{"vars":{"id": "123258:4912"}}

विश्व पर्यावरण दिवस पर सीबीएलयू में ग्रामीण  जनप्रतिनिधियों को पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
 

- अपने-अपने गांवों में पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण के प्रति ग्राम पंचायत प्रतिनिधि लोगों को जागरूक करें:  प्रो. दीप्ति धर्मांणी
 
 

- पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए आयोजित हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम
- जलवायु परिवर्तन, जल संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा पर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
- कार्यक्रम के समापन पर किया गया पौधारोपण, हरित भविष्य का लिया संकल्प
भिवानी, विज्ञप्ति: विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय भिवानी के पुराने परिसर में शुक्रवार को जिले की पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित सदस्यों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का आयोजन समाजशास्त्र एवं समाज कार्य विभाग तथा प्राणीशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया। कार्यक्रम की थीम प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए हमारे भविष्य के लिए रही।
कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्मांणी और कुलसचिव प्रो. भावना शर्मा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।  मंच संचालन समाजशास्त्र एवं समाज कार्य विभागाध्यक्ष डा. मनोज कुमार तेवतिया ने किया और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों मैं ग्रामीण संस्थाओं की अहम भूमिका  पर जोर दिया। 

 विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्मांणी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस तक सीमित विषय नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपने-अपने गांवों में पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने का आह्वान किया। विश्वविद्यालय की कुलसचिव प्रो. भावना शर्मा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम जनप्रतिनिधियों को पर्यावरण संरक्षण संबंधी योजनाओं और व्यवहारिक उपायों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
मुख्य वक्ता पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के समाजशास्त्र विभाग से प्रोफेसर डा. विनोद चौधरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने नानक खेती और बायो चार के तौर तरीक़ों के बारे में प्रतिनिधियों को अवगत कराया था और लगभग कैमिकल से खेती को बचाने का आह्वान किया। हरियाणा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के पूर्व परियोजना निदेशक मनोज जैन ने कहा कि स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा भविष्य की आवश्यकता है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा सहित अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाने की अपील की। ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी, देहरादून के प्रोफेसर डा. वीपी उनियाल ने आनलाइन माध्यम से जैव विविधता संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर ही सतत विकास के लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। इसके अलावा विलुप्त हो रहे कीटों के कारण कृषि क्षेत्र के प्रभाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जल एवं पर्यावरण कार्यकर्ता एडवोकेट रमेश गोयल ने जल संरक्षण को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। इस विशेष अवसर पर उन्होंने सभी उपस्थित प्रतिभागियों को जल संरक्षण पर  जल चालीसा बुकलेट भी वितरित की ।उन्होंने वर्षा जल संचयन और जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शैलेंद्र अरोड़ा ने बढ़ते प्रदूषण के दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने पर्यावरण अनुकूल गतिविधियों को अपनाने और प्रभावी कचरा प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, जल संसाधनों के सतत उपयोग, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा ग्राम स्तर पर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस अवसर पर प्रो. संजीव कुमार,  प्रो. नितिन बंसल, डा. मधुसूदन,  डॉ  स्नेहलता,  डॉ  अंशु,  डॉ  सोनल,  डॉ  धीरेन्द्र  मिश्रा,  डा. पार्वती, डा. सीमा, डा. मोनिका जांगड़ा, प्रो. जितेंद्र कुमार, डा. मूलराज और डा. मोनिका मान सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में करीब 60 सरपंच और पंचों सहित 130 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के समापन के बाद विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण किया। कार्यक्रम में पहुंचे मुख्य वक्ताओं और जनप्रतिनिधियों को पौधों भेंट किया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के निर्माण का संकल्प लिया। वक्ताओं ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल सुनिश्चित करने का आह्वान किया। अंत मैं धन्यवाद ज्ञापन प्राणीशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. ललिता गुप्ता ने दिया।