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Aban Ahmad Death Update: अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान का शव परिजनों के सुपुर्द, सुरक्षा के बीच झांसी में प्रक्रिया पूरी

सड़क हादसे में मारे गए अतीक अहमद के बेटे आबान का शव लेने भाई अजहम झांसी पहुंचा। अजहम ने प्रशासन से जेल में बंद भाइयों को अंतिम संस्कार में शामिल कराने की मांग की।

 

झांसी: माफिया अतीक अहमद के परिवार से जुड़ी एक बड़ी और अहम खबर झांसी से सामने आई है। सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले अतीक अहमद के सबसे छोटे (पांचवें) बेटे आबान अहमद का शव लेने के लिए गुरुवार को उसका भाई अजहम अहमद झांसी पहुंचा। इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए अजहम ने बेहद भावुक अपील करते हुए कहा कि उसके दोनों भाई (उमर और अली), जो इस समय अलग-अलग जेलों में बंद हैं, उन्हें छोटे भाई के अंतिम संस्कार (मिट्टी) में शामिल होने की अनुमति दी जाए।

👮 झांसी मेडिकल कॉलेज में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था: कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर परिजनों को सौंपा गया शव

अतीक के चौथे नंबर के बेटे अजहम अहमद के झांसी पहुंचने के बाद पुलिस और प्रशासन की उपस्थिति में आवश्यक कानूनी व पंचनामा औपचारिकताएं पूरी की गईं।

इसके बाद आबान के शव को परिजनों के सुपुर्द करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस दौरान अस्पताल परिसर और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कड़ी रखी गई। किसी भी संभावित अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।

💔 झांसी हाईवे पर हुआ था दर्दनाक हादसा: अतीक के परिवार में पसरा मातम

गौरतलब है कि अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान अहमद की गुरुवार को कानपुर-झांसी हाईवे पर एक भीषण सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी।

वह झांसी जेल में निरुद्ध अपने बड़े भाई अली अहमद से मिलने जा रहा था। हादसे की सूचना मिलते ही अतीक के बचे हुए परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों ने झांसी पहुंचकर शव को प्रयागराज ले जाने की तैयारियां पूरी कीं। अजहम ने रोते हुए कहा, "मेरे भाइयों को मिट्टी देने में आने दिया जाए।"

⚖️ क्या मिलेगी जेल में बंद भाइयों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति? कोर्ट और प्रशासन पर टिकी निगाहें

फिलहाल प्रशासन या जेल विभाग की ओर से जेल में बंद भाइयों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दिए जाने को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

विधिक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस संबंध में परिजनों या वकीलों द्वारा कोई आपातकालीन अर्जी दाखिल की जाती है, तो उस पर नियमानुसार सक्षम न्यायालय या प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा निर्णय लिया जाएगा। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मानवीय आधार पर जेल में बंद भाइयों को अंतिम विदाई के लिए पेरोल या कस्टडी पेरोल मिलती है या नहीं।