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भिवानी का फेफड़ा खुद वेंटिलेटर पर : सुध लेने वाला कोई नहीं

चौ. सुरेंद्र सिंह मैमोरियल पार्क की स्थिति हुई दयनीयय, सुविधाओं के नाम पर सिर्फ समस्याएं 
 

सालाना 20 लाख का ठेका, फिर भी सुविधाओं के नाम पर शून्य, भ्रष्टाचार की आ रही बू : बिरेंद्र सिंह ग्रेवाल
स्व. चौ. सुरेंद्र सिंह के नाम पर बने पार्क की दुर्दशा उनके नाम के अपमान के साथ जनता के स्वास्थ्य के साथ है खिलवाड़ : बिरेंद्र सिंह ग्रेवाल 


 

                                        

भिवानी, 16 अप्रैल : कहने को तो चौ. सुरेंद्र सिंह मैमोरियल पार्क शहर का सबसे महत्वपूर्ण पार्क है, जिसे पूर्व मंत्री स्व. चौधरी सुरेंद्र सिंह की स्मृति में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य और सुकून देने के लिए बनाया गया था। लेकिन आज हकीकत इसके उलट है। जो पार्क लोगों की बीमारियां दूर करने के लिए बना था, वह खुद बीमार है। प्रशासन की अनदेखी और रखरखाव के नाम पर हो रही खानापूर्ति ने इसे कचरे के ढेर और खंडहर में तब्दील कर दिया है।
      

वेटरन संगठन भिवानी के प्रधान सूबेदार मेजर बिरेंद्र सिंह ग्रेवाल बामला ने पार्क का दौरा करने के बाद तीखे शब्दों में प्रशासन पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पार्क के रखरखाव के लिए सालाना 20 लाख रुपये का ठेका दिया जाता है, लेकिन धरातल पर एक रुपया भी लगता दिखाई नहीं दे रहा। उन्होंने कहा कि पार्क की हालत इतनी दयनीय है कि यहां आने वाले नागरिक परेशानी ही उठाते है। सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है। यह सीधे तौर पर गबन और भ्रष्टाचार का मामला प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि पार्क में बने शौचालय पिछले 12 सालों से बंद पड़े हैं। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह सबसे बड़ी मुसीबत है। सरकारी संपत्ति का इस तरह दुरुपयोग प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। भीषण गर्मी और वर्कआउट के बाद लोगों को पीने के लिए साफ पानी तक मयस्सर नहीं है। वाटर कूलर और नल टूटे पड़े हैं। उन्होंने कहा कि पार्क के कई हिस्सों में कूड़े के ढेर लगे हैं, आवारा कुत्तों और पशुओं ने पार्क को अपना ठिकाना बना लिया है, जिससे मॉर्निंग वॉकर्स में डर का माहौल रहता है। यही नहीं वॉक-वे के टाइल्स उखड़ चुके हैं, फव्वारेपूरी तरह ठप हैं और बैठने वाले बेंच टूटे हुए हैं। पार्क की हरियाली अब खरपतवार और काई जमा गंदे पानी के कुंडों में बदल चुकी है।


     सूबेदार मेजर बिरेंद्र सिंह ग्रेवाल बामला ने बताया कि कई बार जिला प्रशासन और संबंधित विभाग को अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन अधिकारी कान में रुई डाले बैठे हैं। पार्क में बिजली की व्यवस्था से लेकर सुरक्षा तक के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। उन्होंने मांग की कि पार्क के रखरखाव के लिए दिए गए 20 लाख के ठेके की उच्च स्तरीय जांच हो, 12 साल से बंद पड़े शौचालयों को तुरंत क्रियाशील किया जाए, पीने के पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था युद्ध स्तर पर दुरुस्त हो। उन्होंने कहा कि स्व. चौधरी सुरेंद्र सिंह के नाम पर बने इस पार्क की ऐसी दुर्दशा न केवल उनके नाम का अपमान है, बल्कि भिवानी की जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी है। यदि समय रहते प्रशासन नहीं जागा, तो शहर का यह सबसे बड़ा पार्क केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।