बवानीखेड़ा मकान कार्रवाई मामला : पीडि़त परिवारों की मदद के लिए आगे आई कांग्रेस, डीसी को सौंपा ज्ञापन
बवानीखेड़ा में आशियाने उजडऩे से पीडि़त परिवारों से मिला कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल, उपायुक्त से पुनर्वास की मांग
लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकारों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी : प्रदीप नरवाल
लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकारों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी : प्रदीप नरवाल
Jun 3, 2026, 18:27 IST
भिवानी, 03 जून : ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव एवं बवानीखेड़ा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप नरवाल, कांग्रेस शहरी जिला अध्यक्ष प्रदीप जोगी तथा अधिवक्ता मनमोहन भुरटाना ने बुधवार को बवानीखेड़ा क्षेत्र के उन पीडि़त परिवारों से मुलाकात की, जिनके आवासीय मकानों को लेकर नगरपालिका एवं प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के बाद वे गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मौके पर जाकर पीडि़त परिवारों की स्थिति का जायजा लिया तथा महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों की समस्याओं को सुना। प्रतिनिधिमंडल ने बाद में भिवानी उपायुक्त से भी मुलाकात कर पीडि़त परिवारों के पुनर्वास, स्वास्थ्य सुविधाओं, भोजन, पेयजल, शिक्षा तथा अन्य आवश्यक मानवीय जरूरतों की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर प्रदीप नरवाल ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में गरीब एवं कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार एवं प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी विकास परियोजना के लिए भूमि की आवश्यकता हो तो प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, वैकल्पिक व्यवस्था तथा मानवीय अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत प्रदान की जाए तथा उनके बच्चों की शिक्षा एवं परिवारों के सम्मानजनक जीवन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
कांग्रेस शहरी जिला अध्यक्ष प्रदीप जोगी ने कहा कि पीडि़त परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में गरीब परिवारों को असहाय नहीं छोड़ा जाना चाहिए। इस अवसर पर अधिवक्ता मनमोहन भुरटाना ने कहा कि संबंधित मामले में माननीय सिविल न्यायालय भिवानी द्वारा 13 मई 2026 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पारित किया गया था। इसके अतिरिक्त दिनांक 26 मई 2026 के आदेश में न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि स्थानीय पुलिस एवं अन्य प्रतिवादी पक्षों को खसरा नं. 295/7 स्थित मकानों में रहने वाले व्यक्तियों को वहां निवास करने से रोकने का अधिकार नहीं है जब तक कि कोई अन्य आदेश पारित न किया जाए।
अधिवक्ता मनमोहन भुरटाना ने कहा कि न्यायालय द्वारा पारित आदेशों का सम्मान एवं पालन लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि पीडि़त परिवारों को न्यायालय द्वारा प्रदत्त अधिकारों का लाभ मिलना चाहिए तथा उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, सुरक्षा तथा बच्चों की शिक्षा संबंधी विषयों पर आवश्यक कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मांग की कि पीडि़त परिवारों के लिए तत्काल मानवीय सहायता, चिकित्सा सुविधाएं, बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था, पशुधन की सुरक्षा तथा जीवन-यापन के आवश्यक साधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इस अवसर पर रेणु बाला जिला उपाध्यक्ष, उमेश भारद्वाज, शिवकुमार चांग, अनिल नेहरा, राजबीर पूर्व पार्षद, धीरज टिकानिया, नरेंद्र तंवर, शिवकुमार धानक, गर्नेट पुर, रामफल मास्टर, दिनेश कौशिक, संजय गांधी, विनोद भोरीया, कृष्ण बड़सी सुमित बराड़ सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
इस अवसर पर प्रदीप नरवाल ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में गरीब एवं कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार एवं प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी विकास परियोजना के लिए भूमि की आवश्यकता हो तो प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, वैकल्पिक व्यवस्था तथा मानवीय अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत प्रदान की जाए तथा उनके बच्चों की शिक्षा एवं परिवारों के सम्मानजनक जीवन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
कांग्रेस शहरी जिला अध्यक्ष प्रदीप जोगी ने कहा कि पीडि़त परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में गरीब परिवारों को असहाय नहीं छोड़ा जाना चाहिए। इस अवसर पर अधिवक्ता मनमोहन भुरटाना ने कहा कि संबंधित मामले में माननीय सिविल न्यायालय भिवानी द्वारा 13 मई 2026 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश पारित किया गया था। इसके अतिरिक्त दिनांक 26 मई 2026 के आदेश में न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि स्थानीय पुलिस एवं अन्य प्रतिवादी पक्षों को खसरा नं. 295/7 स्थित मकानों में रहने वाले व्यक्तियों को वहां निवास करने से रोकने का अधिकार नहीं है जब तक कि कोई अन्य आदेश पारित न किया जाए।
अधिवक्ता मनमोहन भुरटाना ने कहा कि न्यायालय द्वारा पारित आदेशों का सम्मान एवं पालन लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि पीडि़त परिवारों को न्यायालय द्वारा प्रदत्त अधिकारों का लाभ मिलना चाहिए तथा उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, सुरक्षा तथा बच्चों की शिक्षा संबंधी विषयों पर आवश्यक कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मांग की कि पीडि़त परिवारों के लिए तत्काल मानवीय सहायता, चिकित्सा सुविधाएं, बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था, पशुधन की सुरक्षा तथा जीवन-यापन के आवश्यक साधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इस अवसर पर रेणु बाला जिला उपाध्यक्ष, उमेश भारद्वाज, शिवकुमार चांग, अनिल नेहरा, राजबीर पूर्व पार्षद, धीरज टिकानिया, नरेंद्र तंवर, शिवकुमार धानक, गर्नेट पुर, रामफल मास्टर, दिनेश कौशिक, संजय गांधी, विनोद भोरीया, कृष्ण बड़सी सुमित बराड़ सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।