पता लगा सकते हैं, जिससे कि वह हमले कर सकें. कंपनी ने यह साफ तौर पर नहीं बताया कि यह हमला कब हुआ था, इसका निशाना कौन था या हैकर्स ने किस AI प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल किया था लेकिन कंपनी ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इस काम के लिए उनके Gemini चैटबॉट का इस्तेमाल किया गया था.

Zero Day Hack क्या होता है?

जीरो डे अटैक को अगर आसान भाषा में आपको समझाने की कोशिश करें तो ये एक ऐसा Cyber Attack है जो किसी भी हार्डवेयर या फिर सॉफ्टवेयर में मौजूद सुरक्षा खामी यानी Vulnerability का फायदा उठाकर किया जाता है. इस खामी का डेवलपर को पता नहीं होता और हैकर्स इसी बात का फायदा उठाकर साजिश को अंजाम देते हैं. अ

ब यहां मन में सवाल ये आता है कि इसे जीरो डे ही क्यों कहा जाता है, इसके पीछे कारण ये है कि जैसे ही हैकर्स को खामी का पता चलता है कि वह अटैक कर देते हैं और डेवलपर को इस खामी को ठीक करने के लिए जीरो डे यानी समय ही नहीं मिल पाता है.