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Shri Krishna Janmashtami Vrat 2026: अटूट आस्था की मिसाल, कानून के पेशे के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन हैं मुकेश गुलिया

अधिवक्ता मुकेश गुलिया पिछले 15 साल से जन्माष्टमी पर गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा कर रखते हैं निर्जला व्रत। जानें उनकी अनूठी आस्था के बारे में।
 

आस्था और समर्पण का अनूठा उदाहरण

15 वर्षों से गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा कर जन्माष्टमी का व्रत पूर्ण कर रहे अधिवक्ता मुकेश गुलिया

मानव जीवन में संजीवनी का काम करते हैं धार्मिक पर्व : अधिवक्ता मुकेश गुलिया

भिवानी, 04 सितंबर : भक्ति जब निस्वार्थ श्रद्धा में ढलती है, तो वह केवल एक नियम नहीं बल्कि जीवन का मूल आधार बन जाती है। कुछ ऐसी ही अटूट आस्था और निष्ठा का सुंदर उदाहरण पेश कर रहे हैं अधिवक्ता मुकेश गुलिया। कानूनी दांव-पेच और पेशेवर व्यस्तताओं के बीच भी भगवान श्री कृष्ण के प्रति उनकी अपार भक्ति देखते ही बनती है। वे पिछले 15 वर्षों से लगातार श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर निर्जला व्रत रखते आ रहे हैं और इस पवित्र दिन गोवर्धन पर्वत की पावन परिक्रमा कर रात 12 बजे कान्हा के जन्मोत्सव के साथ ही अपना व्रत पूर्ण करते हैं। अधिवक्ता मुकेश गुलिया की यह धार्मिक साधना हर साल जन्माष्टमी के अवसर पर देखने को मिलती है। वे जन्माष्टमी के पावन पर्व पर मथुरा-वृंदावन स्थित पावन गोवर्धन धाम पहुंचते हैं। वहां वे पूर्ण भक्ति भाव से पवित्र गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते हैं। जैसे ही मध्यरात्रि के ठीक 12 बजते हैं और भगवान श्री कृष्ण का प्राकट्य उत्सव मनाया जाता है, वे गोवर्धन धाम की पवित्र धरा पर ही अपना व्रत खोलते हैं।

15 वर्षों की यह अनवरत साधना उनके दृढ़ संकल्प और ईश्वर के प्रति अगाध प्रेम को दर्शाती है। अपने इस धार्मिक संकल्प और आस्था पर बात करते हुए अधिवक्ता मुकेश गुलिया ने कहा कि हमारे जीवन में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अत्यधिक महत्वपूर्ण और अलौकिक स्थान रखता है। भगवान श्री कृष्ण का जीवन दर्शन हमें हर परिस्थिति में समभाव से रहने, धर्म के मार्ग पर चलने और अपना कर्म निस्वार्थ भाव से करने की सीख देता है। उन्होंने आगे कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ऐसे पावन पर्व व्यक्ति को आत्मिक शांति और मानसिक ऊर्जा प्रदान करते हैं। मुकेश गुलिया का मानना है कि युवाओं को अपनी समृद्ध सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से अवश्य जुडऩा चाहिए। इस प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान और निष्ठा केवल व्यक्तिगत शांति का साधन नहीं हैं, बल्कि ये समाज में नैतिक मूल्यों, भाईचारे और सकारात्मक सोच का विस्तार भी करते हैं। उनकी यह 15 वर्षों की निरंतर भक्ति यात्रा आसपास के लोगों और युवा पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।