UPSC Success Story: कोल्हू चलाने वाले के बेटे ने रचा इतिहास; बिजनौर के अजीम अहमद ने UPSC में पाई 588वीं रैंक, जानें संघर्ष की कहानी
बिजनौर के जट नगला गांव के अजीम अहमद ने यूपीएससी 2025 में 588वीं रैंक हासिल की है। कोल्हू चलाने वाले पिता के बेटे अजीम ने AMU से इंजीनियरिंग के बाद तीसरे प्रयास में यह मुकाम पाया। जानें कैसे सीमित संसाधनों में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा क्रैक की।
देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम ने बिजनौर के एक छोटे से गांव में खुशियों की नई कहानी लिख दी. जिले के नगीना तहसील क्षेत्र के जट नगला गांव के रहने वाले अजीम अहमद ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 588वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है.
जैसे ही परिणाम घोषित हुआ और अजीम की सफलता की खबर गांव पहुंची, उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया. ग्रामीणों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया. इस समय अजीम दिल्ली में हैं और अपने परिणाम के बाद उन्हें देशभर से शुभकामनाएं मिल रही हैं.
4 भाई-बहनों में सबसे बड़े अजीम
अजीम का परिवार साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है. उनके पिता गांव में गुड़ बनाने के लिए कोल्हू चलाते हैं और साथ ही खेती-बाड़ी भी करते हैं. उनकी माता गृहिणी हैं और परिवार की देखभाल करती हैं. चार भाई-बहनों में अजीम सबसे बड़े हैं, इसलिए परिवार को उनसे हमेशा विशेष उम्मीदें रही हैं. अजीम की प्रारंभिक पढ़ाई नगीना देहात क्षेत्र के आरआर मुरारका स्कूल से हुई, जहां से उन्होंने हाई स्कूल तक की शिक्षा प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए कोटा का रुख किया और वहीं से 11वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की.
AMU से की इंजीनियरिंग की पढ़ाई
स्कूल की पढ़ाई के बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया. इंजीनियरिंग के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था. डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने अलीगढ़ में रहकर UPSC की तैयारी शुरू की और करीब छह वर्षों तक लगातार मेहनत करते रहे.
ये उनका तीसरा प्रयास था, जिसमें उन्हें सफलता मिली. परिवार के लोगों के अनुसार अजीम ने अपनी तैयारी के दौरान अनुशासन और एकाग्रता को सबसे ज्यादा महत्व दिया. वो रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे और अधिकतर समय सेल्फ स्टडी पर ध्यान देते थे. उनकी रुचि किताबें पढ़ने में रही और वही उनकी सबसे बड़ी हॉबी भी है.
भाई बहन भी हैं काफी होनहार
अजीम के परिवार में शिक्षा को लेकर लगातार सकारात्मक माहौल रहा है. उनके छोटे भाई ने भी कोटा से तैयारी करने के बाद नीट परीक्षा पास की और पिछले वर्ष अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की, उनकी दो बहनों में से एक ने एमए किया है, जबकि दूसरी बहन वर्तमान में एएमयू से एलएलबी की पढ़ाई कर रही है. परिवार में न्यायिक सेवा से जुड़े सदस्य भी हैं. अजीम के चाचा और चाची दोनों न्यायिक मजिस्ट्रेट हैं और इस समय जौनपुर में तैनात हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि अजीम की सफलता ने इलाके के युवाओं को यह विश्वास दिलाया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं.